Students Police injured in clash during JNUSU protest march, several detained JNU में मार्च के दौरान पुलिस के साथ छात्रों की हिंसक झड़प, लगा पुलिसकर्मियों को काटने का आरोप, Ncr Hindi News - Hindustan
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JNU में मार्च के दौरान पुलिस के साथ छात्रों की हिंसक झड़प, लगा पुलिसकर्मियों को काटने का आरोप

इस घटना को लेकर JNUTA ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस की कार्रवाई छात्रों को मार्च करने के उनके लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग करने से रोकने के उद्देश्य से की गई थी और उसने हिरासत में लिए गए सभी छात्रों की तत्काल रिहाई की मांग की।

Fri, 27 Feb 2026 12:51 AMभाषा नई दिल्ली
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JNU में मार्च के दौरान पुलिस के साथ छात्रों की हिंसक झड़प, लगा पुलिसकर्मियों को काटने का आरोप

दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में गुरुवार को छात्र संघ द्वारा निकाले जा रहे मार्च के दौरान पुलिस और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के छात्रों के बीच झड़प हो गई। पुलिस ने झड़प को लेकर दावा किया कि प्रदर्शनकारियों ने उस पर हमला किया, वहीं प्रदर्शनकारी छात्रों ने अपने खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग करने का आरोप लगाया। पुलिस ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने उस पर लाठियां और जूते फेंके और हमले किए, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। यहां तक कि पुलिस ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर कुछ कर्मियों को दांत से काटने का भी आरोप लगाया। जिसके बाद प्रदर्शनकारी छात्रों में से कई को हिरासत में ले लिया गया।

पुलिस ने घटना को लेकर दर्ज किया मामला

छात्रों और पुलिस के बीच यह झड़प उस समय हुई जब प्रदर्शनकारियों द्वारा मार्च को परिसर से बाहर ले जाने की कोशिश की गई, जिसके बाद विश्वविद्यालय के गेट पर दोनों के बीच यह झड़प हुई। पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को जेएनयू परिसर के नॉर्थ गेट पर रोका और धीरे-धीरे उन्हें विश्वविद्यालय परिसर के अंदर धकेल दिया। पुलिस के अनुसार जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (JNUSU) अध्यक्ष अदिति मिश्रा, पूर्व अध्यक्ष नीतीश कुमार और कई अन्य लोगों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस ने इस घटना के संबंध में वसंत कुंज पुलिस स्टेशन में एफआईआर संख्या 76/26 दिनांक 26.02.2026 धारा 221/121(1)/132/3(5) बीएनएस, उत्तर के तहत पंजीकृत की है और जांच शुरू कर दी है।

जेएनयू प्रशासन ने नहीं दी थी कैंपस के बाहर मार्च की इजाजत

पुलिस ने एक बयान में कहा कि छात्रों ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय परिसर से शिक्षा मंत्रालय तक एक 'लॉन्ग मार्च' निकालने का आह्वान किया था। हालांकि JNU प्रशासन ने उन्हें इस तरह का विरोध प्रदर्शन करने की इजाजत नहीं दी थी, और उन्हें कैंपस तक ही सीमित रहने के लिए कहा था। लेकिन इसके बाद भी वे नहीं माने और विश्वविद्यालय के गेट पर यह झड़प हो गई। यह मार्च विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा हाल ही में एक पॉडकास्ट में यूजीसी मानदंडों के क्रियान्वयन, JNUSU पदाधिकारियों के निलंबन और प्रस्तावित रोहित अधिनियम पर की गई टिप्पणियों के विरोध में जारी प्रदर्शनों का हिस्सा था।

छात्रों ने लगाया अत्यधिक बल प्रयोग करने का आरोप

पुलिस के अनुसार, जेएनयू प्रशासन ने प्रदर्शनकारी छात्रों को सूचित किया था कि परिसर के बाहर किसी भी प्रकार के विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई है और उन्हें विश्वविद्यालय परिसर के भीतर ही अपना प्रदर्शन सीमित रखने की सलाह दी थी।

पुलिस ने बताया कि इसके बावजूद, लगभग 400-500 छात्र परिसर में जमा हुए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। पुलिस ने बताया कि दोपहर लगभग 3.20 बजे, प्रदर्शनकारी मुख्य द्वार से बाहर निकले और मंत्रालय की ओर बढ़ने लगे। जिसके बाद टकराव हो गया। प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया है कि उनके खिलाफ अत्यधिक बल का प्रयोग किया गया, जिससे झड़प में कई छात्र घायल हो गए और उनमें से कुछ को पुलिस द्वारा अपुष्ट स्थानों पर ले जाया गया।

प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर बैनर, जूते व लाठियां फेंकी

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, 'स्थिति बिगड़ने पर परिसर के बाहर लगाए गए बैरिकेड क्षतिग्रस्त हो गए। प्रदर्शनकारियों ने बैनर और लाठियां फेंकीं, जूते फेंके और हमला भी किया। झड़प के दौरान कुछ पुलिसकर्मियों को दांत काट लिया गया। इससे मौके पर तैनात कई अधिकारी घायल हो गए।'

इस बारे में बात करते हुए पुलिस अधिकारी ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया, 'हमने कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है। कुछ प्रदर्शनकारी आरोप लगा रहे हैं कि पुलिस ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया, जो पूरी तरह निराधार है। वहां तैनात प्रत्येक अधिकारी कानून व्यवस्था बनाए रखने में लगा हुआ था।'

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उधर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (जेएनयूटीए) ने एक बयान जारी करते हुए पुलिस द्वारा किए गए बल प्रयोग की निंदा की। संघ ने इस घटना में कई छात्रों और छात्राओं के घायल होने का आरोप लगाया और हिरासत में लिए गए लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की, साथ ही दावा किया कि कुछ को "अपुष्ट स्थानों" पर ले जाया गया है।

जेएनयूटीए ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस की कार्रवाई छात्रों को मार्च करने के उनके लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग करने से रोकने के उद्देश्य से की गई थी और उसने हिरासत में लिए गए सभी छात्रों की तत्काल रिहाई की मांग की।

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