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उन्नाव रेप केस में दिल्ली HC ने पीड़िता की अर्जी ठुकराई, कहा- नए सबूत पेश करने की जरूरत नहीं

Unnao rape case: उन्नाव रेप केस में दिल्ली हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए पीड़िता की एक अर्जी को ठुकरा दिया है। इसमें पीड़ित पक्ष द्वारा नए सबूत जमा करने की मांग की गई थी, जिस पर कोर्ट ने कहा- नए सबूतों की जरूरत नहीं है।

Wed, 22 April 2026 07:33 PMRatan Gupta लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली, नीतू
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उन्नाव रेप केस में दिल्ली HC ने पीड़िता की अर्जी ठुकराई, कहा- नए सबूत पेश करने की जरूरत नहीं

Unnao rape case: दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्नाव बलात्कार मामले में पीड़िता की याचिका खारिज कर दी है। इस याचिका में पीड़िता ने दोषी पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ अतिरिक्त सबूत पेश करने की अनुमति मांगी थी। न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह एवं न्यायमूर्ति मधु जैन की पीठ ने सेंगर द्वारा वर्ष 2020 में दायर अपील पर सुनवाई के दौरान यह फैसला सुनाया।

कोर्ट ने नए सबूत जमा करने की अर्जी ठुकराई

पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर ने अपनी सजा व दोषसिद्धि को चुनौती दी। पीड़िता ने अपनी अर्जी में स्कूल रिकॉर्ड के आधार पर जन्मतिथि समेत कुछ अतिरिक्त दस्तावेज पेश करने एवं नए सबूत दर्ज करने की मांग की थी। हालांकि पीठ ने उपलब्ध दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद कहा कि इस स्तर पर नए साक्ष्य की कोई आवश्यकता नहीं है।

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उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी सुनवाई

पीठ ने पाया कि स्कूल की तरफ से जारी पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि प्रवेश के समय जन्म प्रमाण पत्र जमा नहीं किया गया और उस समय इसकी आवश्यकता भी नहीं थी। साथ ही सुनवाई के दौरान स्कूल के प्रधानाचार्य गवाही दे चुके हैं। प्रवेश रजिस्टर भी पेश किया जा चुका है। पीठ ने किशोर न्याय अधिनियम (जेजेएक्ट) की धारा 94 का हवाला देते हुए कहा कि आयु निर्धारण के लिए स्कूल प्रमाण पत्र प्राथमिक दस्तावेज होता है। उसकी अनुपस्थिति में अन्य विकल्प अपनाए जाते हैं। पीठ ने स्पष्ट कहा कि आवेदन खारिज किया जाता है। मामले की सुनवाई रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही की जाएगी।

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कुलदीप सेंगर को 2019 में मिली थी सजा

आपको बताते चलें कि कुलदीप सिंह सेंगर को वर्ष 2019 में स्पेशल सीबीआई अदालत ने दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। बाद में उनकी सजा को निलंबित करने का आदेश उच्च न्यायालय ने दिसंबर, 2025 में दिया था। इसे कुछ ही दिनों बाद उच्चतम न्यायालय ने स्थगित कर दिया था। यह मामला पूरे देश में काफी चर्चित रहा है, जिसमें पीड़िता व उसके परिवार ने सेंगर और उनके सहयोगियों पर लगातार उत्पीड़न, धमकी आदि के आरोप लगाए थे। मामले की अगली सुनवाई जुलाई में होगी।

खबर में इस्तेमाल तस्वीर प्रतीकात्मक है।

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