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इंतजारशास्त्र में उलझा राजस्थान, तैयार संस्थान फिर भी बंद; अशोक गहलोत ने सरकार पर कसा तंज

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि राजस्थान का भविष्य इंतजारशास्त्र की भेंट चढ़ता जा रहा है।

Tue, 24 March 2026 10:09 AMSachin Sharma लाइव हिन्दुस्तान, जयपुर
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इंतजारशास्त्र में उलझा राजस्थान, तैयार संस्थान फिर भी बंद; अशोक गहलोत ने सरकार पर कसा तंज

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि राजस्थान का भविष्य इंतजारशास्त्र की भेंट चढ़ता जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिसंबर 2023 के बाद से प्रदेश में जनहित की योजनाओं और प्रोजेक्ट्स की रफ्तार को जानबूझकर धीमा कर दिया गया है, जिससे विकास प्रभावित हो रहा है।

इंतजारशास्त्र से थम रहा विकास

गहलोत ने अपने बयान में कहा कि मौजूदा सरकार की कार्यशैली के चलते प्रदेश में एक अजीब स्थिति बन गई है, जहां फैसले लेने में अनावश्यक देरी हो रही है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल परियोजनाओं की लागत बढ़ रही है, बल्कि आम जनता को मिलने वाले लाभ भी टल रहे हैं।

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महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट बना राजनीतिक मुद्दा

पूर्व सीएम ने जयपुर के जेएलएन मार्ग स्थित Mahatma Gandhi Institute of Governance and Social Sciences का जिक्र करते हुए कहा कि यह संस्थान 2024 में बनकर तैयार हो चुका है, लेकिन इसे अभी तक शुरू नहीं किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार इसे केवल इसलिए शुरू नहीं कर रही क्योंकि यह Mahatma Gandhi के नाम पर है।

233 करोड़ से तैयार हुआ संस्थान

गहलोत ने बताया कि अक्टूबर 2022 में करीब 233 करोड़ रुपये की लागत से इस संस्थान की नींव रखी गई थी। इसे Tata Institute of Social Sciences और MIT World Peace University की तर्ज पर विकसित किया गया, ताकि प्रदेश के युवाओं को सुशासन और सामाजिक विज्ञान में उच्च स्तर की शिक्षा और रिसर्च का अवसर मिल सके।

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स्वायत्त दर्जा, राजनीति से दूर रखने की कोशिश

उन्होंने कहा कि संस्थान को एक्ट के जरिए स्वायत्त दर्जा दिया गया था, जिससे यह राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त रह सके। गहलोत के मुताबिक, इस तरह के संस्थान किसी एक दल के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को ध्यान में रखकर बनाए जाते हैं।

सरकार पर ‘राजनीतिक द्वेष’ का आरोप

गहलोत ने आरोप लगाया कि सत्ता परिवर्तन के बाद पिछली सरकार की योजनाओं को ठंडे बस्ते में डालने की प्रवृत्ति बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि गांधी जी के नाम और उनके आदर्शों से दूरी बनाना संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है और इससे युवाओं के सपनों के साथ अन्याय हो रहा है।

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जल्द शुरू करने की मांग, दी चेतावनी

पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार से मांग की है कि वह तुच्छ राजनीति से ऊपर उठकर इस संस्थान को जल्द से जल्द शुरू करे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जनहित की योजनाओं को इसी तरह रोका गया, तो प्रदेश की जनता समय आने पर इसका जवाब जरूर देगी।

सियासत में बढ़ेगा टकराव

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस मुद्दे पर आने वाले समय में सियासी घमासान और तेज हो सकता है। शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दे अब प्रदेश की राजनीति के केंद्र में आते नजर आ रहे हैं, जिससे सरकार और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ना तय माना जा रहा है।

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