नफ़रत का जवाब मोहब्बत से देंगे; टोंक कंबल विवाद पर कांग्रेस का बड़ा ऐलान
टोंक जिले की निवाई तहसील का ग्राम करेड़ा बुजुर्ग इन दिनों एक कंबल वितरण कार्यक्रम को लेकर सुर्खियों में है। ठंड से राहत देने के लिए आयोजित कार्यक्रम अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। भाजपा के पूर्व सांसद सुखबीर सिंह जौनपुरिया पर आरोप है कि एक गरीब महिला को पहले कंबल दिया गया

टोंक जिले की निवाई तहसील का ग्राम करेड़ा बुजुर्ग इन दिनों एक कंबल वितरण कार्यक्रम को लेकर सुर्खियों में है। ठंड से राहत देने के लिए आयोजित कार्यक्रम अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। भाजपा के पूर्व सांसद सुखबीर सिंह जौनपुरिया पर आरोप है कि एक गरीब महिला को पहले कंबल दिया गया, लेकिन उसका धर्म मुस्लिम होने की जानकारी मिलते ही कथित तौर पर कंबल वापस ले लिया गया। आरोपों के सामने आने के बाद क्षेत्र में नाराज़गी का माहौल है और मामला सियासी रंग ले चुका है।
क्या है पूरा मामला?
ग्रामीणों के अनुसार, गांव में आयोजित कंबल वितरण कार्यक्रम में कई जरूरतमंद महिलाएं और बुजुर्ग पहुंचे थे। आरोप है कि वितरण के दौरान एक महिला से उसका धर्म पूछा गया। पहले उसे कंबल दिया गया, लेकिन जब उसने खुद को मुस्लिम बताया तो कथित तौर पर कंबल वापस ले लिया गया। घटना का वीडियो और चर्चा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि गांव में पहले कभी इस तरह की स्थिति नहीं बनी। ग्रामीणों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या राहत सामग्री भी अब पहचान के आधार पर बांटी जाएगी?
कांग्रेस का पलटवार: नफ़रत का जवाब मोहब्बत से
घटना पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष एम डी चोपदार ने बयान जारी करते हुए कहा, “नफ़रत का जवाब मोहब्बत से देंगे।” उन्होंने 24 फरवरी को सुबह 11 बजे पटेल चौक पर सर्वधर्म महिलाओं को कंबल वितरण की घोषणा की है।
कांग्रेस का कहना है कि यह कार्यक्रम प्रदेश कांग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक विभाग और जिला कांग्रेस कमेटी टोंक अल्पसंख्यक विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होगा। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि जिन मुस्लिम महिलाओं के साथ कथित रूप से कंबल वापस लेने की घटना हुई, उन्हें प्राथमिकता से कंबल दिए जाएंगे।
कांग्रेस इस मुद्दे को सामाजिक सौहार्द और संवैधानिक मूल्यों से जोड़कर देख रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि राजस्थान की मिट्टी में सद्भाव और भाईचारे की परंपरा रही है, उसे आहत करने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
भाजपा की चुप्पी, बढ़ती सियासत
इस पूरे मामले पर भाजपा की ओर से अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ताओं का कहना है कि आरोप राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित हो सकते हैं और तथ्य सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टोंक, जो पहले भी साम्प्रदायिक सौहार्द और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के लिए चर्चित रहा है, वहां इस तरह का विवाद आगामी राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। राजस्थान की राजनीति में सामाजिक मुद्दों पर तीखी बयानबाज़ी नई नहीं है, लेकिन राहत सामग्री को लेकर उठे सवालों ने बहस को और संवेदनशील बना दिया है।
राजस्थान की परंपरा बनाम नई राजनीति
राजस्थान को “रंगीलो” राज्य कहा जाता है—जहां मेलों, त्योहारों और साझा संस्कृति की लंबी विरासत है। ऐसे में टोंक की घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सामाजिक सेवा कार्यक्रम भी अब राजनीतिक ध्रुवीकरण का मैदान बनते जा रहे हैं?
विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में छोटे-छोटे घटनाक्रम भी बड़े राजनीतिक प्रतीक बन जाते हैं। कंबल वितरण जैसा साधारण कार्यक्रम जब धर्म के चश्मे से देखा जाने लगे, तो यह समाज में अविश्वास की रेखाएं गहरी कर सकता है।
आगे क्या?
24 फरवरी को प्रस्तावित कांग्रेस के कंबल वितरण कार्यक्रम पर अब सबकी निगाहें हैं। क्या यह कदम राजनीतिक जवाब होगा या सामाजिक संदेश—यह देखने वाली बात होगी। वहीं, भाजपा की आधिकारिक प्रतिक्रिया और प्रशासनिक स्तर पर किसी जांच की घोषणा भी इस विवाद की दिशा तय कर सकती है।
फिलहाल, टोंक में ठंड से ज्यादा सियासी तापमान बढ़ा हुआ है। एक कंबल ने राजस्थान की राजनीति में बहस की ऐसी चिंगारी जलाई है, जिसकी आंच दूर तक महसूस की जा रही है।
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