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क्या BJP में जाएंगे राघव चड्ढा, उनकी RS की सदस्यता बचेगी या जाएगी? क्या हैं नियम

सौरभ भारद्वाज ने दावा किया है कि राघव चड्ढा ने अपने एक्स अकाउंट से पीएम मोदी की आलोचना वाली सभी पोस्टें हटा दी हैं। इस पोस्ट के बाद राघव चड्ढा को लेकर लग रही अटकलों में दो सवाल हावी हैं। क्या राघव चड्ढा BJP में शामिल हो जाएंगे? क्या बची रहेगी राज्यसभा सीट?

Mon, 6 April 2026 11:20 PMKrishna Bihari Singh हिन्दुस्तान टाइम्स, नई दिल्ली
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क्या BJP में जाएंगे राघव चड्ढा, उनकी RS की सदस्यता बचेगी या जाएगी? क्या हैं नियम

AAP नेता राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी के बीच खींचतान बढ़ती जा रही है। आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता पद से हटा दिया है। आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा पर आरोप लगाए हैं कि वह संसद में प्रधानमंत्री मोदी और केंद्र सरकार के खिलाफ आवाज उठाने से कतराते हैं। यही नहीं आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय से कहा है कि राघव चड्ढा को पार्टी के कोटे से बोलने का समय नहीं दिया जाना चाहिए। इस बीच उनके भाजपा में जाने के कयास लगाए जाने लगे हैं।

मोदी विरोधी पोस्टें हटाने का दावा

दरअसल, AAP दिल्ली प्रमुख सौरभ भारद्वाज ने अपने एक पोस्ट में दावा किया है कि राघव चड्ढा ने अपने एक्स टाइम लाइन से पीएम मोदी और BJP की आलोचना वाली सभी पोस्टें हटा दी हैं।

क्या भाजपा में जाएंगे राघव चड्ढा?

सौरभ भारद्वाज के इसी पोस्ट के बाद राघव चड्ढा को लेकर लगाई जाने वाली अटकलों में दो सवाल हावी हैं। क्या राघव चड्ढा औपचारिक रूप से BJP में शामिल हो जाएंगे जैसा कि AAP के नेता लगातार आरोप लगा रहे हैं?

क्या बची रहेगी राज्यसभा सीट?

यदि राघव चड्ढा भाजपा में शामिल होते हैं या उनको पार्टी बाहर का रास्ता दिखा देती है तो क्या उनकी राज्यसभा सीट बनी रहेगी? इनमें से किसी का भी कोई सीधा जवाब नहीं है।

BJP से क्या संकेत?

प्रकरण पर BJP ने बहुत सोच-समझकर प्रतिक्रिया दी है। दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा से जब पूछा गया कि क्या राघव चड्ढा भाजपा में शामिल होंगे तो सचदेवा ने कहा कि अपना भविष्य तय करना उन्हीं के हाथ में है। जाहिर है BJP ने दरवाजे थोड़े खुले जरूर छोड़े हैं लेकिन अंदर से किसी ने अभी तक हाथ नहीं बढ़ाया है। कम से कम सार्वजनिक तौर पर तो अब तक ऐसा नहीं सामने आया है।

संसद की सीट है सुरक्षित

राघव चड्ढा के राजनीतिक इरादे चाहे जो हों उनकी सांसदी अभी सुरक्षित है। उनका राज्यसभा कार्यकाल 2028 तक है। ऐसे में AAP उन्हें आसानी से नहीं हटा सकती है। आम आदमी पार्टी राघव चड्ढा को पार्टी के अंदरूनी पदों से हटा सकती है जो उसने पहले ही कर दिया है।

दो स्थितियों में जा सकती है सांसदी

संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत (इसमें 1985 के 52वें संशोधन द्वारा लाया गया दलबदल विरोधी कानून शामिल है) एक राज्यसभा सदस्य अपनी सीट केवल दो स्थितियों में खो सकता है। पहली सूरत यह कि वह स्वेच्छा से पार्टी की सदस्यता छोड़ दे। दूसरी कि वह सदन में किसी वोट पर पार्टी के व्हिप (निर्देश) का उल्लंघन करता पाया जाए।

अदालतों ने ये बातें भी मानीं

बीते कुछ वर्षों में अदालतों ने अपने फैसलों में यह माना है कि अपनी मर्जी से सदस्यता छोड़ना या इस्तीफा होना जरूरी नहीं है। इसे नेता के बर्ताव से भी समझा जा सकता है जैसे कि उसका किसी विरोधी पार्टी की रैलियों में शामिल होना, किसी दूसरी पार्टी के लिए प्रचार करना, या सार्वजनिक रूप से ऐसे बयान देना जिससे लगे कि उसने पार्टी से नाता तोड़ लिया है।

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साल 2017 में आया था ऐसा मामला

साल 2017 में एक ऐसा ही मामला सामने आया था जिसमें बिहार की JD(U) के दो राज्यसभा सांसदों शरद यादव और अली अनवर को राज्यसभा के सभापति ने अयोग्य घोषित कर दिया था। जदयू ने इनकी गतिविधियों को विरोधी पार्टियों की रैलियों में शामिल होने को पार्टी छोड़ने (दल-बदल) के सबूत के तौर पर पेश किया था। हालांकि इस तरह की व्याख्या के लिए जरूरी शर्तें बेहद कड़ी होती हैं। अंतिम फैसला सभापति के विवेक पर निर्भर करता है।

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राज्यसभा के सभापति के पास ही अधिकार

किसी भी सांसद को अयोग्य घोषित करने वाली याचिका पर फैसला लेने का अधिकार राज्यसभा के सभापति के पास होता है। यह पद भारत के उपराष्ट्रपति के पास होता है। मौजूदा वक्त में इस पद पर CP राधाकृष्णन हैं। संविधान में इस बात के लिए कोई समय-सीमा तय नहीं है कि किसी पार्टी की ओर से दल-बदल विरोधी कानून के तहत मामला उठाए जाने पर किसी सदस्य के खिलाफ कितने समय के भीतर फैसला लिया जाना चाहिए।

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सुप्रीम कोर्ट ने डेडलाइन पर कही थी यह बात

सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में कहा था कि ऐसे मामलों का निपटारा तीन महीने के भीतर हो जाना चाहिए। गौर करने वाली बात यह भी कि इस तरह की समय-सीमा तय करने के लिए अब तक कानून में कोई संशोधन नहीं किया गया है। राघव चड्ढा जैसा उदाहरण AAP से ही मिलता है। AAP की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने केजरीवाल और उनके निजी सचिव पर गंभीर आरोप लगाए थे। मामला अदालत तक भी पहुंचा था। फिर भी वह पार्टी की सदस्य बनी हुई हैं। यही नहीं उन्होंने AAP नेतृत्व पर हमले भी जारी रखे हैं।

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