गाजियाबाद की 3 बहनों की आत्महत्या: कोरिया के खुदको नुकसान पहुंचाने वाले ट्रेंड की चर्चा क्यों?
हालांकि अब तक की पुलिस जांच में किसी खास ‘कोरियन टास्क गेम’ या ऑनलाइन सुसाइड चैलेंज की भूमिका से इनकार किया गया है, लेकिन बच्चियों की डायरी में दर्ज गहरे अकेलेपन की बातें और कोरियन कल्चर के प्रति उनके झुकाव ने कई सवाल खड़े किए हैं।

गाजियाबाद में 12, 14 और 16 साल की तीन सगी बहनों द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटना ने एक बार फिर युवाओं की मेंटल हेल्थ, लंबे समय तक ऑनलाइन रहने के चलते होने वाले प्रभावों और ग्लोबल डिजिटल ट्रेंड्स पर गंभीर बहस छेड़ दी है। हालांकि अब तक की पुलिस जांच में किसी खास ‘कोरियन टास्क गेम’ या ऑनलाइन सुसाइड चैलेंज की भूमिका से इनकार किया गया है, लेकिन बच्चियों की डायरी में दर्ज गहरे अकेलेपन की बातें और कोरियन कल्चर के प्रति उनके झुकाव ने कई सवाल खड़े किए हैं।
बात शुरू करने से पहले लाइव हिन्दुस्तान बताना चाहता है कि हम किसी एक संस्कृति को दोष नहीं देने जा रहे हैं। एक्सपर्ट मानते हैं कि आत्महत्या के पीछे कई कारण एक साथ जिम्मेदार होते हैं। ये सामाजिक, मानसिक और डिजिटल जैसे कई कारण हो सकते हैं।हालांकि, कुछ देशों में मौजूद सामाजिक ढांचे और डिजिटल माहौल ऐसे होते हैं, जहां हानिकारक ऑनलाइन ट्रेंड तेजी से फैलते हैं- दक्षिण कोरिया इसका एक उदाहरण माना जाता है।
कोरियन पॉप कल्चर का डिजिटल आकर्षण
बीते एक दशक में K-pop, K-ड्रामा, कोरियन वेब सीरीज और फैशन ने भारत समेत दुनिया भर के युवाओं में खास जगह बनाई है। इमोशनल स्टोरी, परफेक्ट इमेज और ‘आइडियल लाइफ’ की बातें युवाओं को तेजी से अपनी तरफ खींच रही हैं। मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक, जब रियल लाइफ में बातचीत और इमोशनल सहारा कमजोर पड़ता है, तब ऑनलाइन दुनिया से लोग जुड़ने लगते हैं, जो कि एक खतरनाक रूप धारण कर सकता है।
गाजियाबाद मामले में पुलिस ने बताया कि तीनों बच्चियां कोरियन कल्चर से बहुत ज्यादा प्रभावित थीं। इन लड़कियों ने कोरियन नाम भी अपनाए थे। हालांकि, एक्सपर्ट चेतावनी देते हैं कि किसी भी कल्चर से गहरा जुड़ाव तब जोखिम बनता है, जब वह अकेलेपन और इमोशनील प्रेसर के साथ जुड़ जाए।
दक्षिण कोरिया में आत्महत्या के आंकड़े ज्यादा
दक्षिण कोरिया एक विकसित देश होने के बावजूद OECD देशों में आत्महत्या की ऊंची दर के लिए जाना जाता है। इसके पीछे पढ़ाई-लिखाई में जरूरत से ज्यादा कॉम्प्टीशन, समाज से बहुत ज्यादा उम्मीदें, लंबे काम के घंटे और लोगों में मेंटल हेल्थ को लेकर मौजूद झिझक जैसी तमाम बातें प्रमुख कारण माने जाते हैं।
कोरियन एजुकेशन सिस्टम में छात्रों पर कम उम्र से ही परीक्षा और करियर का भारी दबाव होता है। स्कूल के बाद ‘हागवोन’ नामक कोचिंग संस्थानों में पढ़ाई आम बात है, जिससे युवाओं को आराम और इमोशनली राहत पाने का वक्त नहीं मिल पाता।
ऑनलाइन सेल्फ-हार्म ट्रेंड कैसे फैलते हैं
खुद को नुकसान पहुंचाने वाले ऑनलाइन चैलेंज केवल दक्षिण कोरिया तक सीमित नहीं हैं। ये तेजी से दुनिया के अन्य हिस्सों में फैलते जा रहे हैं। एक्सपर्ट इन्हें “डिजिटल ट्रांजिशन” बताते हैं- ऐसे विचार जो सोशल मीडिया एल्गोरिद्म, पियर प्रेशर(साथियों के दवाब) और ऑनलाइन वैलिडेशन के जरिए कमजोर मानसिक स्थिति वाले युवकों तक पहुंचते हैं। दक्षिण कोरिया में तेज इंटरनेट, लगभग हर किसी के द्वारा स्मार्टफोन इस्तेमाल करना और सोशल मीडिया पर बहुत ज्यादा निर्भर हो जाना भी ऐसे जोखिमों को बढ़ाते हैं।
भारत के लिए चेतावनी
हालांकि, भारत में अब तक ऐसे ट्रेंड बड़े पैमाने पर नहीं फैले हैं, लेकिन इंटरनेट की पहुंच और विदेशी डिजिटल कंटेंट की लोकप्रियता के साथ खतरे भी बढ़ रहे हैं। गाजियाबाद की घटना बताती है कि ग्लोबल डिजिटल कल्चर और लोकल लेवल पर मौजूद मेंटल हेल्थ या अन्य बात इन चीजों से टकराकर इतना भयंकर रूप धारण कर सकती हैं। बाकी कोरियन कल्चर या कोई भी देश खुद को नुकसान पहुंचाने जैसी चीज को बढ़ावा नहीं देता है।




साइन इन