मुझे बहुत धमकियां मिल रहीं; TMC की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष दिल्ली पुलिस से बोलीं
टीएमसी की महिला सांसद सागरिका घोष ने धमकियां मिलने की बात कही है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए दिल्ली पुलिस को इसकी सूचना दी है। सागरिका ने लिखित शिकायत देने की बात भी कही है।

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच जमकर आरोप-प्रत्यारोप चल रहा है। इस बीच टीएमसी की महिला सांसद सागरिका घोष ने धमकियां मिलने की बात कही है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए दिल्ली पुलिस को इसकी सूचना दी है और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के दफ्तर को भी टैग किया है।
सागरिका घोष ने कुछ नंबरों को साझा करते हुए लिखा, 'प्रिय दिल्ली पुलिस! कल शाम मुझे बहुत ज्यादा धमकियां वाले फोन कॉल्स इन नंबरों से आए हैं, जिनकी पहचान मैंने ट्रू कॉलर ऐप से की है। उम्मीद है कि आप आवश्यक कदम उठाएंगे। मैं शिकायत भी दर्ज कराऊंगी। धन्यवाद।' घोष ने इस ट्वीट के साथ सीएमओ दिल्ली को भी टैग किया है।
राज्यसभा में टीएमसी की डिप्टी लीडर हैं सागरिका घोष
सागरिका घोष राज्यसभा की सांसद हैं और टीएमसी की उच्च सदन में डिप्टी लीडर भी हैं। वरिष्ठ पत्रकार रहीं सागरिका घोष फरवरी 2024 में टीएमसी में शामिल हुईं। पार्टी ने उन्हें राज्यसभा का सदस्य बनाया जहां वह पार्टी की ओर से अलग-अलग विषयों पर आवाज उठाती हैं। वह केंद्र सरकार और भाजपा के खिलाफ तीखे तेवरों के लिए भी जानी जाती हैं। घोष की ओर से की गई शिकायत पर फिलहाल दिल्ली पुलिस या सीएमओ की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
हार के बाद निशाने पर टीएमसी के कई नेता
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को मिली हार के बाद पार्टी के कई नेताओं ने इस तरह परेशान किए जाने का आरोप लगाया है। राज्यसभा सांसद महुआ मोइत्रा ने विमान में बदसलूकी का आरोप लगाया। उनके सामने कुछ लोगों ने चोर-चोर के नारे लगाए। पूर्व सीएम ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी को भी इस तरह के नारों का सामना करना पड़ा। वहीं, अब सागरिका घोष ने धमकियां मिलने की बात कही है।
पश्चिम बंगाल में छिनी 15 साल पुरानी सत्ता
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस से 15 साल पुरानी सत्ता छिन गई है। ममता बनर्जी की अगुआई वाली सरकार को भाजपा ने सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। 4 मई को घोषित नतीजों में भाजपा ने 207 सीटों पर कब्जा करके पहली बार पश्चिम बंगाल में सत्ता हासिल की है। इससे पहले 2021 में पार्टी को 77 सीटों से संतोष करना पड़ा था, जबकि महज 10 साल पहले 2016 के विधानसभा चुनाव में भगवा दल को महज 3 सीटें मिली थीं। पार्टी ने टीएमसी के ही कुछ बड़े नेताओं को तोड़कर अपने संगठन को मजबूत बनाया और सत्ता तक पहुंचने में सफलता हासिल की।




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