अचानक वार से बेसुध हुई काजल, वरना SWAT कमांडो को मारना आसान नहीं, जानें कैसी होती है ट्रेनिंग
राजधानी दिल्ली के द्वारका में दिल्ली पुलिस की स्वाट कमांडो काजल चौधरी की हत्या के मामले में कई अहम खुलासे हुए हैं। जांच में सामने आया कि काजल के सिर पर उसके पति ने अचानक लोहे के डंबल से हमला किया था, जिससे वह बेसुध हो गई।

राजधानी दिल्ली के द्वारका में दिल्ली पुलिस की स्वाट कमांडो काजल चौधरी की हत्या के मामले में कई अहम खुलासे हुए हैं। जांच में सामने आया कि काजल के सिर पर उसके पति ने अचानक लोहे के डंबल से हमला किया था, जिससे वह बेसुध हो गई।
जांच से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि अचानक हुए हमले के कारण ही काजल अपना बचाव नहीं कर पाई, वरना एक महिला स्वाट कमांडो हाई-रिस्क ऑपरेशन के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित होती हैं। उन्हें मारना आसान नहीं होता। डंबल का पहला वार होते ही काजल बेहोश हो गई। इसके बाद उसने उसके सिर पर कई बार हमला किया, जिससे मौत हुई। काजल चार माह की गर्भवती थी।
घर खर्च से लेकर ईएमआई तक सब काजल के जिम्मे
जांच में सामने आया है कि अंकुर और काजल के बीच अक्सर परिवार की मदद और आर्थिक मामलों को लेकर विवाद होता था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, काजल के परिजनों का आरोप है कि शादी के बाद अंकुर और उसका परिवार पैसों को लेकर परेशान करता था। अंकुर न तो घर खर्च में योगदान देता था और न बच्चे की देखभाल में। लोन की ईएमआई और अन्य खर्चे काजल खुद चलाती थी, बावजूद इसके उसे ताने दिए जाते थे। अंकुर का बड़ा और छोटा भाई बेरोजगार हैं। अंकुर अक्सर उनकी मदद करता था, जिससे दोनों के बीच तनाव रहता था। वारदात वाले दिन अंकुर को उसके भाइयों की मदद करने का हवाला देते हुए जवाब दिया था।
कौन होते हैं स्वाट कमांडो?
स्वाट का पूरा नाम स्पेशल वेपंस एंड टैक्टिक्स ((SWAT Commando) है। ये कमांडो दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल का हिस्सा हैं। यह टीम 26/11 मुंबई हमले के बाद बनाई गई थी। दिल्ली की टीम में महिला स्वाट कमांडो भी शामिल हैं। इस टीम का उद्देश्य हाई-रिस्क ऑपरेशन और आतंकी हमलों से निपटना है। स्वाट कमांडो तकनीकी और शारीरिक दोनों रूप से बेहद कुशल होते हैं। उनके पास खास हथियार और कौशल होता है।

छह माह की विशेष ट्रेनिंग मिलती है
स्वाट कमांडो की ट्रेनिंग बहुत चुनौतीपूर्ण और कठोर होती है। इसमें शामिल होने वाले जवानों को शारीरिक और मानसिक दक्षता के कई टेस्ट पास करने होते हैं। फिटनेस, स्टैमिना और शूटिंग टेस्ट के आधार पर ही टीम में चयन किया जाता है। ट्रेनिंग आम तौर पर 3-6 महीने तक चलती है और इसमें अलग-अलग सिचुएशन में ऑपरेशन का अभ्यास कराया जाता है।
संवेदनशील स्थानों पर होती है तैनाती
● दिल्ली पुलिस की स्वाट टीम को अतिसंवेदनशील स्थानों पर तैनात किया जाता है
● वीआईपी सुरक्षा, त्यौहार पर अलर्ट वाले स्थानों और आतंकवादियों के टारगेट वाले स्थानों पर स्वाट कमांडो की तैनाती की जाती है
एक कमांडो की ट्रेनिंग पर 3 लाख तक का खर्चा
● शारीरिक ट्रेनिंग : इमसें 5 किमी की दौड़, ऑब्सटेकल कोर्स और लंबी दूरी की मार्च शामिल है।
● मानसिक ट्रेनिंग : इसमें सर्वाइवल ट्रेनिंग, मानसिक परीक्षा, और टैक्टिकल ट्रेनिंग शामिल है
● विशेषज्ञता : स्नाइपिंग, तोड़फोड़ और जीवित रहने की स्किल सिखाई जाती है
● लॉजिस्टिक्स ट्रेनिंग : ट्रेड-क्राफ्ट ट्रेनिंग और खुफिया एजेंसियों की ट्रेनिंग शामिल है
● खर्च : एक स्वाट कमांडो की ट्रेनिंग पर लगभग 2-3 लाख रुपये प्रति माह का खर्च आता है




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