जयपुर में 6 साल की बच्ची से कथित अश्लील हरकत, कार्रवाई की रफ्तार पर सवाल
राजस्थान की राजधानी जयपुर के सोडाला थाना क्षेत्र में 6 वर्षीय बच्ची के साथ कथित अश्लील हरकत का मामला सामने आया है। घटना के बाद आरोपी नरेश गुप्ता के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और बीएनएस की धारा 75(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है

राजस्थान की राजधानी जयपुर के सोडाला थाना क्षेत्र में 6 वर्षीय बच्ची के साथ कथित अश्लील हरकत का मामला सामने आया है। घटना के बाद आरोपी नरेश गुप्ता के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और बीएनएस की धारा 75(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है, लेकिन जांच की रफ्तार को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। परिजनों का आरोप है कि 10 फरवरी 2026 को केस दर्ज होने के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
शिकायत के मुताबिक, बच्ची के पिता अपनी बेटी के साथ बाजार स्थित एक बीमा कंपनी के कार्यालय में प्लान संबंधी चर्चा के लिए गए थे। आरोप है कि वहां मौजूद ऑफिस मैनेजर नरेश गुप्ता ने बातचीत के बाद दोनों को घर छोड़ने का प्रस्ताव दिया। रास्ते में पिता कुछ सामान लेने नीचे उतरे, इसी दौरान कार में मौजूद बच्ची के साथ कथित रूप से गलत हरकत की गई।
परिवार का कहना है कि बच्ची रोते हुए बाहर आई और पूरी घटना बताई, जिसके बाद मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। स्थानीय लोगों ने आरोपी को पकड़कर पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची और मामला दर्ज किया गया। हालांकि, इसके बाद की कार्रवाई को लेकर परिजन नाराज़ हैं।
मेडिकल जांच और गिरफ्तारी पर सवाल
परिजनों का आरोप है कि केस दर्ज हुए करीब दो सप्ताह बीत चुके हैं, लेकिन न तो आरोपी की गिरफ्तारी हुई है और न ही बच्ची का मेडिकल परीक्षण कराया गया। बाल यौन अपराधों के मामलों में शुरुआती मेडिकल जांच बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में देरी से साक्ष्य कमजोर पड़ सकते हैं, जिससे आरोपी को लाभ मिल सकता है।
राजस्थान में पॉक्सो मामलों के त्वरित निस्तारण को लेकर समय-समय पर सख्ती के निर्देश दिए जाते रहे हैं। राज्य सरकार और पुलिस मुख्यालय की ओर से संवेदनशील मामलों में प्राथमिकता से जांच के निर्देश होते हैं, लेकिन इस मामले में कथित देरी ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
परिवार की गुहार, सीएम आवास तक पहुंचे
कार्रवाई में कथित ढिलाई से आक्रोशित बच्ची के पिता मुख्यमंत्री आवास पहुंचे और अधिकारियों से मिलकर शिकायत दर्ज कराई। उनका कहना है कि बच्ची मानसिक रूप से डरी हुई है और घटना को याद कर सहम जाती है। परिवार ने बच्ची की काउंसलिंग, सुरक्षा और त्वरित न्याय की मांग की है।
स्थानीय लोगों में भी नाराज़गी देखी जा रही है। उनका कहना है कि यदि बच्ची ने साहस न दिखाया होता तो मामला दब सकता था। लोगों ने आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी और जांच की निगरानी वरिष्ठ अधिकारियों से कराने की मांग उठाई है।
राजस्थान में पॉक्सो मामलों की चुनौती
राजस्थान में पिछले कुछ वर्षों में पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज मामलों की संख्या में बढ़ोतरी देखी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता बढ़ने से शिकायतें सामने आ रही हैं, लेकिन साथ ही जांच और अभियोजन की प्रक्रिया को और मजबूत करने की जरूरत है। विशेष पॉक्सो अदालतों का गठन किया गया है ताकि मामलों का शीघ्र निस्तारण हो सके, परंतु जमीनी स्तर पर देरी की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रहती हैं।
कानूनी जानकारों के अनुसार, ऐसे मामलों में मेडिकल परीक्षण, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और सीसीटीवी फुटेज अहम भूमिका निभाते हैं। यदि शुरुआती चरण में ही सख्ती नहीं बरती जाती, तो केस की दिशा प्रभावित हो सकती है।
पुलिस का पक्ष
पुलिस सूत्रों का कहना है कि जांच प्रक्रिया जारी है और संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। अधिकारियों का दावा है कि कानून के तहत आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। हालांकि, गिरफ्तारी और मेडिकल परीक्षण में देरी के आरोपों पर आधिकारिक रूप से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
न्याय की उम्मीद में परिवार
राजधानी में सामने आया यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर रहा है कि संवेदनशील अपराधों में कानून का क्रियान्वयन कितनी तेजी और पारदर्शिता से होता है। परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है और पूरे राजस्थान की नजर अब इस बात पर है कि दर्ज गंभीर धाराओं में आरोपी के खिलाफ कार्रवाई कितनी शीघ्र और प्रभावी होती है।
फिलहाल, यह मामला पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिका है क्या आरोपी की जल्द गिरफ्तारी होगी? क्या आवश्यक प्रक्रियाएं समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएंगी?
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