Ghost members at Delhi Gymkhana Forensic audits flag years of financial manipulation of 269 crore दिल्ली जिमखाना क्लब में 269 करोड़ के घोटाले का दावा, फॉरेंसिक ऑडिट में ‘घोस्ट मेंबर’ का खुलासा, Ncr Hindi News - Hindustan
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दिल्ली जिमखाना क्लब में 269 करोड़ के घोटाले का दावा, फॉरेंसिक ऑडिट में ‘घोस्ट मेंबर’ का खुलासा

दिल्ली के सबसे प्रतिष्ठित क्लबों में गिने जाने वाले दिल्ली जिमखाना क्लब में कथित तौर पर भारी वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। फॉरेंसिक ऑडिट दस्तावेजों में क्लब के भीतर कई सालों से चल रही वित्तीय गड़बड़ियों, बिलिंग में अनियमितताओं और मेंबरशिप रिकॉर्ड में गंभीर खामियों की बात सामने आई है।

Wed, 27 May 2026 02:20 PMMohammad Azam लाइव हिन्दुस्तान, दिल्ली
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दिल्ली जिमखाना क्लब में 269 करोड़ के घोटाले का दावा, फॉरेंसिक ऑडिट में ‘घोस्ट मेंबर’ का खुलासा

दिल्ली के सबसे प्रतिष्ठित क्लबों में गिने जाने वाले दिल्ली जिमखाना क्लब में कथित तौर पर भारी वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। फॉरेंसिक ऑडिट दस्तावेजों में क्लब के भीतर कई सालों से चल रही वित्तीय गड़बड़ियों, बिलिंग में अनियमितताओं और मेंबरशिप रिकॉर्ड में गंभीर खामियों की बात सामने आई है। आइए जानते हैं पूरा मामला क्या है।

269 करोड़ के नुकसान का दावा

स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट और राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) के सामने पेश रिपोर्टों के अनुसार, क्लब को पांच सालों में कुल 269 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। सीएनएन-न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार, ऑडिट में यह भी दावा किया गया कि क्लब के रिकॉर्ड में बड़ी संख्या में ऐसे मेंबर दर्ज थे, जिनकी मेंबरशिप खत्म हो चुकी थी या जिनकी मौत हो चुकी थी, लेकिन उनके नाम पर अब भी बिल प्रोसेस किए जा रहे थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन मेंबर्स के चलते कई अवैध लोग क्लब की सुविधाओं का इस्तेमाल कर रहे थे, जिससे क्लब की सुरक्षा व्यवस्था और राजस्व दोनों प्रभावित हुए। ऑडिट में यह भी आरोप लगाया गया कि क्लब के कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ की गई ताकि वास्तविक स्थिति छिपाई जा सके।

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2107-22 तक ज्यादा गड़बड़ी

फॉरेंसिक जांच प्रमुख अकाउंटिंग फर्म बेकर टिल्ली द्वारा की गई थी। जांच में सामने आया कि 2017 से 2022 के बीच क्लब की वित्तीय स्थिति लगातार बिगड़ती गई, जबकि वार्षिक आम बैठकों (AGM) में पेश रिपोर्टों में नुकसान की पूरी तस्वीर सामने नहीं आई थी। मामले के सामने आने के बाद केंद्र सरकार के स्तर पर भी क्लब के कामकाज की जांच शुरू हुई। इसके बाद मामला एनसीएलटी और एनसीएलएटी तक पहुंचा, जहां क्लब के प्रशासन और कॉरपोरेट गवर्नेंस को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए।

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