गाजियाबाद में 3 लड़कियों की मौत से एक्टर सोनू सूद भी दुखी; कर दी यह बड़ी मांग, लोगों से मांगा समर्थन
सोनू सूद ने लिखा, लिखा, ‘बचपन को मार्गदर्शन और देखभाल की जरूरत है, ना कि एल्गोरिदम और लगातार स्क्रीन देखने की। यह किसी पर इल्ज़ाम लगाने की बात नहीं है, बल्कि यह तो सुरक्षा की बात है, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए।'

गाजियाबाद की एक रिहायशी इमारत की नौवीं मंजिल से कूदकर जान देने वाली तीन नाबालिग बहनों की खबर ने देश के आम लोगों के साथ-साथ एक्टर सोनू सूद को भी झकझोर कर रख दिया है। इस घटना को उन्होंने सोशल मीडिया पर उठाया और 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग पर रोक लगाने की मांग की और इस पर लोगों से समर्थन भी मांगा। साथ ही उन्होंने कहा कि इस खबर को हमें एक हेडलाइन समझकर भूलना नहीं है, बल्कि अब इस बारे में कार्रवाई करने का समय आ चुका है।
16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए बैन हो सोशल मीडिया
इस घटना के बारे में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) पर बुधवार को प्रतिक्रिया देते हुए सोनू सूद ने लिखा, 'गाजियाबाद में तीन छोटी लड़कियों की जान चली गई, हिंसा या गरीबों के चलते नहीं, बल्कि ऑनलाइन गेमिंग और डिजिटल लत के अनदेखे दबाव के चलते। मैंने इसको लेकर पहले भी आवाज उठाई है और मैं फिर कहूंगा कि पढ़ाई के लिए इस्तेमाल को छोड़ 16 साल तक से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग पर रोक लगनी चाहिए।'
आगे उन्होंने लिखा, 'बचपन को मार्गदर्शन और देखभाल की जरूरत है, ना कि एल्गोरिदम और लगातार स्क्रीन देखने की। यह किसी पर इल्ज़ाम लगाने की बात नहीं है, बल्कि यह तो सुरक्षा की बात है, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए। इसलिए इस खबर को एक और ऐसी हेडलाइन न बनने दें जिसे हम भूल जाएं। अब इस बारे में कार्रवाई करने का समय है।'

'बच्चियां हारी नहीं थीं, अकेली पड़ गईं थीं'
वहीं इसी घटना को लेकर विस्तारपूर्वक प्रतिक्रिया देते हुए एक्टर ने अपना एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर भी शेयर किया, जिसमें उन्होंने कहा, 'आज गाजियाबाद में तीन बच्चियों ने अपनी जान दे दी, ये बच्चियां हारी नहीं थीं, अकेली पड़ गई थीं। ऑनलाइन और सोशल मीडिया की दुनिया में हम अपने बच्चों को इतना आगे छोड़ आए हैं कि हमें उनकी चुप्पी सुनाई नहीं देती। कुछ समय पहले ही मैंने गुहार लगाई थी कि 16 साल से कम उम्र के जो बच्चे हैं उन्हें हमें ऑनलाइन और सोशल मीडिया की जो गेमिंग की जो दुनिया है उससे बहुत दूर रखना है। लेकिन हम अपनी जिंदगी में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि हम ये भूल जाते हैं कि हमारे परिवार में मोबाइल फोन के रूप में एक ऐसा सदस्य है, जिसमें मौजूद सोशल मीडिया के साथ बच्चे हमसे ज्यादा समय बिताना चाहते हैं।'
'बच्चों की जान को खतरे में डालना जरूरी नहीं'
अभिनेता ने आगे कहा, 'अगर हम चाहते हैं कि उनकी जिंदगी, हमारी जिंदगी, उनका भविष्य, हमारे देश का भविष्य बेहतर हो तो सबसे पहले ये बैन लगाना जरूरी है। आप सोचिए कि उन्हें स्क्रीन नहीं हमारा साथ चाहिए, बच्चों को मोबाइल नहीं, हमारी मौजूदगी चाहिए, डांट नहीं हमारी बातचीत चाहिए। लेकिन हमारे पास भी कहां समय है उनके लिए, क्योंकि हमने उनके हाथ में एक सोशल मीडिया से लैस मोबाइल फोन थमा दिया है, ताकि वो देखते रहें, पढ़ते रहें। पढ़ाई के लिए टेक्नोलॉजी जरूरी है लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि हम उस टेक्नोलॉजी के लिए अपने बच्चों की जान खतरे में डाल दें। पढ़ाई के लिए मोबाइल फोन होने चाहिए, लेकिन सोशल मीडिया के लिए नहीं। खासकर कम उम्र के बच्चों के लिए। चलिए आज मिलकर ये कोशिश करें, कि हम उस सदस्य को जो हमारे परिवार को बांट रहा है, उसे थोड़ा सा दूर करें, इससे पहले कि देर हो जाए, मिलकर वो कानून बनाएं, ताकि हमारे बच्चे हमारे साथ रह सकें, सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग के साथ नहीं। धन्यवाद।'
गाजियाबाद की घटना के बारे में सब कुछ
यह घटना बुधवार तड़के गाजियाबाद की एक ऊंची बिल्डिंग वाले अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स में हुई। लड़कियां अपने पिता, जो कि एक फॉरेक्स ट्रेडर हैं, और अपनी दोनों मांओं के साथ रहती थीं। पुलिस ने बताया कि सबसे बड़ी लड़की पिता की पहली पत्नी की बेटी थी, जबकि दो छोटी लड़कियां उनकी दूसरी शादी से थीं। शख्स की दोनों पत्नियां आपस में सगी बहनें हैं। साथ ही पुलिस ने यह भी बताया कि लड़कियों के पिता पर 2 करोड़ रुपए का कर्ज भी था। असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर अतुल कुमार सिंह ने कहा कि शुरुआती जांच से पता चलता है कि कोविड-19 महामारी के दौरान और उसके बाद बहनों को एक कोरियन-थीम वाले ऑनलाइन गेम की बहुत ज़्यादा लत लग गई थी, जिससे उनके व्यवहार, दिनचर्या और खुद को देखने के तरीके में काफी बदलाव आया था। जांच दल ने यह भी पाया कि मृतकों में शामिल सबसे बड़ी लड़की, 16 साल की होने के बावजूद, अभी भी क्लास 4 में पढ़ रही थी और कथित तौर पर तीनों स्कूल जाने में अनियमित थीं।




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