सब सेट था… बस सेक्रेटरी की स्पेलिंग ने बिगाड़ा खेल; एक गलती और राजस्थान SOG तक पहुंच गया पूरा नेटवर्क
राजस्थान में ग्रेड थर्ड टीचर भर्ती-2022 से जुड़े ताइक्वांडो फर्जी सर्टिफिकेट कांड का खुलासा किसी बड़ी तकनीकी जांच या गुप्त सूचना से नहीं, बल्कि एक छोटी सी स्पेलिंग मिस्टेक से हुआ।

राजस्थान में ग्रेड थर्ड टीचर भर्ती-2022 से जुड़े ताइक्वांडो फर्जी सर्टिफिकेट कांड का खुलासा किसी बड़ी तकनीकी जांच या गुप्त सूचना से नहीं, बल्कि एक छोटी सी स्पेलिंग मिस्टेक से हुआ। एक ई-मेल में लिखे गए सेक्रेटरी शब्द की गलत स्पेलिंग ने ऐसा शक पैदा किया कि स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने जब उसकी तह तक जांच की तो पूरा फर्जी नेटवर्क सामने आ गया। यह मामला बताता है कि किस तरह एक छोटी गलती कभी-कभी बड़े अपराधों का पर्दाफाश कर देती है।
एक ई-मेल और शुरू हुआ शक
मामले की शुरुआत तब हुई जब ताइक्वांडो सर्टिफिकेट के सत्यापन से जुड़ा एक ई-मेल एसओजी के हाथ लगा। यह ई-मेल ताइक्वांडो फेडरेशन के नाम से भेजा गया था और उसमें 39 अभ्यर्थियों के खेल प्रमाण पत्रों को सही बताया गया था।
पहली नजर में यह मेल बिल्कुल सामान्य लगा। ई-मेल की भाषा भी औपचारिक थी और उसमें यह लिखा गया था कि जिन अभ्यर्थियों के सर्टिफिकेट भेजे गए हैं, वे फेडरेशन के रिकॉर्ड के अनुसार वैध हैं। लेकिन जब अधिकारियों ने ई-मेल को ध्यान से पढ़ा, तो एक छोटी सी बात ने सबका ध्यान खींच लिया।
मेल में सेक्रेटरी शब्द की स्पेलिंग गलत लिखी हुई थी।
एक शब्द ने खड़ा कर दिया बड़ा सवाल
सरकारी या राष्ट्रीय स्तर के किसी भी खेल संगठन के आधिकारिक ई-मेल में भाषा और स्पेलिंग की इतनी बड़ी गलती होना असामान्य माना जाता है। एसओजी अधिकारियों को यही बात खटक गई।
जांच अधिकारियों का मानना था कि अगर यह मेल सच में ताइक्वांडो फेडरेशन के किसी पदाधिकारी ने भेजा होता, तो इतनी सामान्य स्पेलिंग मिस्टेक होने की संभावना बेहद कम थी।
यही वह बिंदु था, जहां से पूरे मामले की दिशा बदल गई। अधिकारियों ने तय किया कि इस ई-मेल की तकनीकी जांच कराई जाए।
तकनीकी जांच में खुला राज
ई-मेल की डिजिटल ट्रेसिंग शुरू की गई तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। सबसे पहले यह पता चला कि जिस ई-मेल आईडी से सत्यापन रिपोर्ट भेजी गई थी, वह ताइक्वांडो फेडरेशन की आधिकारिक आईडी नहीं थी।
आरोपियों ने असली ई-मेल आईडी से मिलती-जुलती एक नई आईडी बना ली थी, ताकि देखने में वह आधिकारिक लगे। यह आईडी जीमेल प्लेटफॉर्म पर बनाई गई थी।
जब तकनीकी विशेषज्ञों ने आईपी एड्रेस और अन्य डिजिटल डेटा की जांच की, तो पता चला कि यह ई-मेल भारत से नहीं बल्कि दुबई से बनाया गया था।
दुबई से चल रहा था फर्जी मेल ऑपरेशन
जांच के दौरान सामने आया कि इस फर्जी ई-मेल आईडी का इस्तेमाल विमलेंदु कुमार झा नाम का व्यक्ति कर रहा था। उसने खुद को ताइक्वांडो फेडरेशन से जुड़ा पदाधिकारी बताकर मेल भेजा था।
जब एसओजी ने ताइक्वांडो फेडरेशन ऑफ इंडिया की आधिकारिक सूची की जांच की तो उसमें इस नाम का कोई पदाधिकारी नहीं मिला। इससे साफ हो गया कि यह पूरी पहचान ही फर्जी थी।
इसके बाद एसओजी ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आईं।
कैसे किया गया खेल
पूरे फर्जीवाड़े की योजना काफी सोची-समझी थी। ग्रेड थर्ड टीचर भर्ती में खेल कोटे से चयनित अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्रों का सत्यापन शिक्षा विभाग द्वारा संबंधित खेल संघ से ई-मेल के जरिए कराया जाता है।
आरोपियों को इस प्रक्रिया की जानकारी थी। उन्होंने इसी व्यवस्था का फायदा उठाने की योजना बनाई।
सबसे पहले दलालों के जरिए अभ्यर्थियों से संपर्क किया गया। उन्हें भरोसा दिलाया गया कि खेल कोटे से उनकी सरकारी नौकरी लगवाई जा सकती है। इसके बाद उनके लिए ताइक्वांडो के फर्जी सर्टिफिकेट तैयार करवाए गए।
जब शिक्षा विभाग ने इन सर्टिफिकेटों का सत्यापन करने के लिए फेडरेशन को मेल भेजा, तो आरोपियों ने उसी से मिलती-जुलती फर्जी ई-मेल आईडी से जवाब भेज दिया कि सभी सर्टिफिकेट सही हैं।
विभाग ने उस जवाब को असली मान लिया और कई अभ्यर्थियों की नियुक्ति भी कर दी।
छोटी गलती ने गिरा दिया पूरा नेटवर्क
अगर ई-मेल में सेक्रेट्री शब्द की स्पेलिंग सही लिखी होती, तो संभव है कि यह मामला लंबे समय तक सामने ही नहीं आता।
लेकिन इसी छोटी सी गलती ने अधिकारियों के मन में शक पैदा किया और फिर तकनीकी जांच ने पूरे फर्जी नेटवर्क को बेनकाब कर दिया।
जांच के बाद एसओजी ने इस मामले में 19 अभ्यर्थियों सहित कुल 20 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें दलाल, फर्जी ई-मेल बनाने वाला व्यक्ति और फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर नौकरी पाने वाले लोग शामिल हैं।
अब भी खुल सकते हैं कई राज
जांच एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क सिर्फ एक भर्ती तक सीमित नहीं हो सकता। संभावना है कि इसी तरह की फर्जी ई-मेल और दस्तावेजों का इस्तेमाल अन्य भर्तियों में भी किया गया हो।
फिलहाल एसओजी पैसों के लेनदेन और पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश कर रही है। लेकिन इस पूरे मामले ने यह जरूर साबित कर दिया कि अपराध कितना भी योजनाबद्ध क्यों न हो, कभी-कभी एक छोटी सी गलती ही उसे बेनकाब कर देती है।
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