तुर्कमान गेट मामला: राहगीरों को नहीं उठा सकते, HC की दिल्ली पुलिस को दो-टूक
दिल्ली हाईकोर्ट ने तुर्कमान गेट हिंसा मामले में एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस सिर्फ भीड़ में मौजूद होने के आधार पर राहगीरों को आरोपी नहीं बना सकती है। इसके साथ ही अदालत ने आरोपी की भूमिका स्पष्ट करने के लिए वीडियो साक्ष्य भी मांगे…

दिल्ली हाईकोर्ट ने पिछले महीने तुर्कमान गेट में फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास तोड़फोड़ के दौरान पत्थरबाजी के मामले में अहम टिप्पणी की है। दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि इस घटना के दौरान पुलिस भीड़ का हिस्सा होने के लिए राहगीरों को पकड़ कर आरोपी नहीं बना सकती है। अदालत ने यह बात भीड़ को भड़काने के आरोपी एक व्यक्ति की अग्रिम जमानत की याचिका पर सुनवाई करते हुए कही।
पुलिस ने मांगी स्टेटस रिपोर्ट
न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने दिल्ली पुलिस से साजिद इकबाल की अग्रिम जमानत याचिका पर पुलिस से जवाब में एक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा कि जिसमें वीडियो सबूतों के साथ आरोपी की खास भूमिका का ब्यौरा पेश करने को कहा गया है। दिल्ली पुलिस के वकील ने कहा कि एजेंसी मामले में गहरी साजिश की जांच कर रही है।
क्या आरोप?
पुलिस का दावा है कि आरोपी ने बैरिकेड हटाकर भीड़ को भड़काया था। पीठ को आरोपी के वकील की तरफ से घटना का एक वीडियो दिखाया गया। पीठ ने इसके बाद पुलिस से वीडियो को सही टाइम स्टैम्प के साथ रिकॉर्ड पर लाने को कहा है।
खास भूमिका पर करना होगा गौर
पीठ ने कहा कि कि भले ही याचिकाकर्ता भीड़ का हिस्सा था, अशांति में उसकी खास भूमिका पर विचार किया जाना चाहिए। पीठ ने कहा कि अगर वीडियो में दिख रहा है कि वह भड़का रहा है, तो आप सही हैं। अगर वह बस वहां से गुजर रहा है, तो पुलिस का दावा सही नहीं है।
सभी को उठा रहे हैं तो इसकी इजाजत नहीं
पीठ ने पुलिस को कहा कि अगर आप उस इलाके में सभी को उठा रहे हैं तो इसकी इजाजत नहीं होगी। पुलिस भीड़ में रहने के नाते राहगीरों को पकड़ कर आरोपी नहीं बना सकती है। इस मामले को अगले सप्ताह आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
आरोपी के वकील की क्या दलील?
वहीं याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि वह उस भीड़ का हिस्सा नहीं था जिसने पत्थरबाजी की थी। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता बस अपने रिश्तेदार के घर से वापस आ रहा था जब उसे भीड़ में धकेल दिया गया। इससे पहले सत्र अदालत ने 21 जनवरी को आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
मामले जांच के प्राथमिक स्तर पर
सत्र अदालत का कहना था कि अभी मामले जांच के प्राथमिक स्तर पर है। ज्ञात रहे कि यह मामला 6 और 7 जनवरी की रात को रामलीला मैदान इलाके में मस्जिद के पास अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान हुई हिंसा से जुड़ा है।
अफवाह फैलाई गई जिससे हुआ जमावड़ा
पुलिस ने कहा कि सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाई गई कि तुर्कमान गेट के सामने वाली मस्जिद को तोड़ा जा रहा है, जिससे लोग मौके पर जमा हो गए। करीब 150-200 लोगों ने पुलिस और दिल्ली नगर निगम कर्मचारियों पर पत्थर और कांच की बोतलें फेंकी, जिससे इलाके के पुलिस थानाध्यक्ष समेत छह पुलिसकर्मी घायल हो गए थे।




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