राजस्थान के विधायक आवास में NSUI प्रदेश महासचिव से मारपीट; गहलोत ने की निंदा
राजस्थान की राजधानी जयपुर के वीआईपी इलाके विधायक आवास में बुधवार दोपहर उस वक्त हड़कंप मच गया, जब नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के प्रदेश महासचिव अनिल सारण के साथ कथित तौर पर मारपीट की सनसनीखेज घटना सामने आई।

राजस्थान की राजधानी जयपुर के वीआईपी इलाके विधायक आवास में बुधवार दोपहर उस वक्त हड़कंप मच गया, जब नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के प्रदेश महासचिव अनिल सारण के साथ कथित तौर पर मारपीट की सनसनीखेज घटना सामने आई। आरोप खींवसर विधायक रेवंतराम डांगा के पौते और उनके समर्थकों पर लगे हैं। ज्योति नगर थाना पुलिस ने नामजद प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
“काम की बात” के बहाने नीचे बुलाया, फिर घेरकर हमला
घटना 26 फरवरी की दोपहर की बताई जा रही है। अनिल सारण किसी संगठनात्मक कार्य से जयपुर स्थित विधायक आवास (बी-ब्लॉक) पहुंचे थे। सूत्रों के अनुसार वे किशनगढ़ विधायक विकास चौधरी से मिलने आए थे, लेकिन उनके न मिलने पर भोपालगढ़ विधायक गीता बरवड़ के फ्लैट पर रुक गए।
इसी दौरान अनिल के मोबाइल पर एक अनजान व्हाट्सऐप कॉल आया। कॉल करने वाले ने “जरूरी काम” की बात कहकर उन्हें नीचे बुलाया। अनिल को अंदेशा नहीं था कि नीचे कुछ और ही इंतजार कर रहा है। जैसे ही वे फ्लैट से नीचे पहुंचे, आरोप है कि पहले से घात लगाए बैठे लोगों ने उन्हें घेर लिया।
गाली-गलौज से शुरू हुई बात, लात-घूंसे तक पहुंची
एफआईआर के मुताबिक, खींवसर विधायक रेवंतराम डांगा के सोशल मीडिया प्रभारी, विधायक के पौते रवींद्र डांगा, ड्राइवर सहित 8-10 लोगों ने अनिल को चारों तरफ से घेर लिया। पहले कथित तौर पर अपशब्द कहे गए, फिर बात हाथापाई तक पहुंच गई।
अनिल का आरोप है कि उनके साथ बेरहमी से लात-घूंसे से मारपीट की गई। कुछ मिनटों तक वहां अफरा-तफरी का माहौल रहा। किसी तरह खुद को छुड़ाकर वे मौके से भागे और तुरंत पुलिस को सूचना दी। घटना के बाद उन्हें प्राथमिक उपचार भी लेना पड़ा।
ज्योति नगर थाने में नामजद FIR
मामले की गंभीरता को देखते हुए ज्योति नगर थाना पुलिस ने नामजद एफआईआर दर्ज कर ली है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है। घटना स्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है।
अनिल सारण ने विधानसभा प्रशासन को भी लिखित प्रतिवेदन सौंपकर घटना की निष्पक्ष जांच और सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि फुटेज सार्वजनिक होती है तो “सच खुद-ब-खुद सामने आ जाएगा।”
विधायक पक्ष की चुप्पी, सियासत में हलचल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। नागौर जिले के खींवसर क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले दोनों पक्षों के बीच पहले से कोई मतभेद था या नहीं, यह अभी साफ नहीं है। हालांकि, राजनीतिक जानकार इसे स्थानीय स्तर की प्रतिद्वंद्विता से जोड़कर देख रहे हैं।
विधायक पक्ष की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन अंदरखाने यह चर्चा जोरों पर है कि मामला छात्र राजनीति से निकलकर अब मुख्यधारा की राजनीति में तूल पकड़ सकता है।
विधायक आवास में ही असुरक्षा, तो आमजन कहां जाए?”
जयपुर विधायक आवास में एनएसयूआई प्रदेश महासचिव अनिल सारण के साथ कथित मारपीट मामले ने अब सियासी रंग और गहरा कर दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा विधायक के समर्थकों द्वारा की गई कथित मारपीट और दुर्व्यवहार की कड़ी भर्त्सना की है। गहलोत ने लिखा कि यदि विधायक आवास परिसर जैसे संवेदनशील और सुरक्षित माने जाने वाले स्थान पर इस तरह की घटनाएं होंगी, तो अपनी समस्याओं को लेकर विधायकों से मिलने आने वाला आमजन खुद को कैसे सुरक्षित महसूस करेगा? उन्होंने प्रदेश सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की और कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में भय का माहौल नहीं, भरोसे का वातावरण होना चाहिए।
विधानसभा परिसर की सुरक्षा पर भी सवाल
घटना विधायक आवास जैसे संवेदनशील और उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्र में हुई है। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिर कैसे 8-10 लोग एक साथ वहां मौजूद रहे और मारपीट जैसी घटना घट गई? क्या सुरक्षा कर्मियों को भनक नहीं लगी या सूचना के बावजूद वे समय पर नहीं पहुंचे?
इन सवालों के जवाब फिलहाल जांच के दायरे में हैं। पुलिस का कहना है कि घटना के हर पहलू की बारीकी से जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पुरानी रंजिश या अचानक भड़की तकरार?
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि क्या यह हमला किसी पुरानी रंजिश का नतीजा था या उस समय किसी बात को लेकर अचानक विवाद भड़क उठा। फोन कॉल की डिटेल, मौके पर मौजूद लोगों की लोकेशन और सीसीटीवी फुटेज अहम साक्ष्य साबित हो सकते हैं।
फिलहाल, जयपुर से लेकर नागौर के खींवसर तक इस घटना की चर्चा है। छात्र राजनीति से जुड़े संगठनों ने भी इस मामले को गंभीर बताया है और निष्पक्ष जांच की मांग की है। आने वाले दिनों में यह प्रकरण प्रदेश की सियासत में नई बहस को जन्म दे सकता है।
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