Birthplace of Maharana Pratap, read 7 stories of Kumbhalgarh Fort 500 साल में बस एक बार हार, वजह युद्ध नहीं; पढ़िए कुम्भलगढ़ किले के हैरान कर देने वाले 7 किस्से, Rajasthan Hindi News - Hindustan
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500 साल में बस एक बार हार, वजह युद्ध नहीं; पढ़िए कुम्भलगढ़ किले के हैरान कर देने वाले 7 किस्से

अरावली की पहाड़ियों पर 1100 मीटर की ऊंचाई बसा ये किला दुनिया की दूसरी सबसे लंबी दीवार के लिए जाना जाता है, जिसकी लंबाई करीब 36 किलोमीटर है। क्या आप इन हैरान कर देने वाले फैक्ट्स को जानते थे? अगर नहीं तो ऐसी ही और भी रोचक बातों को जानने के लिए पूरा लेख पढ़िए।

Tue, 12 Aug 2025 09:43 PMRatan Gupta लाइव हिन्दुस्तान, राजसमंद
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500 साल में बस एक बार हार, वजह युद्ध नहीं; पढ़िए कुम्भलगढ़ किले के हैरान कर देने वाले 7 किस्से

राजस्थान का कुम्भलगढ़ किला न सिर्फ अपनी खूबसूरती और मजबूती के लिए मशहूर है, बल्कि इसके पीछे ऐसी कहानियां छुपी हैं, जिन्हें सुनकर कोई भी हैरान रह जाए। अरावली की पहाड़ियों पर 1100 मीटर की ऊंचाई बसा ये किला दुनिया की दूसरी सबसे लंबी दीवार के लिए जाना जाता है, जिसकी लंबाई करीब 36 किलोमीटर है। 500 सालों में इस पर सिर्फ एक बार कब्जा हुआ था। क्या आप इन हैरान कर देने वाले फैक्ट्स को जानते थे? अगर नहीं तो ऐसी ही और भी रोचक बातों को जानने के लिए पूरा लेख पढ़िए।

1. 500 साल में सिर्फ एक बार हार

कुम्भलगढ़ किला 15वीं सदी में महाराणा कुम्भा ने बनवाया था। इसे जीतना लगभग नामुमकिन माना जाता था। लेकिन, 1576 में मुगल सम्राट अकबर, आमेर के राजा मान सिंह और गुजरात के सुल्तान ने मिलकर इस पर कब्जा किया — वो भी पानी की कमी के कारण, न कि युद्ध में हार से।

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2. दुनिया की दूसरी सबसे लंबी दीवार

इस किले की दीवार की लंबाई 36 किमी है, जिसे अक्सर “ग्रेट वॉल ऑफ इंडिया” कहा जाता है। ये दीवार इतनी चौड़ी है कि उस पर 8 घोड़े एक साथ दौड़ सकते हैं। वहीं आपको बताते चलें कि दुनिया की सबसे लंबी दीवार चीन की दीवार है, जिसे ग्रेट वॉल ऑफ चाइना कहा जाता है।

3. मेवाड़ के वीर महाराणा प्रताप का जन्मस्थान

कुम्भलगढ़ किला सिर्फ युद्धों का गवाह नहीं, बल्कि मेवाड़ के महान योद्धा महाराणा प्रताप का जन्मस्थान भी है। वही वीर महाराणा प्रताप जिनके बारे में जाना-माना किस्सा है कि उनके पास 81 किलो का भाला और 72 किलो का कवच था। यानी वे लगभग 153 किलो का बोझ लेकर युद्ध करते थे। उनकी ऊंचाई करीब 7 फीट 5 इंच बताई जाती है।

4. 1100 मीटर ऊंचाई और गुप्त सुरंगो का जाल

किला 1100 मीटर ऊंची पहाड़ी पर बसा है। इसकी लोकेशन इतनी रणनीतिक है कि दूर से यह किला दिखाई ही नहीं देता, जिससे दुश्मन को इसे ढूंढना मुश्किल होता था। किले में कई गुप्त सुरंगें थीं, जिनका इस्तेमाल घेराबंदी के वक्त बाहर निकलने या अचानक हमला करने के लिए किया जाता था।

5. गुप्त संदेश और दरवाजे की डिजाइन

इतिहासकारों का दावा है कि किले की दीवारों पर कुछ जगह विशेष चिन्ह बने हैं, जो सैनिकों के लिए गुप्त संदेश का काम करते थे। किले के हर दरवाजे की बनावट अलग है, जो हमलावरों को भ्रमित करने के लिए बनाई गई थी।

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6. चमत्कारी दीवार के निर्माण की कथा

लोककथाओं में कहा जाता है कि शुरुआत में किले की दीवार बार-बार गिर जाती थी। तब एक साधु ने मानव बलि का सुझाव दिया। इसके बाद एक इंसान का बलिदान दिया गया। तब जाकर दीवार का निर्माण पूरा हुआ। वही दीवार, जो आज दुनिया की दूसरी सबसे लंबी दीवार बन चुकी है।

7. पानी का स्टोरेज और 300 से ज्यादा मंदिर

किले के अंदर 365 से ज्यादा मंदिर और कई विशाल जलाशय हैं। पानी का इंतजाम इतना पुख्ता था कि घेराबंदी में भी लोग सालों तक किले के अंदर रह सकते थे। हालांकि एक बार इस किले को जीता गया था। उस समय इस किले पर हुए कब्जे की वजह युद्ध नहीं थी, बल्कि पानी की कमी होना था।

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