दिल्ली HC के ट्रेनी वकील ने होटल की 15वीं मंजिल से कूदकर की आत्महत्या, क्या बोले परिजन?
Delhi High Court trainee lawyer Suicide: दिल्ली हाई कोर्ट में ट्रेनी के तौर पर काम कर रहे 26 साल के एक वकील ने कथित तौर पर कनॉट प्लेस स्थित 'द रॉयल प्लाज़ा' होटल की 15वीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान महावीर एन्क्लेव निवासी राजेश सिंह के रूप में हुई है।

Delhi High Court trainee lawyer Suicide: दिल्ली हाई कोर्ट में ट्रेनी के तौर पर काम कर रहे 26 साल के एक वकील ने कथित तौर पर कनॉट प्लेस स्थित 'द रॉयल प्लाज़ा' होटल की 15वीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान महावीर एन्क्लेव निवासी राजेश सिंह के रूप में हुई है। जानकारी के मुताबिक, ट्रेनी वकील ने होटल में चेक इन के करीब 2.5 घंटे के भीतर ही सुसाइड कर लिया। जानिए इस मामले में परिवार वालों का क्या कहना है?
चेक इन के 2.5 घंटे के भीतर दी जान
पुलिस ने सोमवार को बताया कि इस घटना की जानकारी शनिवार रात करीब 9:15 बजे कनॉट प्लेस थाने को मिली। इसके बाद थाना प्रभारी (एसएचओ) के नेतृत्व में पुलिस की टीमें तुरंत घटनास्थल पर पहुंचीं। शुरुआती जांच में पता चला है कि उन्होंने शुक्रवार शाम करीब 6:30 बजे होटल में चेक-इन किया था।
होटल की 15वीं मंजिल से कूदकर की आत्महत्या
जांच के दौरान यह पाया गया कि सिंह ने कथित तौर पर होटल की 15वीं मंज़िल से छलांग लगा दी थी। उन्हें तुरंत लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अपराध शाखा की टीम और फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) के अधिकारियों ने घटनास्थल का मुआयना किया और सबूत जुटाए। जांच के हिस्से के तौर पर होटल परिसर के सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की जा रही है।
परिवार वालों का क्या है रिएक्शन
इस घटना के बाद से परिवार सदमें मे है कि आखिर उनके बेटे ने आत्महत्या क्यों कर ली। पुलिस ने परिवार वालों के बयानों के आधार पर बताया, इस घटना में किसी भी तरह की साजिश या गड़बड़ी की आशंका नहीं है। शव को पोस्टमार्टम के लिए सुरक्षित रखवा दिया गया है और संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई की जा रही है।
'नो योर दिल्ली' जानिए दिल्ली हाईकोर्ट के बारे में
दिल्ली हाईकोर्ट की स्थापना 31 अक्टूबर 1966 को हुई थी। आजादी से पहले दिल्ली, लाहौर हाईकोर्ट के अधीन थी, जिसे 1947 के बाद ईस्ट पंजाब हाई कोर्ट ने रिप्लेस किया। शुरुआत में यह हाईकोर्ट शिमला के “Peterhoff” भवन से चला, जो 1981 में आग से नष्ट हो गया। बाद में कोर्ट चंडीगढ़ शिफ्ट हुआ और दिल्ली के मामलों के लिए सर्किट बेंच बनाई गई। बढ़ती अहमियत को देखते हुए संसद ने दिल्ली हाई कोर्ट एक्ट, 1966 पास कर अलग हाईकोर्ट स्थापित किया।




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