खामेनेई के इंतकाल पर अजमेर दरगाह दीवान का बयान चर्चा में, केंद्र सरकार से की बड़ी अपील
राजस्थान के अजमेर से अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर बड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। अजमेर शरीफ के दीवान सैयद ज़ैनुल अबेदीन ने ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के इंतकाल के बाद बयान जारी करते हुए भारत सरकार से सक्रिय कूटनीतिक पहल की अपील की है।

राजस्थान के अजमेर से अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर बड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। अजमेर शरीफ के दीवान सैयद ज़ैनुल अबेदीन ने ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के इंतकाल के बाद बयान जारी करते हुए भारत सरकार से सक्रिय कूटनीतिक पहल की अपील की है। उन्होंने कहा कि भारत और ईरान के रिश्ते ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रूप से बेहद गहरे रहे हैं, ऐसे में मौजूदा हालात में भारत की भूमिका अहम हो सकती है।
दीवान ने कहा कि भारत सूफी परंपरा और अमन के पैगाम के लिए दुनिया भर में पहचाना जाता है। ऐसे में वैश्विक तनाव के इस दौर में भारत को शांति बहाली के प्रयासों में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए। उनका कहना था कि अगर वैश्विक शक्तियां टकराव की नीति छोड़कर संवाद और कूटनीति का रास्ता अपनाएं, तो हालात को बिगड़ने से रोका जा सकता है।
“जंग नहीं, वर्चस्व की कोशिश”
अपने बयान में दीवान सैयद जैनुल आबेदीन ने अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मौजूदा घटनाक्रम को केवल “जंग” कहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह ताकत के दम पर वर्चस्व स्थापित करने की कोशिश प्रतीत होती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका अपने रणनीतिक हितों के लिए विभिन्न देशों के संसाधनों पर नियंत्रण स्थापित करना चाहता है और इसी नीति के तहत हस्तक्षेप करता है। दीवान ने सवाल उठाया कि क्या अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र का चार्टर इस तरह की सैन्य कार्रवाइयों की अनुमति देता है।
उनके इस बयान के बाद अजमेर शहर में राजनीतिक और धार्मिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। कई संगठनों ने इसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर स्पष्ट और बेबाक प्रतिक्रिया बताया, तो कुछ ने इसे संवेदनशील समय में संयम बरतने की जरूरत से जोड़ा।
शिया समुदाय में आक्रोश
खामेनेई के इंतकाल की खबर के बाद देश के विभिन्न हिस्सों में शिया समुदाय के बीच आक्रोश देखा गया। कश्मीर से लेकर लखनऊ और कर्नाटक तक विरोध प्रदर्शन हुए। अजमेर में भी समुदाय के लोगों ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ नारेबाजी की।
दीवान ने कहा कि अयातुल्ला खामेनेई केवल ईरान के नेता नहीं थे, बल्कि विश्वभर के शिया मुसलमानों के लिए एक धार्मिक और वैचारिक मार्गदर्शक माने जाते थे। ऐसे में उनकी मौत ने समुदाय को गहरे स्तर पर प्रभावित किया है।
हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भावनाओं के इस दौर में शांति और संयम बनाए रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने अपील की कि किसी भी तरह की सामाजिक अशांति या सांप्रदायिक तनाव से बचा जाए और कानून-व्यवस्था का सम्मान किया जाए।
भारत-ईरान संबंधों का हवाला
दीवान ने अपने बयान में भारत-ईरान संबंधों का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और व्यापारिक रिश्ते रहे हैं। फारसी भाषा, सूफी परंपरा और साहित्य के माध्यम से दोनों सभ्यताओं का गहरा संवाद रहा है।
उन्होंने सुझाव दिया कि भारत को अपनी संतुलित विदेश नीति के तहत मध्यस्थता या संवाद की पहल करनी चाहिए, ताकि क्षेत्रीय स्थिरता बनी रहे। उनका मानना है कि भारत जैसे लोकतांत्रिक और बहुलतावादी देश की आवाज अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रभावशाली हो सकती है।
शहर में बढ़ी हलचल
अजमेर में इस बयान के बाद राजनीतिक और धार्मिक संगठनों के बीच चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। प्रशासन भी हालात पर नजर बनाए हुए है, हालांकि अब तक किसी बड़े तनाव की सूचना नहीं है। स्थानीय स्तर पर शांति बनाए रखने के लिए अपीलें की जा रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम का असर देश के विभिन्न हिस्सों में भावनात्मक रूप से देखने को मिलता है, लेकिन प्रशासनिक सतर्कता और सामुदायिक संवाद से स्थिति को नियंत्रित रखा जा सकता है।
कुल मिलाकर, खामेनेई के इंतकाल पर अजमेर दरगाह के दीवान का बयान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर क्या आधिकारिक रुख अपनाती है और क्षेत्रीय हालात किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।
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