MLA सिफारिश करना बंद कर दे,अस्पतालों के पद खाली नहीं रहेंगे; राजस्थान के चिकित्सा मंत्री की दो टूक
राजस्थान विधानसभा में स्वास्थ्य विभाग की अनुदान मांगों पर हुई बहस के जवाब में स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा कि राज्य सरकार मेडिकल क्षेत्र को लेकर पूरी तरह गंभीर है और बजट में लगातार वृद्धि की गई है।

राजस्थान विधानसभा में स्वास्थ्य विभाग की अनुदान मांगों पर हुई बहस के जवाब में स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा कि राज्य सरकार मेडिकल क्षेत्र को लेकर पूरी तरह गंभीर है और बजट में लगातार वृद्धि की गई है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2019-20 में स्वास्थ्य का बजट 13 हजार करोड़ रुपये था, जो 2022-23 में बढ़कर 20 हजार करोड़ हुआ। वर्तमान सरकार के कार्यकाल में इसे 27 हजार करोड़ तक ले जाया गया और वर्ष 2026-27 के लिए 31 हजार करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान रखा गया है।
खींवसर ने दावा किया कि कांग्रेस सरकार की तुलना में मौजूदा बजट 53 प्रतिशत से अधिक है। उन्होंने कहा, “सरकार ने मेडिकल क्षेत्र पर दिल खोलकर खर्च किया है, पैसों का कोई अभाव नहीं है। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए खुला बजट दिया है।”
मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर पर 10 हजार करोड़
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि राज्य में मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने पर 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा रहे हैं। मेडिकल कॉलेजों में फूड कोर्ट बनाए जाएंगे। इसके अलावा 500 करोड़ रुपये की लागत से संभाग मुख्यालयों पर मेडिकल कॉलेजों के पास धर्मशालाएं बनाई जाएंगी, जहां मरीजों के परिजनों को निशुल्क ठहरने की सुविधा मिलेगी।
भर्तियों को लेकर उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने पांच साल में 29 हजार भर्तियां की थीं, जबकि वर्तमान सरकार ने दो साल में 52 हजार 409 भर्तियां की हैं। इनमें 25 हजार नर्सिंग स्टाफ और डॉक्टरों की नियुक्ति मेरिट और पोर्टल के माध्यम से उनकी पसंद के आधार पर की गई है।
खाली पदों पर सिफारिश बंद करने की अपील
सरकारी अस्पतालों में रिक्त पदों के मुद्दे पर खींवसर ने कहा कि विधायक सिफारिश करना बंद कर दें तो किसी भी अस्पताल में पद खाली नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि कई बार संशोधन और सिफारिशों के चलते पदों का संतुलन बिगड़ता है। “अगर सभी विधायक यह वादा कर दें कि सिफारिश नहीं करेंगे तो एक भी अस्पताल में पद खाली नहीं रहेगा,” उन्होंने कहा।
कोरोना वैक्सीन और हार्ट अटैक पर विवाद
बहस के दौरान कांग्रेस विधायक घनश्याम मेहर ने कोरोना के बाद युवाओं में हार्ट अटैक के मामलों में बढ़ोतरी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि लोगों में यह भ्रम है कि कोवीशील्ड जैसी वैक्सीन लेने वालों को हार्ट अटैक हो रहे हैं और इस पर रिसर्च कराई जानी चाहिए।
इस पर बीजेपी विधायक श्रीचंद कृपलानी ने बीच में टोका और पूछा कि उन्हें कौन सी वैक्सीन लगी थी। मेहर ने जवाब दिया कि उन्हें नहीं पता कि कौन सी वैक्सीन लगी थी। इस दौरान मंत्री मदन दिलावर सहित कई भाजपा विधायकों ने आपत्ति जताई और कहा कि कांग्रेस की पुरानी आदत है वैक्सीन पर सवाल उठाना। सदन में काफी देर तक नोकझोंक और हंगामा चलता रहा।
गहलोत पर टिप्पणी से गरमाया सदन
इससे पहले भाजपा विधायक संदीप शर्मा द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर बिना नाम लिए की गई टिप्पणी पर भी सदन में हंगामा हुआ। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने आपत्ति जताते हुए टिप्पणी को कार्यवाही से हटाने की मांग की। दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई, जिसके बाद सभापति ने हस्तक्षेप कर स्थिति शांत कराई।
जलदाय विभाग पर भी तकरार
प्रश्नकाल के दौरान जल जीवन मिशन के तहत ढाणियों में पानी कनेक्शन के सवाल पर भी बहस हुई। जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी ने कहा कि नहरी क्षेत्रों में पंजाब से आने वाले पानी में हेवी मेटल की समस्या रहती है और नहरबंदी के समय दिक्कत बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि अभी हेवी मेटल की जांच की लैब जयपुर में है, लेकिन जल्द ही श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ में भी टेस्टिंग लैब स्थापित की जाएगी।
विशेषाधिकार हनन और जांच के निर्देश
विश्वविद्यालयों में प्राइवेट विद्यार्थियों से विमर्श शुल्क वसूली के मुद्दे पर टीकाराम जूली और डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा के बीच भी तीखी बहस हुई। जूली ने विशेषाधिकार हनन का आरोप लगाया। वहीं, जनजाति क्षेत्रों के आश्रम-हॉस्टलों में बिना टेंडर खाद्य सामग्री खरीद के मामले में टीएडी मंत्री बाबूलाल खराड़ी सवालों में घिर गए। दरों में अंतर स्पष्ट नहीं कर पाने पर स्पीकर ने पूरे मामले की जांच के निर्देश दिए।
दिनभर चली बहस और हंगामे के बीच स्वास्थ्य बजट, भर्तियों और इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार के दावों के साथ-साथ वैक्सीन, पानी की गुणवत्ता और प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर भी सत्ता-विपक्ष आमने-सामने रहे।
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