samaj santulan ke liye 3 santan jaruri rajasthan me bole sangh padadhikari समाज संतुलन के लिए 3 संतान जरूरी; राजस्थान में बोले संघ पदाधिकारी, Jaipur Hindi News - Hindustan
More

समाज संतुलन के लिए 3 संतान जरूरी; राजस्थान में बोले संघ पदाधिकारी

देश में जनसंख्या संतुलन को लेकर जारी बहस के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने एक बार फिर परिवार में न्यूनतम तीन बच्चों की अवधारणा को दोहराया है।

Mon, 16 March 2026 08:36 PMSachin Sharma लाइव हिन्दुस्तान, जयपुर
share
समाज संतुलन के लिए 3 संतान जरूरी; राजस्थान में बोले संघ पदाधिकारी

देश में जनसंख्या संतुलन को लेकर जारी बहस के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने एक बार फिर परिवार में न्यूनतम तीन बच्चों की अवधारणा को दोहराया है। संघ का मानना है कि समाज में संतुलन बनाए रखने और पारिवारिक संरचना को मजबूत करने के लिए प्रत्येक दंपति के कम से कम तीन संतान होना उचित माना जा सकता है। यह बात राजस्थान क्षेत्र संघचालक डॉ. रमेशचंद्र अग्रवाल ने संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक के बाद कही।

हरियाणा के समालखा में 13 से 15 मार्च तक आयोजित इस तीन दिवसीय बैठक में संगठन विस्तार, सामाजिक मुद्दों और जनसंख्या संतुलन जैसे विषयों पर चर्चा हुई। बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में डॉ. अग्रवाल ने कहा कि समाज के दीर्घकालिक संतुलन के लिए जनसंख्या का स्थिर और संतुलित रहना आवश्यक है।

परिवार में तीन बच्चों की अवधारणा पर जोर

डॉ. अग्रवाल ने कहा कि जनसंख्या नीति बनाना सरकार का विषय है, लेकिन समाज के स्तर पर संतुलित परिवार व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि संघ के भीतर लंबे समय से यह विचार सामने आता रहा है कि यदि किसी समाज का फर्टिलिटी रेट 2.1 के आसपास है तो संतुलन बनाए रखने के लिए परिवार में कम से कम तीन बच्चों की अवधारणा पर विचार किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि परिवार में अधिक भाई-बहनों का होना बच्चों के मानसिक, सामाजिक और बौद्धिक विकास के लिए कई मायनों में लाभकारी माना जाता है। उनके अनुसार संयुक्त पारिवारिक माहौल और भाई-बहनों के बीच संवाद से बच्चों में सहयोग, संवेदनशीलता और सामाजिक समझ का विकास होता है।

डॉ. अग्रवाल ने यह भी स्पष्ट किया कि संघ इस विषय पर सरकार को किसी प्रकार का औपचारिक प्रस्ताव देने की प्रक्रिया में नहीं है। हालांकि उन्होंने कहा कि समाज में जनसंख्या असंतुलन से कई तरह की सामाजिक चुनौतियां पैदा हो सकती हैं और इस पर गंभीर विमर्श होना जरूरी है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:राजस्थान सहित देशभर में संघ कार्य का विस्तार, प्रतिनिधि सभा में रखी गई रिपोर्ट

राजस्थान में संघ का ढांचा बदला

अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में संगठनात्मक स्तर पर भी एक अहम फैसला लिया गया है। डॉ. अग्रवाल ने बताया कि राजस्थान में संघ के कार्य को अधिक प्रभावी बनाने के लिए संगठनात्मक ढांचे में बड़ा बदलाव किया गया है।

अब तक प्रदेश में संघ के तीन प्रांत—चित्तौड़, जोधपुर और जयपुर—संगठनात्मक गतिविधियों का संचालन करते थे। नए निर्णय के तहत इन्हें पुनर्गठित कर पांच संभागों की नई संरचना बनाई जा रही है। इन पांच संभागों में चित्तौड़, जोधपुर, जयपुर, कोटा और बीकानेर शामिल होंगे।

उन्होंने कहा कि यह बदलाव कार्य के बेहतर प्रबंधन और विकेंद्रीकरण को ध्यान में रखते हुए किया गया है। नई व्यवस्था के तहत निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक स्थानीय स्तर तक पहुंचेगी और कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी निभाने के अधिक अवसर मिलेंगे।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:जेल के अंदर इफ्तार पार्टी, जोधपुर सेंट्रल जेल से सोशल मीडिया पर पोस्ट

जातिगत जनगणना पर संघ का दृष्टिकोण

जातिगत जनगणना को लेकर भी संघ का दृष्टिकोण सामने आया। डॉ. अग्रवाल ने बताया कि अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में इस विषय पर कोई औपचारिक चर्चा नहीं हुई, लेकिन संघ का रुख स्पष्ट है।

उन्होंने कहा कि यदि बेहतर शासन और योजनाओं के निर्माण के लिए किसी प्रकार की सामाजिक या जातिगत गणना की जाती है तो उससे आपत्ति नहीं है। लेकिन यदि इसका उपयोग समाज को बांटने या राजनीतिक लाभ के लिए किया जाता है तो संघ इसका विरोध करेगा।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:जिन्होंने राम को नकारा, राम ने उन्हें नकार दिया; जालौर में गरजे CM योगी

दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच रहा संघ का कार्य

संघ का विस्तार अब देश के दूरदराज क्षेत्रों तक पहुंच रहा है। डॉ. अग्रवाल ने बताया कि पूर्वोत्तर भारत में संघ के कार्यक्रमों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

उन्होंने कहा कि नागालैंड में पहले हिंदू नाम से कार्यक्रम आयोजित करना भी चुनौतीपूर्ण माना जाता था, लेकिन अब वहां 19 स्थानों पर हिंदू सम्मेलन आयोजित किए जा चुके हैं और 11 स्थानों पर ऐसे कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। इसी तरह अरुणाचल प्रदेश में स्वधर्म सम्मेलन के नाम से कार्यक्रम आयोजित हुए, जिनमें लगभग 38 हजार लोगों ने भाग लिया।

अंडमान-निकोबार के नौ प्रमुख द्वीपों से भी 13 हजार से अधिक लोगों की भागीदारी हिंदू सम्मेलनों में दर्ज की गई है।

शाखाओं का तेजी से विस्तार

संघ के संगठनात्मक विस्तार के आंकड़े भी बैठक में सामने आए। डॉ. अग्रवाल के अनुसार पिछले एक वर्ष में देशभर में संघ की शाखाओं की संख्या में लगभग छह हजार की वृद्धि हुई है और अब यह संख्या 88 हजार से अधिक हो चुकी है।

वहीं संगठनात्मक स्थानों की संख्या 55 हजार से ज्यादा हो गई है। राजस्थान में भी संघ का कार्य तेजी से बढ़ रहा है। प्रदेश में करीब 7 हजार 910 स्थानों पर संगठनात्मक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। यहां 12 हजार 109 शाखाएं और 5 हजार 950 मिलन नियमित रूप से आयोजित किए जा रहे हैं।

समाज की सज्जन शक्ति को संगठित करने का लक्ष्य

डॉ. अग्रवाल ने कहा कि संघ का मूल उद्देश्य समाज की सज्जन शक्ति को राष्ट्रहित में संगठित करना है। उन्होंने बताया कि पंच परिवर्तन जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास किया जा रहा है।

उनके अनुसार भारतीयता और हिंदुत्व केवल विचारधारा नहीं बल्कि जीवन जीने की एक पद्धति है, जिसका उद्देश्य समाज में नैतिक मूल्यों, समरसता और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करना है।

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।