Why AAP Targeting Raghav Chadha For Kothi No. 50 in chandigarh पंजाब के ‘सुपर CM’ से लेकर गद्दार तक, राघव चड्ढा के BJP में जाते ही कोठी नंबर 50 की क्यों चर्चा?, Ncr Hindi News - Hindustan
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पंजाब के ‘सुपर CM’ से लेकर गद्दार तक, राघव चड्ढा के BJP में जाते ही कोठी नंबर 50 की क्यों चर्चा?

राघव चड्ढा के आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़कर भाजपा में शामिल होने के बाद पंजाब की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने ना राघव चड्ढा को गद्दार करार दिया बल्कि कोठी नंबर 50 को लेकर भी उनपर तीखा हमला बोला।

Sun, 26 April 2026 10:40 PMAditi Sharma लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली, हिन्दुस्तान टाइम्स
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पंजाब के ‘सुपर CM’ से लेकर गद्दार तक, राघव चड्ढा के BJP में जाते ही कोठी नंबर 50 की क्यों चर्चा?

राघव चड्ढा के आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़कर भाजपा में शामिल होने के बाद पंजाब की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने ना राघव चड्ढा को गद्दार करार दिया बल्कि कोठी नंबर 50 को लेकर भी उनपर तीखा हमला बोला। चंडीगढ़ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि जो राज्यसभा सदस्य आज अपने निजी स्वार्थों के चलते 'आप' में घुटन महसूस कर रहे हैं, उन्होंने लंबे समय तक कोठी नंबर 50 में रहकर सत्ता के सुख भोगे हैं। मुख्यमंत्री का यह इशारा चंडीगढ़ के सेक्टर-2 स्थित उस आलीशान बंगले की ओर था, जिसे राघव चड्ढा का अनौपचारिक सत्ता केंद्र माना जाता था।

चंडीगढ़ की कोठी नंबर 50 शक्ति केंद्र के रूप में जाना जाता रहा है। लगभग 2 एकड़ में फैला यह बंगला मुख्यमंत्री के कैंप ऑफिस कोटे के तहत आता है, जहां 2022 की शानदार जीत के बाद शुरुआती सालों में राघव चड्ढा रुकते थे। विपक्षी दलों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उस दौरान पंजाब के बड़े पुलिस अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी, मंत्री और विधायक चड्ढा से मिलने के लिए इसी घर के बाहर लाइन में खड़े देखे जाते थे। मुख्यमंत्री के इस हालिया बयान ने उन आरोपों को फिर से हवा दे दी है जिनमें चड्ढा को पंजाब सरकार का "सुपर सीएम" कहा जाता था। हालांकि पार्टी के साथ रिश्ते बिगड़ने के बाद राघव चड्ढा पिछले एक साल से कोठी में नहीं रुके।

पार्टी के भीतर से भी अब चड्ढा की पुरानी कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। 'आप' के लोकसभा सांसद मलविंदर सिंह कंग ने पीटीआई से बात करते हुए आरोप लगाया कि चड्ढा सीधे तौर पर मुख्यमंत्री भगवंत मान के फैसलों में हस्तक्षेप करते थे। वहीं, पंजाब से 'आप' के इकलौते बचे राज्यसभा सांसद बलबीर सिंह सीचेवाल ने भी एक इंटरव्यू में कहा कि उस समय चड्ढा पंजाब के 'सुप्रीमो' की तरह थे और पूरी नौकरशाही की नजरें कोठी नंबर 50 के इशारों पर टिकी रहती थीं। इन बयानों से साफ है कि चड्ढा के जाने के बाद अब आम आदमी पार्टी उनके पुराने रसूख को लेकर उन पर चौतरफा हमला कर रही है।

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विपक्षी दल भी बताते थे राघव चड्ढा को 'सुपर सीएम'

पंजाब में राघव चड्ढा को "असली ताकत" बताने का दावा विपक्षी दल पहले से ही जोर-शोर से करते रहे हैं। पंजाब भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने मार्च 2024 में X पर पोस्ट कहा था: राघव जी केजरीवाल के इतने चहेते रहे हैं कि वे पंजाब में सुपर सीएम बनकर निर्वाचित मुख्यमंत्री भगवंत मान को नीचा दिखा रहे हैं। जाखड़ ने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले चड्ढा को नज़रअंदाज़ कर दिया गया है, जिससे "आम आदमी पार्टी के भीतर चल रही हलचल पर गंभीर संदेह पैदा होता है।

पार्टी में समन्वय और संवाद की जरूरत

मलविंदर सिंह कंग ने शनिवार को कहा कि पंजाब में पार्टी के नेतृत्व और विधायकों, सांसदों और मंत्रियों के बीच बेहतर समन्वय और निरंतर संवाद की आवश्यकता है। यह बयान 'आप' के राज्य से सात में से छह राज्यसभा सदस्यों के भाजपा में शामिल होने के एक दिन बाद आया है।

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आनंदपुर साहिब से आम आदमी पार्टी के सांसद ने यह भी कहा कि पार्टी को राज्यसभा के लिए पंजाब के पार्टी कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों पर भी विचार करना चाहिए था। कंग ने बताया कि भाजपा में शामिल हुए संदीप पाठक ने एक बार उनसे कहा था कि पिछले एक साल से पार्टी ने उनसे संपर्क नहीं किया। आईआईटी दिल्ली के पूर्व प्रोफेसर पाठक को चुनाव व प्रचार रणनीति तैयार करने और पार्टी संगठन को मजबूत करने का श्रेय दिया जाता है। कभी आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल के करीबी माने जाने वाले पाठक ने पार्टी की 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। कंग ने कहा, संदीप ने मुझे बताया था कि पिछले एक साल से उनसे संपर्क नहीं किया गया। अगर उनसे नियमित रूप से संपर्क किया जाता, तो वे पार्टी नहीं छोड़ते।

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कंग ने पार्टी नेतृत्व और विधायकों, मंत्रियों व सांसदों के बीच बेहतर समन्वय और निरंतर संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, सही लोगों से प्रतिक्रिया लेनी चाहिए और जमीनी स्तर पर काम कर रहे कार्यकर्ताओं को सशक्त बनाना चाहिए।

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