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नोटों से गांधीजी की फोटो हटा दो; राजस्थान विधानसभा में MLA का बयान बना चर्चा का विषय

राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र के दौरान अनुदान मांगों पर चल रही बहस उस समय अचानक तीखी हो गई, जब कांग्रेस विधायक घनश्याम मेहर ने दिल्ली में आयोजित AI समिट और महात्मा गांधी के नाम को लेकर चल रही चर्चाओं का मुद्दा उठाया। 

Fri, 20 Feb 2026 12:52 PMSachin Sharma लाइव हिन्दुस्तान
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नोटों से गांधीजी की फोटो हटा दो; राजस्थान विधानसभा में MLA का बयान बना चर्चा का विषय

राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र के दौरान अनुदान मांगों पर चल रही बहस उस समय अचानक तीखी हो गई, जब कांग्रेस विधायक घनश्याम मेहर ने दिल्ली में आयोजित AI समिट और महात्मा गांधी के नाम को लेकर चल रही चर्चाओं का मुद्दा उठाया। सदन में मेहर के बयान—“अगर गांधीजी से इतनी ही दिक्कत है तो नोटों से भी तस्वीर हटा दीजिए”—ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया और यह टिप्पणी चर्चा का विषय बन गई।

AI समिट में ‘नकली रोबोट’ का मुद्दा

बहस के दौरान मेहर ने दिल्ली में आयोजित एक प्रतिष्ठित AI समिट का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि Galgotias University की ओर से एक चीनी रोबोट को स्वदेशी तकनीक बताकर प्रस्तुत किया गया। उन्होंने इसे देश की साख से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए कहा कि इस तरह की घटनाओं से वैश्विक मंच पर भारत की तकनीकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं।

मेहर ने कहा, “अगर किसी अंतरराष्ट्रीय मंच पर विदेशी उत्पाद को भारतीय नवाचार बताकर पेश किया जाता है, तो यह केवल एक संस्थान की गलती नहीं होती, बल्कि इससे देश की प्रतिष्ठा प्रभावित होती है। पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है कि आखिर यह हो क्या रहा है?” उन्होंने इसे धोखाधड़ी करार देते हुए सरकार से स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की।

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‘देश की साख से खिलवाड़’ का आरोप

विधायक ने सदन में कहा कि भारत आज तकनीकी और डिजिटल क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में किसी भी प्रकार की भ्रामक प्रस्तुति देश की छवि को नुकसान पहुंचा सकती है। उन्होंने सरकार से मांग की कि मामले की जांच कराई जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में किसी भी मंच पर देश की तकनीक को लेकर गलत दावे न किए जाएं।

मेहर ने इसे केवल तकनीकी गलती नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी का प्रश्न बताया। उनका कहना था कि जब देश ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भरता की बात करता है, तब इस तरह की घटनाएं उन प्रयासों को कमजोर करती हैं।

गांधीजी के नाम पर सियासी तंज

तकनीकी मुद्दे के बाद मेहर ने विचारधारा से जुड़ा प्रश्न उठाते हुए कहा कि अगर कुछ लोग Mahatma Gandhi के नाम से परहेज रखते हैं, तो फिर आधे-अधूरे कदम क्यों? उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “अगर गांधीजी से इतनी ही तकलीफ है, तो योजनाओं से नाम हटाने के बजाय नोटों से भी उनकी तस्वीर हटा दीजिए।”

उनका यह बयान सदन में हंगामे का कारण बना। सत्ता पक्ष के विधायकों ने इस पर आपत्ति जताई, जबकि विपक्षी सदस्यों ने मेहर का समर्थन किया। कुछ देर तक दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।

मेहर ने आरोप लगाया कि महापुरुषों के नाम और विरासत को लेकर राजनीति की जा रही है। उन्होंने कहा कि गांधीजी केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि राष्ट्र की विचारधारा और स्वतंत्रता संग्राम की पहचान हैं। ऐसे में उनके नाम पर किसी भी तरह की राजनीति उचित नहीं है।

आर्थिक नीति पर भी सवाल

सदन में मेहर ने राज्य की आर्थिक दिशा को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि प्रदेश का विकास केवल एक-दो बड़े उद्योगपतियों के भरोसे संभव नहीं है। “सरकार को प्रवासी राजस्थानियों और छोटे-मध्यम निवेशकों का विश्वास जीतना होगा। जब तक व्यापक स्तर पर निवेश का माहौल नहीं बनेगा, तब तक सर्वांगीण विकास संभव नहीं है,” उन्होंने कहा।

उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार ऐसी नीतियां बनाए जिससे लघु और मध्यम उद्योगों को प्रोत्साहन मिले और रोजगार के अधिक अवसर सृजित हों। उनके अनुसार, केवल बड़े निवेश समझौतों से जमीन पर वास्तविक बदलाव नहीं आता।

सियासी हलकों में चर्चा तेज

मेहर का बयान सोशल और राजनीतिक हलकों में तेजी से चर्चा का विषय बन गया। सत्ता पक्ष के नेताओं ने इसे “अनावश्यक उकसावा” बताया, जबकि कांग्रेस के अन्य विधायकों ने इसे “विचारधारा की स्पष्ट अभिव्यक्ति” कहा।

बजट सत्र के दौरान उठे इस मुद्दे ने साफ कर दिया कि तकनीकी नवाचार से लेकर ऐतिहासिक विरासत तक, हर विषय पर राजनीतिक धार तेज है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि AI समिट में उठाए गए आरोपों और गांधीजी के नाम पर दिए गए बयान पर सरकार क्या औपचारिक प्रतिक्रिया देती है।

फिलहाल, “नोटों से गांधीजी की फोटो हटा दो” वाली टिप्पणी ने विधानसभा की कार्यवाही को सुर्खियों में ला दिया है और बजट बहस के बीच सियासी विमर्श को नई दिशा दे दी है।

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