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नाले की गैस से बन रही चाय-खाना! गाजियाबाद में शख्स का अनोखा दावा, क्या बोले एक्सपर्ट?

साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र साइट 4 के नाले में ड्रम और पाइप लगाकर गैस निकालने की बात कही है। उन्होंने कहा कि एलपीजी संकट में मजदूर तबके के लोगों के लिए यह बड़ी राहत हो सकती है।

Sun, 29 March 2026 08:25 PMRatan Gupta लाइव हिन्दुस्तान, गाजियाबाद, संजीव वर्मा
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नाले की गैस से बन रही चाय-खाना! गाजियाबाद में शख्स का अनोखा दावा, क्या बोले एक्सपर्ट?

गाजियाबाद में नाले से निकलने वाली मीथेन गैस को इकट्ठा कर खाना बनाया जा रहा है। यह दावा बृज विहार में रहने वाले बुजुर्ग हेमंत भारद्वाज ने किया है। उन्होंने साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र साइट 4 के नाले में ड्रम और पाइप लगाकर गैस निकालने की बात कही है। उन्होंने कहा कि एलपीजी संकट में मजदूर तबके के लोगों के लिए यह बड़ी राहत हो सकती है।

10 साल पहले प्रयोग किया था

साइट 4 का नाला शहर के सबसे बड़े नालों में से एक है, जिसमें औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला अपशिष्ट जमा रहता है। नाले के पास बृज विहार के ए ब्लॉक में रहने वाले हेमंत भारद्वाज ने चार ड्रम नाले में लगाए हैं। हेमंत का कहना है कि उन्होंने यह प्रयोग करीब 10 साल पहले किया था। इससे वह नाले के पास अटल मशाल जलाते थे। मौजूदा संकट को देखते हुए फिर से गैस की व्यवस्था की है।

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नाली की गैस से बना रहे खाना और चाय

ड्रमों का खुला सिरा नाले में अंदर तक दबाया है। ऊपर ढक्कन पर मजबूती से एक-एक पाइप लगाया है। चारों ड्रमों को एक लाइन से जोड़कर इसे अपने घर की दीवार के पास रखे बर्नर से जोड़ दिया है। हेमंत का कहना है कि नाले से निकली मीथेन गैस जैसे-जैसे ड्रम में भरती है, यह ऊपर आता जाता है। ड्रम गिरे नहीं, इसीलिए इसे एक केज से जोड़ा है। उनके मुताबिक 24 घंटे में एक ड्रम से आधे घंटे तक के प्रयोग के लिए गैस मिल जाती है। वह इसका उपयोग खाने और चाय बनाने में कर रहे हैं।

एक्सपर्ट का क्या कहना है

वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरीके से मीथेन गैस का उपयोग हो सकता है, लेकिन यह खतरनाक हो सकता है। साथ ही इस गैस का उपयोग करने से आसपास बेहद दुर्गंध फैल जाती है। वहीं हेमंत भारद्वाज का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों को जरूरत पड़ने पर वह इसी तरह से और भी इंतजाम करेंगे ताकि उन्हें परेशानी न हो।

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