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हरियाणा के सरकारी स्कूलों में खेती-किसानी की भी पढ़ाई, वोकेशनल कोर्स शुरू होगा

हरियाणा के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए अब कृषि से जुड़ी पढ़ाई का भी अवसर मिलेगा। अप्रैल से शुरू होने वाले शिक्षा सत्र से सरकारी स्कूलों में कृषि वोकेशनल कोर्स के रूप में शुरू किया जाएगा। इसका उद्देश्य छात्रों को व्यावहारिक और रोजगार से जुड़ी जानकारी देना है। 

Wed, 11 March 2026 08:16 AMSubodh Kumar Mishra लाइव हिन्दुस्तान, हिन्दुस्तान/फरीदाबाद
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हरियाणा के सरकारी स्कूलों में खेती-किसानी की भी पढ़ाई, वोकेशनल कोर्स शुरू होगा

हरियाणा के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए अब कृषि से जुड़ी पढ़ाई का भी अवसर मिलेगा। अप्रैल से शुरू होने वाले शिक्षा सत्र से सरकारी स्कूलों में कृषि वोकेशनल कोर्स के रूप में शुरू किया जाएगा।

कोर्स को शुरू करने का प्रमुख उद्देश्य छात्रों को पारंपरिक शिक्षा के साथ व्यावहारिक और रोजगार से जुड़ी जानकारी देना है। ताकि छात्र कृषि क्षेत्र में भी अपना करियर बना सकें। शिक्षा विभाग की योजना के अनुसार जिन स्कूलों में यह कोर्स शुरू किया जाएगा, वहां कृषि से संबंधित प्रयोगशालाएं भी स्थापित की जाएंगी। इन प्रयोगशालाओं में छात्रों को आधुनिक खेती की तकनीकों, उन्नत बीजों, खाद और कीटनाशकों के सही उपयोग के बारे में जानकारी दी जाएगी।

इसके अलावा विद्यार्थियों को मिट्टी की जांच, पौधों की देखभाल और फसलों के बेहतर उत्पादन के तरीकों के बारे में पढ़ाया जाएगा। सरकारी स्कूलों में प्रदेश सरकार की ओर से करीब 20 वोकेशनल कोर्स चलाए जा रहे हैं। इसमें एक्सपोर्ट-इंपोर्ट, मकेनिकल समेत अन्य कोर्स चल रहे।

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बाजार का भी ज्ञान मिलेगा

वोकेशनल कोर्स कृषि के माध्यम से विद्यार्थी केवल खेती तक सीमित जानकारी ही नहीं प्राप्त करेंगे, बल्कि कृषि उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने की प्रक्रिया के बारे में भी सीखेंगे। यह कोर्स नौवीं से 12वीं कक्षा के छात्रों के लिए होगा। छात्रों को यह बताया जाएगा कि किस प्रकार किसान अपने उत्पादों को बेहतर कीमत पर बेच सकते हैं, बाजार की मांग को कैसे समझा जा सकता है।

व्यावसायिक पाठ्यक्रम से छात्र आत्मनिर्भर बनेंगे

इस तरह के कृषि जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रम छात्रों को आत्मनिर्भर बनने में मदद करेंगे। कई ऐसे विद्यार्थी होते हैं जो पढ़ाई पूरी करने के बाद कृषि क्षेत्र में काम करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें इसके लिए अलग से प्रशिक्षण या कोर्स करना पड़ता है। अब स्कूल स्तर पर ही कृषि शिक्षा मिलने से उन्हें आगे अतिरिक्त कोर्स करने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे छात्रों के समय और धन दोनों की बचत होगी।

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स्टार्टअप भी शुरू करने का मौका

स्कूल में दिए गए ज्ञान के अतिरिक्त आगे कुछ पढ़ाई करनी है तो केवल उसी सूरत में कृषि विश्वविद्यालयों का रुख करने की आवश्यकता होगी। छात्र कृषि के जरिये अपना स्टार्टअप भी शुरू कर सकेंगे। युवा नौकरी की बजाय अपने स्टार्टअप की ओर रुझान बढ़ा है।

कृषि के क्षेत्र में करियर

जिला शिक्षा अधिकारी अंशु सिंगला ने कहा कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य सरकारी स्कूल के विद्यार्थियों को वोकेशनल कोर्स के माध्यम से प्रोफेशनल शिक्षा देना है। ताकि छात्र अपने कौशल का सही जगह पर प्रयोग कर सकें। कई बच्चे कृषि के क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं। यह कोर्स उनके लिए लाभकारी साबित होगा।

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