राजस्थान में पूर्व IAS सुबोध अग्रवाल समेत 4 के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट; ठिकानों पर दबिश
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की विशेष अदालत ने जल जीवन मिशन (JJM) से जुड़े कथित घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए फरार चार आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं।

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की विशेष अदालत ने जल जीवन मिशन (JJM) से जुड़े कथित घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए फरार चार आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं। इनमें पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल समेत चार लोग शामिल हैं। कोर्ट के आदेश के बाद एसीबी की टीमें आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही हैं और उनके संभावित ठिकानों पर तलाश जारी है।
एसीबी अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई जल जीवन मिशन में हुए कथित भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े प्रकरण में की जा रही है। इस मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो कोर्ट संख्या-1 की ओर से वर्ष 2024 में दर्ज केस में शुक्रवार को गिरफ्तारी वारंट जारी करने के आदेश दिए गए।
कोर्ट के आदेश में पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल के साथ-साथ आरोपी जीतेंद्र शर्मा, संजीव गुप्ता और मुकेश गोयल के खिलाफ भी गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए हैं। एसीबी ने बताया कि चारों आरोपी फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं और उनकी गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें गठित कर दी गई हैं।
संभावित ठिकानों पर दबिश
कोर्ट के आदेश मिलने के बाद एसीबी की टीमें आरोपियों की तलाश में सक्रिय हो गई हैं। अधिकारियों के मुताबिक आरोपियों के संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है। इसके साथ ही उनके संपर्कों और आवाजाही की भी निगरानी की जा रही है, ताकि जल्द से जल्द उन्हें गिरफ्तार किया जा सके।
एसीबी ने स्पष्ट किया है कि यदि आरोपियों की गिरफ्तारी वारंट की तामील जल्द नहीं हो पाती है तो अदालत से उनकी संपत्तियों को कुर्क करने के आदेश जारी कराने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि कानून के तहत आगे की कार्रवाई पूरी सख्ती के साथ की जाएगी।
जेजेएम में अनियमितताओं की जांच
दरअसल, यह पूरा मामला केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन के तहत कराए गए कार्यों में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं से जुड़ा हुआ है। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाना है, लेकिन जांच एजेंसियों को इसमें वित्तीय गड़बड़ियों और प्रक्रियागत उल्लंघनों के संकेत मिले थे।
इसी आधार पर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने पहले व्यापक जांच शुरू की थी और कई स्थानों पर एक साथ छापेमारी की कार्रवाई की थी। जांच के दौरान दस्तावेजों और रिकॉर्ड की पड़ताल में कई संदिग्ध लेन-देन और प्रक्रियागत अनियमितताएं सामने आई थीं।
कई राज्यों में छापेमारी
एसीबी ने इस मामले की जांच के दौरान राजस्थान समेत कई राज्यों में एक साथ छापेमारी की थी। अधिकारियों के अनुसार जयपुर, बाड़मेर, जालोर और सीकर सहित राजस्थान के विभिन्न जिलों के अलावा बिहार, झारखंड और दिल्ली में भी कार्रवाई की गई थी। कुल मिलाकर करीब 15 अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड जुटाए गए थे।
इन छापों के दौरान जांच टीमों ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, कंप्यूटर डेटा और वित्तीय लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड जब्त किए थे। प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले कि कुछ ठेके और भुगतान संदिग्ध परिस्थितियों में किए गए थे।
फर्जी बिल और टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी
जांच के दौरान सामने आया कि कुछ मामलों में फर्जी बिलों के जरिए भुगतान दिखाने और वित्तीय रिकॉर्ड में हेरफेर करने के आरोप हैं। इसके अलावा टेंडर प्रक्रिया में भी कथित तौर पर नियमों की अनदेखी और अनियमितताओं के संकेत मिले हैं।
एसीबी अधिकारियों का कहना है कि इन सभी बिंदुओं की गहराई से जांच की जा रही है। दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड का विश्लेषण किया जा रहा है, ताकि पूरे नेटवर्क और जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका स्पष्ट हो सके।
गिरफ्तारी के प्रयास जारी
एसीबी के मुताबिक फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। टीमों को अलग-अलग स्थानों पर लगाया गया है और आरोपियों की संभावित गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
अधिकारियों ने कहा कि जैसे ही आरोपियों का पता चलता है, उन्हें गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया जाएगा। वहीं यदि वे गिरफ्तारी से बचते रहते हैं तो कानून के तहत संपत्ति कुर्क करने समेत अन्य कठोर कार्रवाई भी की जा सकती है।
एसीबी का कहना है कि जल जीवन मिशन से जुड़े इस मामले की जांच अभी जारी है और आगे भी कई अहम खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। जांच एजेंसी का फोकस इस पूरे प्रकरण में शामिल सभी जिम्मेदार लोगों की भूमिका सामने लाने और कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने पर है।
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