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सुमित केस में खुलेंगे बड़े राज? राजस्थान से असम तक खंगाले जा रहे संदिग्ध कनेक्शन

जासूसी और देशद्रोह के एक बड़े मामले में राजस्थान इंटेलिजेंस और एयरफोर्स की संयुक्त कार्रवाई ने एक ऐसे नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जिसकी जड़ें देश के कई राज्यों तक फैली हुई हैं।

Mon, 23 March 2026 04:35 PMSachin Sharma लाइव हिन्दुस्तान, जयपुर
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सुमित केस में खुलेंगे बड़े राज? राजस्थान से असम तक खंगाले जा रहे संदिग्ध कनेक्शन

जासूसी और देशद्रोह के एक बड़े मामले में राजस्थान इंटेलिजेंस और एयरफोर्स की संयुक्त कार्रवाई ने एक ऐसे नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जिसकी जड़ें देश के कई राज्यों तक फैली हुई हैं। असम के चबुआ एयरफोर्स स्टेशन पर तैनात 36 वर्षीय सुमित कुमार को गिरफ्तार किया गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि वह पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में था और संवेदनशील सैन्य जानकारी साझा कर रहा था।

सोशल मीडिया से शुरू हुआ ‘हनीट्रैप’ का खेल

जांच एजेंसियों के अनुसार, सुमित कुमार वर्ष 2023 में सोशल मीडिया के जरिए कुछ विदेशी प्रोफाइल्स के संपर्क में आया। शुरुआत में यह संपर्क सामान्य बातचीत और दोस्ती तक सीमित रहा, लेकिन धीरे-धीरे यह एक संगठित ‘हनीट्रैप’ में बदल गया। बताया जा रहा है कि आकर्षक प्रोफाइल और भावनात्मक बातचीत के जरिए सुमित को जाल में फंसाया गया।

इसके बाद उसे पैसे का लालच दिया गया और बदले में एयरफोर्स से जुड़ी गोपनीय सूचनाएं मांगी गईं। सुमित, जो मल्टी-टास्किंग स्टाफ के रूप में कार्यरत था, अपनी पहुंच का गलत इस्तेमाल करते हुए दस्तावेजों और सूचनाओं को डिजिटल माध्यम से साझा करने लगा।

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जैसलमेर से खुला नेटवर्क, असम तक पहुंचे तार

इस पूरे मामले की कड़ी राजस्थान के जैसलमेर से जुड़ती है। जनवरी 2026 में झबरा राम नामक एक संदिग्ध की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों को महत्वपूर्ण सुराग मिले। पूछताछ में सामने आया कि वह एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा है, जिसके तार असम तक जुड़े हुए हैं।

इसी इनपुट के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया गया और सुमित कुमार पर निगरानी शुरू की गई। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि वह इस नेटवर्क की एक अहम कड़ी है, जो एयरफोर्स स्टेशन के भीतर से संवेदनशील जानकारी लीक कर रहा था।

पैसे के लालच में देश की सुरक्षा से समझौता

जांचकर्ताओं का कहना है कि सुमित को गोपनीय सूचनाओं के बदले नियमित रूप से आर्थिक लाभ दिया जा रहा था। शुरुआती जांच में बैंकिंग और डिजिटल ट्रांजैक्शन के कुछ सबूत भी सामने आए हैं, जिनकी विस्तृत पड़ताल की जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की जासूसी गतिविधियां न केवल सैन्य प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को खतरे में डालती हैं, बल्कि सीमा पर तैनात जवानों की जान को भी जोखिम में डाल सकती हैं।

संयुक्त कार्रवाई में गिरफ्तारी, जयपुर में पूछताछ

राजस्थान इंटेलिजेंस और एयरफोर्स की संयुक्त टीम ने चबुआ में कार्रवाई करते हुए सुमित कुमार को हिरासत में लिया। इसके बाद उसे जयपुर लाया गया, जहां उससे गहन पूछताछ की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ में उसने कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की हैं, जिससे जांच का दायरा और बढ़ सकता है।

नेटवर्क में और लोगों की तलाश जारी

एजेंसियां अब इस बात की जांच कर रही हैं कि सुमित अकेला काम कर रहा था या उसके साथ अन्य लोग भी इस नेटवर्क में शामिल हैं। इसके अलावा यह भी खंगाला जा रहा है कि उसने अब तक कितनी और किस स्तर की संवेदनशील जानकारी साझा की है।

इस मामले के सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं और देशभर के संवेदनशील ठिकानों पर निगरानी बढ़ा दी गई है।

डिजिटल सबूत बने सबसे बड़ा हथियार

जांच में सामने आया है कि सुमित की गतिविधियों के कई डिजिटल सबूत मिले हैं, जिनमें चैट रिकॉर्ड, ट्रांजैक्शन डिटेल्स और डेटा ट्रांसफर शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल फॉरेंसिक जांच इस केस में निर्णायक भूमिका निभा रही है।

फिलहाल, यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा होने के कारण बेहद संवेदनशील माना जा रहा है और एजेंसियां हर पहलू को गहराई से खंगाल रही हैं।

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