राघव चड्ढा से चाय का न्योता; कैसे टूटने से बचा पंजाब में AAP का इकलौता RS सांसद?
राघव चड्ढा समेत 'आप' के 7 सांसदों ने पार्टी छोड़ी, जिनमें पंजाब के 6 नेता शामिल थे। हालांकि, पंजाब के बलबीर सिंह सीचेवाल ने बागी गुट के प्रस्ताव और चाय का न्योता ठुकरा दिया था। बलबीर सिंह सीचेवाल ने कई खुलासे किए हैं।

राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक समेत 7 राज्यसभा सदस्यों ने बीते शुक्रवार को आम आदमी पार्टी (आप) छोड़ दी थी। इनमें से 6 पंजाब के सांसद थे जहां अभी आम आदमी पार्टी की सरकार है। पंजाब के बागी सांसदों की लिस्ट में एक नाम गायब था। जालंधर के पद्म श्री विजेता पर्यावरणविद और आध्यात्मिक गुरु, बलबीर सिंह सीचेवाल बागियों के ग्रुप में शामिल नहीं रहे। सीचेवाल ने स्थानीय मीडिया को बताया कि पार्टी छोड़ने से पहले उनसे सीधे तौर पर संपर्क किया गया था लेकिन उन्होंने प्रस्ताव को ठुकरा दिया था।
बिक्रम साहनी का आया था फोन
शनिवार को कम से कम दो वेब चैनलों से बात करते हुए बलबीर सिंह सीचेवाल ने कहा- विक्रम साहनी का फोन आया था। उनका कहना था कि वे एक आजाद ग्रुप बना रहे हैं। कई लोगों ने इस पर दस्तखत कर दिए हैं। उन्होंने मुझसे भी दस्तखत करने को कहा था। लेकिन, मैंने मना कर दिया। मेरी ऐसी कोई इच्छा नहीं थी।
बताया गया था कि बागियों में 'यूनिवर्सिटी वाले' भी शामिल
सीचेवाल ने दावा किया कि साहनी ने उन्हें बताया था कि जिन लोगों ने दस्तखत किए हैं, उनमें 'यूनिवर्सिटी वाले' भी शामिल हैं। उनका संकेत लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के संस्थापक अशोक कुमार मित्तल की ओर था। शुक्रवार को पार्टी छोड़ने के ऐलान के समय ग्रुप के नेता राघव चड्ढा और संदीप पाठक के साथ खड़े थे।
राघव चड्ढा ने दिया था चाय का न्योता
राघव चड्ढा के साथ चाय पर चर्चा की खबरों के बीच सीचेवाल ने एक बड़ा दावा भी किया। सीचेवाल ने 16 से 18 अप्रैल के संसद सत्र के दौरान मिले एक पुराने न्योते को याद करते हुए'पंजाब तक' से कहा- मुझसे कहा गया कि बाबा जी, आइये हम आपको चाय पिलाते हैं। लेकिन मैंने उनसे कहा कि आप लोग पी लो। यह पहली बार था जब उनकी ओर से मुझे चाय का न्यौता दिया गया था।
संदीप पाठक और राघव चड्ढा पर क्या बोले?
सीचेवाल ने पंजाब में राघव चड्ढा और संदीप पाठक की भूमिकाओं के बारे में भी बेबाकी से बात की। उन्होंने कहा कि संदीप पाठक और राघव चड्ढा को लेकर मुझे बहुत हैरानी हुई क्योंकि पंजाब में उन दोनों के पास राज्य स्तर की पूरी जिम्मेदारी थी। संदीप पाठक पार्टी का काम देखते थे। वहीं राघव चड्ढा लगभग दो-तीन साल तक प्रशासनिक पक्ष पर भी नजरें रखते रहे। तब वे पंजाब के ‘सुप्रीमो’ थे।
‘हाउस नंबर 50’ था सेंटर
सींचेवाल ने कहा कि प्रशासन (खासकर अधिकारियों की) की नजरें ‘हाउस नंबर 50’ पर रहती थीं। चंडीगढ़ के सेक्टर 2 में स्थित ‘हाउस नंबर 50’ राघव चड्ढा का आवास था। वैसे यह पंजाब के मुख्यमंत्री का कैंप ऑफिस सह गेस्ट हाउस है। सीचेवाल से पूछा गया कि संदीप पाठक और राघव चड्ढा जैसे नेताओं के पार्टी छोड़ने के पीछे क्या वजह हो सकती है? उन्होंने कहा- वजह क्या थी, निराशा क्यों हुई? यह तो वे ही बता सकते हैं।




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