दिल्ली जिमखाना क्लब को क्यों खाली करा रहा केंद्र, क्या है मोदी सरकार का प्लान
केंद्र सरकार ने दिल्ली जिमखाना क्लब को 5 जून तक खाली करने का आदेश दिया है। इस आदेश के खिलाफ क्लब के मेंबर हाई कोर्ट पहुंच गए हैं। इस बीच सरकारी सूत्रों ने एक न्यूज चैनल को इसके खाली कराने के कारणों और सरकार के प्लान में जानकारी दी है। यह क्लब रणनीतिक रूप से बहुत ही संवेदनशील इलाके में स्थित है।

केंद्र सरकार ने दिल्ली जिमखाना क्लब को 5 जून तक खाली करने का आदेश दिया है। इस आदेश के खिलाफ क्लब के मेंबर हाई कोर्ट पहुंच गए हैं। इस बीच सरकारी सूत्रों ने एक न्यूज चैनल को इसके खाली कराने के कारणों और सरकार के प्लान में जानकारी दी है। यह क्लब रणनीतिक रूप से बहुत ही संवेदनशील इलाके में स्थित है।
न्यूज चैनल सीएनएन-न्यूज 18 ने सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया है कि दिल्ली जिमखाना क्लब की जगह को वापस लेने का केंद्र सरकार का कदम कई रणनीतिक और प्रशासनिक कारणों से प्रेरित है। सरकार का मानना है कि नई दिल्ली का यह हाई-सिक्योरिटी जोन पूरी तरह से केवल सरकारी और शासन से जुड़े कामों के लिए ही रिजर्व होना चाहिए।
क्यों है इस जमीन की जरूरत
सूत्रों के अनुसार, सरकार दिल्ली जिमखाना क्लब को लोक कल्याण मार्ग पर प्रधानमंत्री के आवास के पास स्थित एक संवेदनशील प्रशासनिक और सुरक्षा गलियारे के भीतर मौजूद एकमात्र प्राइवेट संस्थान मानती है। केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा जारी एक पत्र में केंद्र सरकार ने कहा कि इस जमीन की जरूरत रक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, महत्वपूर्ण सार्वजनिक सुरक्षा उद्देश्यों, शासन संबंधी जरूरतों और एकीकृत जनहित परियोजनाओं के लिए है। सूत्रों ने बताया कि शुरुआती प्रस्ताव में इस इलाके में सरकारी कार्यालय और अधिकारियों के रहने के लिए आवासीय जगह बनाने की योजना शामिल है।
हाई कोर्ट ने समन जारी किया
इस बीच दिल्ली हाई कोर्ट ने क्लब के सदस्यों, स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन और अन्य लोगों द्वारा दायर याचिकाओं पर केंद्र सरकार और इस एलीट क्लब के मैनेजमेंट को समन जारी किया है। इन याचिकाओं में सफदरजंग रोड स्थित परिसर को खाली करने के सरकारी निर्देश का विरोध किया गया है।
5 जून तक खाली करने का आदेश
भूमि और विकास कार्यालय ने 22 मई को जारी किए गए पत्र में क्लब को 5 जून तक क्लब को खाली कर उसे सौंपने का आदेश दिया है। पत्र में रणनीतिक और रक्षा-संबंधी जरूरतों का हवाला दिया गया है। बता दें कि 3 जुलाई 1913 को ब्रिटिश काल के दौरान 'इंपीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब' के रूप में स्थापित यह संस्था मूल रूप से औपनिवेशिक प्रशासकों और सैन्य अधिकारियों के लिए बनाई गई थी।
आजादी के बाद इंपीरियल शब्द हटाया
1947 में देश की आजादी के बाद इंपीरियल शब्द हटा दिया गया। इस क्लब की ज्यादातर मौजूदा इमारतें 1930 के दशक में बनाई गई थीं। 2022 में कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय द्वारा उत्पीड़न और कुप्रबंधन के आरोपों के बाद राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण ने क्लब में सरकार द्वारा नामित 15 निदेशकों की नियुक्ति की अनुमति दी थी।




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