दिल्ली के इन इलाकों में क्यों नहीं आ रहा पानी, हर साल लौटने वाले जल संकट की क्या है कहानी?
Delhi Water Crisis: गर्मी के दिनों में हर साल राजधानी दिल्ली में जल संकट गहरा जाता है। इन दिनों भी ऐसा ही हो रहा है। आखिर इसके पीछे की वजह क्या है? इसके समाधान के लिए क्या किया जा रहा है? इसके साथ ही जानिए दिल्ली को बारिश के अलावा और कहां-कहां से पानी मिलता है।

Delhi Water Crisis: गर्मियों में दिल्ली की प्यास और ज्यादा बढ़ जाती है। इस साल भी राजधानी के कई इलाकों में पानी का संकट गहरा गया है। इसके चलते रानी खेड़ा, बेगमपुर, वेस्ट पटेल नगर, राजेंद्र नगर, सुभाष नगर, सेवक पार्क (द्वारका मोड़) और पटेल नगर समेत कई इलाकों के लोग नहाने-धोने से लेकर खाने-पीने तक के लिए जूझ रहे हैं। लोगों ने शिकायत की है कि या तो कई दिनों से पानी नहीं आ रहा या फिर सप्लाई बेहद कम हो गई है। कुछ लोगों ने बताया, अगर आ भी रहा है, तो गंदा-बदबूदार। ऐसे में सवाल उठता है- आखिर देश की राजधानी में हर साल गर्मियों के दौरान यह समस्या क्यों खड़ी हो जाती है? लाइव हिन्दुस्तान के साथ समझिए इस समस्या की पूरी कहानी।
दिल्ली को पानी कहां से मिलता है?
समस्या की जड़ तक जाएं, उससे पहले ये समझिए राजधानी दिल्ली को पानी कहां-कहां से मिलता है। ध्यान रहे, हम बारिश के पानी की अभी बात नहीं कर रहे हैं। दिल्ली में मुख्य तौर पर 3 जगहों से पानी मिलता है। इसके साथ ही दिल्ली जल बोर्ड राजधानी में 9 बड़े वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (WTP) को चलाता है।
- यमुना नदी (हरियाणा के जरिए)
- गंगा नहर प्रणाली (उत्तर प्रदेश के जरिए)
- भाखड़ा नांगल प्रणाली (पंजाब के जरिए)
इनमें यमुना सबसे अहम स्रोतों में से एक है। आंकड़ों में बात करें, तो दिल्ली में 40 फीसदी पानी यमुना के जरिए पहुंचता है। पहले पानी वजीराबाद बैराज पर जमा होता है, जहां से इसे वजीराबाद और चंद्रावल वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाया जाता है।
आखिर कहां फंस रहा है दिल्ली का पानी?
दिल्ली के मौजूदा संकट की जड़ वजीराबाद बैराज है। यहां बने जलाशय (पॉन्डेज) का स्तर 674.5 फीट होना जरूरी माना जाता है, ताकि वजीराबाद और चंद्रावल प्लांट पूरी क्षमता से काम कर सकें। लेकिन हाल ही में यह स्तर घटकर करीब 668.6 फीट तक पहुंच गया, यानी जरूरी स्तर से लगभग 5 फीट नीचे।
जलस्तर गिरने का सीधा असर दोनों प्लांटों पर पड़ा। अधिकारियों के मुताबिक वजीराबाद प्लांट की उत्पादन क्षमता में 30 से 40 प्रतिशत तक और चंद्रावल प्लांट में 15 से 20 प्रतिशत तक कमी आई है। यही कारण है कि कई इलाकों में पानी की सप्लाई प्रभावित हुई है।
दिल्ली को चाहिए कितना पानी, मिलता कितना है?
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली की आबादी करीब 2.3 करोड़ है। दिल्ली जल बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक राजधानी को रोजाना लगभग 1380 मिलियन गैलन प्रतिदिन (MGD) पानी की जरूरत होती है। लेकिन सामान्य दिनों में भी दिल्ली को करीब 1000 MGD पानी ही मिल पाता है। यानी दिल्ली पहले से ही लगभग 380 MGD पानी की कमी झेल रही है।
गर्मियों में जब मांग बढ़ जाती है और यमुना का जलस्तर घटता है, तब यह संकट और गंभीर हो जाता है। ध्यान रहे, पानी मिलना और उसका समान रूप से वितरण होना भी चुनौतीपूर्ण है। दिल्ली के कुछ संपन्न इलाके ऐसे हैं, जहां पानी की अथाह है, वहीं कुछ इलाकों में सूखे जैसी स्थिति बन जाती है।
हर साल क्यों लौट आता है जल संकट?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ मौसमी समस्या नहीं है। इसके पीछे कई पुरानी वजहें हैं।
- पहली, दिल्ली की यमुना पर बहुत ज्यादा निर्भरता। राजधानी का बड़ा हिस्सा उस पानी पर निर्भर है जो हरियाणा से आता है। ऐसे में नदी में प्रवाह कम होते ही संकट शुरू हो जाता है।
- दूसरी, यमुना की जलधारण क्षमता लगातार घट रही है। सालों से नदी में गाद (सिल्ट) जमा होने, बाढ़ क्षेत्र में अतिक्रमण और कंक्रीटीकरण के कारण नदी उथली होती जा रही है।
- तीसरी वजह, तेजी से बढ़ती आबादी और बढ़ती मांग है।
संकट टालने के लिए क्या किया जा रहा है?
ये तो रही समस्या की बात। आखिर समाधान क्या है? मौजूदा समय में जलस्तर बढ़ाने के लिए वजीराबाद के पास नदी तल की खुदाई कराई जा रही है। ताकि, पानी को ट्रीटमेंट प्लांट के इनटेक प्वाइंट तक पहुंचाया जा सके। इसके अलावा मुनक नहर से अतिरिक्त पानी मोड़ने और हरियाणा से अतिरिक्त यमुना जल छोड़ने पर भी काम किया गया है।
हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि जब तक यमुना में स्थायी रूप से पर्याप्त प्रवाह सुनिश्चित नहीं किया जाता और उसकी जलधारण क्षमता बहाल नहीं होती, तब तक दिल्ली को हर साल गर्मियों में इसी तरह के जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। यही वजह है कि वजीराबाद बैराज आज सिर्फ एक जल संरचना नहीं, बल्कि दिल्ली के जल संकट का सबसे बड़ा 'चोक पॉइंट' बन चुका है।




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