तुलसी निकेतन में रहने वालों को गुड न्यूज, GDA जर्जर घरों की जगह बनाकर देगा नए फ्लैट
गाजियाबाद में तुलसी निकेतन में रहने वालों के लिए गुड न्यूज है। तुलसी निकेतन योजना के जर्जर फ्लैटों की जगह लोगों को नए फ्लैट बनाकर दिए जाएंगे। बोर्ड की बैठक में उत्तर प्रदेश शहरी पुनर्विकास नीति 2026 के तहत पीपीपी आधार पर योजना को दोबारा से विकसित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
गाजियाबाद में तुलसी निकेतन में रहने वालों के लिए गुड न्यूज है। तुलसी निकेतन योजना के जर्जर फ्लैटों की जगह लोगों को नए फ्लैट बनाकर दिए जाएंगे। इस योजना को परवान चढ़ाने के लिए गुरुवार को बोर्ड बैठक में उत्तर प्रदेश शहरी पुनर्विकास नीति 2026 के तहत पीपीपी आधार पर दोबारा से विकसित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
जीडीए वर्ष 1989-90 में 7.83 हेक्टेयर क्षेत्रफल में तुलसी निकेतन योजना लाया था। इसमें 2004 ईडब्ल्यूएस और 288 एलआईजी बनाए गए। कुल 2,292 मकानों में 60 दुकान भी संचालित हैं। यहां 20 हजार से अधिक आबादी रहती है। मकानों की हालत काफी खराब होने के कारण दीवारों का प्लास्टर गिरने की कई बार घटना हो चुकी है। कई बार हुए हादसों में लोगों के घायल होने की घटनाएं भी सामने आईं हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए प्राधिकरण यहां पुनर्विकास (रीडेवलपमेंट) के तहत बहुमंजिला इमारत बनाने की योजना तैयार की गई थी। हाल ही में प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश शहरी पुनर्विकास नीति 2026 को मंजूरी दे दी। अब जीडीए इसी नीति के तहत इस योजना के फ्लैट तैयार कराएगा।
जीडीए वर्ष 1989-90 में तुलसी निकेतन योजना लाया था। दिल्ली से सटी होने के कारण यहां लोगों ने तुरंत मकान खरीद लिए। सूत्रों का कहना है कि कुछ मकान चार से पांच लोगों ने पॉवर ऑफ आटार्नी पर बेचे हैं। ऐसे में मूल कब्जेदार का पता नहीं है।
भू-उपयोग के ये प्रस्ताव मंजूर
मोरटा में 1.2050 हेक्टेयर क्षेत्रफल को कार्यालय भू उपयोग से आवासीय करने को मंजूरी दी। ग्राम वासना में भूमि को हाई-वे फैसिलिटी/कृषि भू-उपयोग से संस्थागत भू-उपयोग में परिवर्तन किया। कोयल एंक्लेव आवासीय योजना में ग्रुप हाउसिंग भूखंड की जगह भूखंड में मानचित्र में आंशिक संशोधन को मंजूरी। इंद्रप्रस्थ में 12 मीटर सड़क बनाने के लिए अतिरिक्त एफएआर पर सहमति दी।
नई नीति के तहत कई योजनाओं में काम हो सकेगा
उत्तर प्रदेश शहरी पुनर्विकास नीति-2026 लागू होने के बाद तुलसी निकेतन के अलावा जीडीए की अन्य योजनाओं को भी फायदा होगा, जो योजनाएं जर्जर हो चुकी हैं। उन पर भी इस नीति के तहत काम किया जा सकता है।
आय-व्यय का ब्योरा
वित्तीय वर्ष 2025-26 की आय-व्यय का ब्योरा दिया गया। साथ ही वित्तीय वर्ष 2026-27 (प्रस्तावित) के लिए कुल आय 3,49,640 लाख एवं कुल व्यय 3,28,700 लाख के प्रस्ताव को स्वीकृत दी।
अन्य प्रस्ताव भी हुए पास
● 15 सिविल इंजीनियरों की आउटसोर्सिंग के माध्यम से नियुक्ति और एक एजेंसी का चयन के प्रस्ताव को मंजूरी मिली।
● विशेषज्ञ परियोजनाओं के लिए अधिकतम तीन वर्ष के लिए कंसल्टेंट्स की नियुक्ति को स्वीकृति दी।
● महायोजना-2031 के अनुरूप विभिन्न क्षेत्रों के भू-उपयोग परिवर्तन प्रस्तावों को मंजूरी दी है
● अवैध निर्माण के विरुद्ध प्रभावी प्रवर्तन के लिए भूतपूर्व सैनिकों एवं होमगार्ड की सेवाएं लेने के व्यय का अनुमोदन किया।




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