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राजस्थान से कौन जाएगा राज्यसभा? रणनीति बनाने में जुटी BJP-कांग्रेस, कई बड़े नेता कतार में

राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर राज्यसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। जून 2026 में प्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटों का कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है।इन सीटों में भाजपा के रवनीत सिंह बिट्टू और राजेंद्र गहलोत के साथ कांग्रेस के नीरज डांगी शामिल हैं।

Fri, 6 March 2026 12:50 PMSachin Sharma लाइव हिन्दुस्तान
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राजस्थान से कौन जाएगा राज्यसभा? रणनीति बनाने में जुटी BJP-कांग्रेस, कई बड़े नेता कतार में

राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर राज्यसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। जून 2026 में प्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटों का कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है। इन सीटों में भाजपा के रवनीत सिंह बिट्टू और राजेंद्र गहलोत के साथ कांग्रेस के नीरज डांगी शामिल हैं। मौजूदा विधानसभा के संख्या बल को देखते हुए राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन तीन सीटों में से दो सीटें भाजपा और एक सीट कांग्रेस के खाते में जाना लगभग तय है। हालांकि असली दिलचस्पी इस बात को लेकर है कि दोनों दल इन सीटों पर किन नेताओं को राज्यसभा भेजते हैं।

राजस्थान की राजनीति में राज्यसभा सीटों का हमेशा खास महत्व रहा है, क्योंकि यहां से कई बार राष्ट्रीय राजनीति में प्रभाव रखने वाले नेताओं को मौका दिया जाता रहा है। ऐसे में इस बार भी टिकट वितरण को लेकर दोनों प्रमुख दलों के भीतर मंथन का दौर शुरू हो चुका है।

तीन सीटों का खत्म हो रहा कार्यकाल

राजस्थान से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नीरज डांगी और भाजपा के राजेंद्र गहलोत वर्ष 2020 में राज्यसभा के लिए चुने गए थे और उनका छह साल का कार्यकाल जून 2026 में समाप्त हो जाएगा। वहीं भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू अगस्त 2024 में राजस्थान से राज्यसभा पहुंचे थे, लेकिन जिस सीट से उन्हें भेजा गया उसका कार्यकाल भी जून 2026 तक ही है। ऐसे में उनका कार्यकाल लगभग दो साल का ही रहेगा।

राजनीतिक समीकरणों के अनुसार राजस्थान विधानसभा में भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत है। इसी वजह से दो सीटों पर भाजपा की जीत लगभग तय मानी जा रही है, जबकि एक सीट कांग्रेस के खाते में जा सकती है। इसी संभावित समीकरण के चलते दोनों दलों में टिकट को लेकर अंदरखाने चर्चाएं तेज हो गई हैं।

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कांग्रेस में कई दावेदार

कांग्रेस के सामने इस बार सबसे बड़ा सवाल यह है कि वह राज्यसभा के लिए स्थानीय चेहरे को मौका देती है या फिर राष्ट्रीय स्तर के किसी नेता को राजस्थान से भेजती है। पार्टी के भीतर कई नाम चर्चा में बताए जा रहे हैं।

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा का नाम संभावित उम्मीदवारों में प्रमुखता से लिया जा रहा है। माना जा रहा है कि वे मेवाड़ क्षेत्र का प्रतिनिधित्व देने की दलील के साथ अपनी दावेदारी मजबूत कर रहे हैं। इसके अलावा कांग्रेस महासचिव भंवर जितेंद्र सिंह का नाम भी चर्चाओं में है, जो लंबे समय से संगठन और राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रहे हैं।

पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी का नाम भी संभावित दावेदारों की सूची में शामिल बताया जा रहा है। राजनीतिक अनुभव और संगठन में पकड़ के कारण उन्हें भी मजबूत दावेदार माना जा रहा है।

इसी के साथ चूरू से चुनाव लड़ चुके कांग्रेस नेता रफीक मंडेलिया भी राज्यसभा जाने की इच्छा जता चुके हैं। सूत्रों के अनुसार वे दिल्ली में पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर अपनी दावेदारी पेश कर चुके हैं।

भाजपा में भी टिकट को लेकर मंथन

भाजपा में भी दोनों सीटों को लेकर अंदरूनी स्तर पर चर्चा शुरू हो गई है। एक सीट पर रवनीत सिंह बिट्टू को दोबारा मौका दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। केंद्र सरकार में मंत्री होने के साथ-साथ सिख समुदाय के प्रतिनिधित्व के लिहाज से भी पार्टी उन्हें महत्वपूर्ण मानती है।

दूसरी सीट के लिए भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं। इनमें पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया को संभावित दावेदारों में माना जा रहा है। दोनों नेताओं का संगठन और प्रदेश की राजनीति में मजबूत आधार माना जाता है।

सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण भी होंगे अहम

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राज्यसभा टिकट तय करते समय केवल राजनीतिक अनुभव ही नहीं बल्कि सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। राजस्थान की राजनीति में जातीय और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को संतुलित रखना दलों की प्राथमिकता रहती है।

कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष ओबीसी वर्ग से हैं और नेता प्रतिपक्ष दलित वर्ग से आते हैं। ऐसे में पार्टी अल्पसंख्यक या सामान्य वर्ग के किसी नेता को राज्यसभा भेजने पर भी विचार कर सकती है। वहीं भाजपा भी अपने सामाजिक समीकरणों और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवारों का चयन करने की रणनीति बना सकती है।

हालांकि राज्यसभा चुनाव में अभी कुछ समय बाकी है, लेकिन राजस्थान की राजनीति में इसकी चर्चा अभी से तेज हो गई है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा और कांग्रेस अपने-अपने उम्मीदवारों के नाम कब घोषित करती हैं और आखिरकार राज्यसभा की इस राजनीतिक दौड़ में किसे मौका मिलता है।

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