केजरीवाल को हराने का सचदेवा को मिलेगा इनाम, टारगेट पर फिर रहेगी AAP
भारतीय जनता पार्टी को दिल्ली में 27 साल बाद सत्ता में लाने वाले प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा का कार्यकाल समाप्त हो गया है। हर्ष मल्होत्रा को यह जिम्मेदारी मिलने के बाद सचदेवा को जल्द केंद्रीय भूमिका में लाया जा सकता है। माना जा रहा है कि उन्हें पंजाब में अहम जिम्मेदारी मिल सकती है।

वीरेंद्र सचदेवा के लिए दिल्ली भाजपा की कप्तानी का वक्त भले ही खत्म हो गया हो, लेकिन उनके लिए और बड़ी जिम्मेदारी का दौर शुरू हो सकता है। आम आदमी पार्टी (आप) को उसके सबसे मजबूत गढ़ में धूल चटाने का श्रेय हासिल करने वाले वीरेंद्र सचदेवा को पार्टी बड़ा इनाम दे सकती है। उनके अध्यक्ष रहते हुए ही भाजपा ने दिल्ली में 27 साल का 'विपक्षवास' खत्म करके सत्ता हासिल की। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी सचदेवा के कौशल और अनुभव का फायदा लेने के लिए उन्हें केंद्रीय भूमिका में लाना चाहती है। दिलचस्प यह है कि पार्टी उन्हें अरविंद केजरीवाल के खिलाफ ही नया टारगेट दे सकती है।
पश्चिम बंगाल जैसे राज्य में प्रचंड बहुमत हासिल करने के बाद भाजपा अब पंजाब में उसी तरह का करिश्मा दिखाने की कोशिश करेगी। पश्चिम बंगाल की तरह ही पंजाब को भी 'कमल फूल' के लिए बंजर माना जाता रहा है। लेकिन इस बार भाजपा तेजी से जमीन अपने अनुकूल करने में जुटी हुई है। मूल रूप से बंटवारा पूर्व पंजाब से जुड़ाव रखने वाले वीरेंद्र सचदेवा को पार्टी पंजाब चुनाव के लिए अहम जिम्मेदारी सौंप सकती है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, पूर्व में पत्रकार रहे वीरेंद्र सचदेवा को संगठन में अहम पद देकर पंजाब चुनाव में लगाया जा सकता है। सचदेवा ने इस साल मार्च में दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष के रूप में अपना तीन साल का कार्यकाल पूरा किया था।
काम आएगा दिल्ली वाला अनुभव
दरअसल, पार्टी की सोच है कि वीरेंद्र सचदेवा आप और इसके मुखिया अरविंद केजरीवाल की रणनीतियों को ध्वस्त करने का अनुभव रखते हैं और इसका फायदा पंजाब में भी मिल सकता है। सधे हुए शब्दों और शांत लहजे में तीखे सवालों से दिल्ली में 'आप' को घेरने वाले सचदेवा जानते हैं कि अरविंद केजरीवाल किस तरह अपने पक्ष में नैरेटिव गढ़ते हैं और इनकी काट क्या है। सचदेवा ने जिस तरह दिल्ली में कथित शराब घोटाले और 'शीशमहल' के मुद्दे को आम लोगों के बीच प्रचारित करके अरविंद केजरीवाल की 'कट्टर ईमानदार' छवि को ध्वस्त किया, उसकी काफी चर्चा हुई।
सचदेवा के इस अनुभव का फायदा पार्टी पंजाब में भी लेना चाहती है। सचदेवा सिर्फ तीखे सवाल दागने में माहिर नहीं हैं, बल्कि संगठन के प्रबंधन, बूथ लेवल कार्यकर्ताओं में जोश भरने और आम लोगों को पार्टी के मुद्दों से जोड़ने का भी कौशल रखते हैं। इन्हीं खूबियों की वजह से उन्होंने दिल्ली जैसे गढ़ में 'आप' को वह हार दी, जिसकी कल्पना कुछ सालों पहले तक भाजपा के नेता भी नहीं करते थे।




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