मेरी मर्जी…टोंक कंबल विवाद में फिर बोले पूर्व सांसद;PM मोदी का नाम लेकर दी सफाई
राजस्थान के टोंक जिले में पिछले महीने सामने आए कंबल वितरण विवाद ने एक बार फिर सियासी तूल पकड़ लिया है। निवाई विधानसभा क्षेत्र के करेडा बुजुर्ग गांव में हुए इस प्रकरण को लेकर पूर्व भाजपा सांसद सुखबीर सिंह जौनपुरिया ने अब अपनी चुप्पी तोड़ते हुए खुलकर सफाई दी है।

राजस्थान के टोंक जिले में पिछले महीने सामने आए कंबल वितरण विवाद ने एक बार फिर सियासी तूल पकड़ लिया है। निवाई विधानसभा क्षेत्र के करेडा बुजुर्ग गांव में हुए इस प्रकरण को लेकर पूर्व भाजपा सांसद सुखबीर सिंह जौनपुरिया ने अब अपनी चुप्पी तोड़ते हुए खुलकर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया, बल्कि यह कार्यक्रम उनके कार्यकर्ताओं के सम्मान के लिए आयोजित किया गया था।
जौनपुरिया ने पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “बताओ मैंने क्या गलत किया? कंबल ही तो बांटे हैं। अपने कार्यकर्ताओं का सम्मान करना गलत कैसे हो सकता है?” उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई सरकारी कार्यक्रम नहीं था, बल्कि निजी स्तर पर आयोजित कार्यक्रम था, जिसमें उनके समर्थकों और कार्यकर्ताओं को आमंत्रित किया गया था।
‘कार्यकर्ताओं का था कार्यक्रम, सभी को देना जरूरी नहीं’
पूर्व सांसद ने आगे कहा कि सरकार की योजनाएं सभी के लिए होती हैं, लेकिन यह कार्यक्रम खासतौर पर कार्यकर्ताओं के लिए रखा गया था। उन्होंने बताया कि जब एक महिला से बातचीत हुई तो उन्होंने उससे उसका नाम और साथ आए लोगों की संख्या पूछी। महिला ने बताया कि वे 20-25 लोग हैं। इस पर जौनपुरिया ने कहा कि उन्होंने साफ तौर पर मना कर दिया और कहा, “ठहर-ठहर, कतई नहीं दूंगा, भला मानो चाहे बुरा मानो।”
उनका कहना है कि यह उनका व्यक्तिगत कार्यक्रम था और इसमें किसे कंबल देना है या नहीं देना है, यह उनका अधिकार है।
पीएम मोदी का जिक्र, कांग्रेस पर निशाना
कार्यक्रम के दौरान जौनपुरिया ने अपने बयान को आगे बढ़ाते हुए नरेंद्र मोदी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के अजमेर दौरे के दौरान उनके विचारों को समर्थन मिला था।
अपने संबोधन में उन्होंने कांग्रेस पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आज की कांग्रेस पहले जैसी पार्टी नहीं रही है। जौनपुरिया ने दावा किया कि प्रधानमंत्री पहले ही अपने भाषण में कह चुके हैं कि देश में कांग्रेस का मूल स्वरूप खत्म हो चुका है और अब यह “मुस्लिम लीग माओवादी” जैसी पार्टी बन गई है।
विजय बैंसला के बयान से बढ़ी सियासी हलचल
इसी कार्यक्रम में गुर्जर नेता विजय बैंसला के तेवर भी चर्चा का विषय बने रहे। उन्होंने निवाई-पीपलू विधानसभा क्षेत्र के जातीय समीकरणों का हवाला देते हुए स्थानीय विधायक को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि क्षेत्र में करीब 45 हजार गुर्जर मतदाता हैं और चुनाव में इस वोट बैंक को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।
बैंसला ने कहा, “इन 45 हजार वोटर्स का ध्यान रखना, वरना याद रखना कि कैंची दोनों तरफ से चलती है।” उनके इस बयान के बाद सियासी गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं और भाजपा के भीतर संभावित खींचतान को लेकर भी कयास लगाए जा रहे हैं। कार्यक्रम खत्म होने से पहले उनका बीच में ही निकल जाना भी चर्चा का विषय बना हुआ
क्या है पूरा कंबल विवाद?
यह विवाद 22 फरवरी 2026 को टोंक जिले के करेडा बुजुर्ग गांव में सामने आया था। उस दिन जौनपुरिया एक निजी कार्यक्रम में कंबल वितरण कर रहे थे। आरोप लगा कि उन्होंने एक मुस्लिम महिला को कंबल देने के बाद उसका नाम और धर्म पूछकर कंबल वापस ले लिया।
इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें कथित तौर पर जौनपुरिया यह कहते हुए सुनाई दिए कि “जो लोग प्रधानमंत्री मोदी को गाली देते हैं और उन्हें वोट नहीं देते, उन्हें कंबल लेने का कोई अधिकार नहीं है।”
सियासी असर जारी
इस विवाद के सामने आने के बाद से ही यह मुद्दा लगातार राजनीतिक बहस का हिस्सा बना हुआ है। विपक्ष जहां इसे भेदभाव का मामला बता रहा है, वहीं भाजपा नेता इसे निजी कार्यक्रम और कार्यकर्ताओं के सम्मान से जोड़कर देख रहे हैं।
अब जौनपुरिया की ताजा सफाई के बाद एक बार फिर यह मामला चर्चा में आ गया है और आने वाले दिनों में इस पर सियासी बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
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