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राजस्थान में एक और यूनिवर्सिटी का नाम बदलने की तैयारी, क्या RUHS को मिलेगा नया नाम?

राजस्थान विधानसभा में स्वास्थ्य विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान भाजपा विधायक कालीचरण सराफ ने स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक सुधार की जरूरत बताते हुए कई अहम सुझाव रखे। 

Wed, 18 Feb 2026 10:44 PMSachin Sharma लाइव हिन्दुस्तान
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राजस्थान में एक और यूनिवर्सिटी का नाम बदलने की तैयारी, क्या RUHS को मिलेगा नया नाम?

राजस्थान विधानसभा में स्वास्थ्य विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान भाजपा विधायक कालीचरण सराफ ने स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक सुधार की जरूरत बताते हुए कई अहम सुझाव रखे। उन्होंने राज्य की प्रमुख चिकित्सा शिक्षण संस्था Rajasthan University of Health Sciences (आरयूएचएस) का नाम बदलकर पूर्व उपराष्ट्रपति Bhairon Singh Shekhawat के नाम पर ‘भैरोसिंह सिंह शेखावत स्टेट हेल्थ यूनिवर्सिटी’ रखने का प्रस्ताव रखा।

सराफ ने जयपुर के Gangauri Hospital का नाम भी जनसंघ के प्रख्यात विचारक Deendayal Upadhyaya के नाम पर करने की मांग की। उन्होंने कहा कि राज्य की ऐतिहासिक और वैचारिक विरासत से जुड़े व्यक्तित्वों के नाम पर संस्थानों का नामकरण करने से नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलेगी।

ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था पर चिंता

विधानसभा में बोलते हुए सराफ ने ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाओं की स्थिति पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लगभग 2500 सरकारी अस्पताल छोटे जिलों और ग्रामीण इलाकों में संचालित हो रहे हैं तथा करीब 75 प्रतिशत मेडिकल स्टाफ के पद भी इन्हीं क्षेत्रों के लिए स्वीकृत हैं। इसके बावजूद डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और पैरामेडिकल कर्मचारी ग्रामीण पोस्टिंग से बचते हैं।

उनका आरोप था कि कई बार राजनीतिक प्रभाव या प्रशासनिक दबाव के जरिए शहरों में प्रतिनियुक्ति करवा ली जाती है, जिससे गांवों और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होती हैं। परिणामस्वरूप वहां के गरीब और जरूरतमंद मरीजों को जिला मुख्यालय या संभागीय अस्पतालों तक जाना पड़ता है। गंभीर मामलों में मरीजों को जयपुर जैसे बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है, जिससे समय और आर्थिक बोझ दोनों बढ़ते हैं।

सरकारी डॉक्टरों की पहली पोस्टिंग गांव में हो

सराफ ने सुझाव दिया कि नए नियुक्त सरकारी डॉक्टरों की पहली पोस्टिंग कम से कम पांच वर्ष के लिए ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में अनिवार्य की जानी चाहिए। इसे प्रभावी बनाने के लिए उन्होंने डॉक्टरों से 50 लाख रुपये का बॉन्ड भरवाने का प्रस्ताव रखा, ताकि वे निर्धारित अवधि तक सेवा देने के लिए बाध्य रहें।

उन्होंने कहा कि जब तक कठोर और स्पष्ट नीति नहीं बनेगी, तब तक ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचा मजबूत नहीं हो पाएगा। उनका मानना है कि ग्रामीण सेवा को अनिवार्य करने से अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ेगी और प्राथमिक स्तर पर ही बेहतर इलाज संभव हो सकेगा।

शहरी भत्ता बंद, ग्रामीण भत्ता शुरू करने का सुझाव

विधायक ने वर्तमान वेतन संरचना पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शहरों में तैनात डॉक्टरों को शहरी भत्ता दिया जाता है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले डॉक्टरों के लिए कोई विशेष प्रोत्साहन व्यवस्था नहीं है।

उन्होंने सुझाव दिया कि शहरी भत्ता बंद कर उसकी जगह ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाएं दे रहे डॉक्टरों को विशेष ग्रामीण भत्ता दिया जाए। इससे ग्रामीण सेवा को आकर्षक बनाया जा सकेगा और डॉक्टर वहां काम करने के लिए प्रेरित होंगे।

बच्चों की शिक्षा का मुद्दा भी उठाया

सराफ ने कहा कि कई डॉक्टर ग्रामीण पोस्टिंग से इसलिए भी बचते हैं क्योंकि उनके बच्चों की शिक्षा प्रभावित होती है। उन्होंने सरकार से मांग की कि ग्रामीण सेवा में लगे डॉक्टरों के बच्चों को शहरों के अच्छे स्कूलों में प्रवेश दिलाने की व्यवस्था की जाए। इससे डॉक्टरों की पारिवारिक चिंताएं कम होंगी और वे ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाएं देने के लिए तैयार होंगे।

पारदर्शी ट्रांसफर नीति की मांग

विधायक ने स्वास्थ्य सेवाओं को संतुलित और प्रभावी बनाने के लिए पारदर्शी ट्रांसफर नीति लागू करने पर जोर दिया। उनका कहना था कि यदि स्पष्ट और निष्पक्ष नीति लागू की जाए तो अनावश्यक दबाव और सिफारिशों की गुंजाइश कम होगी।

उन्होंने कहा कि दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी समय पर गुणवत्तापूर्ण इलाज मिलना चाहिए। इसके लिए मानव संसाधन का समान वितरण और मजबूत प्रशासनिक ढांचा जरूरी है।

विधानसभा में रखे गए इन सुझावों को स्वास्थ्य व्यवस्था में संरचनात्मक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। अब यह देखना होगा कि सरकार इन प्रस्तावों पर क्या रुख अपनाती है और क्या ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए ठोस नीति सामने आती है।

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