राजस्थान से शुरू हुआ डिजिटल कवच मिशन, साइबर ठगी के खिलाफ तैयार होगी 10 लाख लोगों की डिजिटल सेना
मोबाइल फोन आज हर व्यक्ति की जेब में है, लेकिन इसी मोबाइल के जरिए बढ़ते साइबर अपराधों ने लोगों की चिंता भी बढ़ा दी है। कभी फर्जी बैंक कॉल, कभी सोशल मीडिया हैकिंग तो कभी एआई से बनाए गए डीपफेक वीडियो तकनीक जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है

मोबाइल फोन आज हर व्यक्ति की जेब में है, लेकिन इसी मोबाइल के जरिए बढ़ते साइबर अपराधों ने लोगों की चिंता भी बढ़ा दी है। कभी फर्जी बैंक कॉल, कभी सोशल मीडिया हैकिंग तो कभी एआई से बनाए गए डीपफेक वीडियो तकनीक जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, उतनी ही तेजी से साइबर ठगी के तरीके भी बदल रहे हैं। ऐसे माहौल में एक पहल सामने आई है, जिसका उद्देश्य लोगों को इन खतरों से बचाने के लिए डिजिटल रूप से तैयार करना है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ अंकुर चंद्रकांत ने “मिशन 1 मिलियन: डिजिटल कवच” नाम से एक अभियान शुरू करने की घोषणा की है। इस पहल का मकसद युवाओं और आम नागरिकों को साइबर खतरों के बारे में जागरूक करना और उन्हें डिजिटल सुरक्षा के बुनियादी कौशल सिखाना बताया जा रहा है।
साइबर खतरे अब हर मोबाइल तक
पिछले कुछ वर्षों में ऑनलाइन ठगी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बैंकिंग फ्रॉड, फर्जी लिंक, ओटीपी ठगी, सोशल मीडिया स्कैम और अब एआई आधारित डीपफेक वीडियो जैसे नए तरीके सामने आ रहे हैं। कई मामलों में लोग अपनी पूरी जमा-पूंजी तक गंवा चुके हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीक से जुड़े इन अपराधों से बचने के लिए सिर्फ कानून ही नहीं, बल्कि डिजिटल जागरूकता भी उतनी ही जरूरी है। इसी जरूरत को देखते हुए यह पहल शुरू की गई है।
तीन चरणों में चलेगा अभियान
अभियान को तीन चरणों में आगे बढ़ाने की योजना बनाई गई है।
पहले चरण में डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से लोगों को साइबर खतरों के बारे में जानकारी दी जाएगी। इसमें स्कैम अलर्ट, डीपफेक और एआई आधारित फ्रॉड के तरीकों के बारे में बताया जाएगा ताकि लोग समय रहते सावधान हो सकें।
दूसरे चरण में लाइव ऑनलाइन सत्र आयोजित करने की योजना है, जहां मोबाइल सुरक्षा, सोशल मीडिया प्राइवेसी और डिजिटल हाइजीन जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें बताया जाएगा कि सामान्य उपयोगकर्ता अपने मोबाइल और ऑनलाइन खातों को सुरक्षित रखने के लिए किन सावधानियों का पालन कर सकते हैं।
अंतिम चरण में बड़े स्तर पर ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने की बात कही गई है। इस चरण में एडवांस साइबर सिक्योरिटी और एंटी-स्कैम तकनीकों से जुड़ी जानकारी दी जाएगी।
डिजिटल जागरूकता पर जोर
अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि आज के समय में डिजिटल साक्षरता उतनी ही जरूरी हो गई है जितनी पारंपरिक शिक्षा। खासकर युवाओं के लिए इंटरनेट और सोशल मीडिया का उपयोग सुरक्षित तरीके से करना बेहद अहम है।
अंकुर चंद्रकांत का कहना है कि अक्सर लोग तकनीक का उपयोग तो करते हैं, लेकिन उससे जुड़े जोखिमों को समझ नहीं पाते। कई बार छोटी-सी लापरवाही भी बड़ी आर्थिक हानि का कारण बन जाती है। ऐसे में अगर लोग पहले से जागरूक हों, तो कई साइबर अपराधों को रोका जा सकता है।
कौन हैं अंकुर चंद्रकांत
अंकुर चंद्रकांत साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में लंबे समय से काम कर रहे हैं। वे एक साइबर हेल्प एनजीओ से भी जुड़े हैं, जो साइबर अपराध रोकथाम और महिला सुरक्षा से संबंधित मामलों में जागरूकता फैलाने का काम करता है।
बताया जाता है कि वे पहले गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी वैश्विक कंपनियों से भी जुड़े रहे हैं और कई कानून प्रवर्तन एजेंसियों तथा राज्य पुलिस के साथ साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सहयोग कर चुके हैं। करीब 15 वर्षों के अनुभव के साथ वे इस क्षेत्र में प्रशिक्षण और जागरूकता अभियानों से जुड़े रहे हैं।
बढ़ते साइबर अपराधों के बीच नई पहल
डिजिटल इंडिया के दौर में जहां सरकारी सेवाओं से लेकर बैंकिंग और व्यापार तक सब कुछ ऑनलाइन होता जा रहा है, वहीं साइबर सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
ऐसे में डिजिटल जागरूकता को लेकर शुरू किए जा रहे अभियान को साइबर अपराध के खिलाफ एक सामाजिक पहल के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बड़ी संख्या में लोग साइबर सुरक्षा के बुनियादी नियमों को समझ लें, तो ऑनलाइन ठगी के मामलों में काफी हद तक कमी लाई जा सकती है।
डिजिटल दुनिया में बढ़ते जोखिमों के बीच यह पहल इस सवाल को भी सामने लाती है कि क्या आने वाले समय में साइबर सुरक्षा हर नागरिक के लिए एक जरूरी कौशल बन जाएगी। फिलहाल इतना जरूर है कि तकनीक के इस दौर में सुरक्षित रहने के लिए जागरूकता ही सबसे मजबूत “डिजिटल कवच” साबित हो सकती है।
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