दिल्ली में सीवर के गड्ढे ने ली एक और शख्स की जान, चप्पल ने खोला मौत का राज; 3 अहम सवाल
दिल्ली के रोहिणी इलाके में एक खुले सीवर में डूबने से बिरजू नामक व्यक्ति की मौत हो गई। उसकी चप्पल सीवर के पास मिलने से मामले का खुलासा हुआ। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बार-बार शिकायत के बावजूद डीडीए ने सीवर को खुला छोड़ रखा था।

छह फीट गहरे सीवर में डूबकर बिरजू की मौत का राज उसके चप्पल ने खोला। हुआ यूं कि, सूरज को जब मंगलवार सुबह बिरजू नहीं दिखा तो वह उसे ढूंढने लगा। ढूंढते-ढूंढते वह सीवर के पास पहुंचा तो उसका चप्पल दिखाई दिया। इसके बाद मामाले का खुलासा हुआ।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि खामियों को छिपाने के लिए डीडीए और संबंधित एजेंसियां आनन-फानन में हरकत में आईं और खुले सीवरों को बंद करना शुरू कर दिया। हादसे की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने करीब 300 मीटर के दायरे में बैरिकेड्स लगा दिए। यहां लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है। सूत्रों ने बताया कि डीडीए ने करीब छह माह पहले ही यहां नाले और सीवर का निर्माण किया था। नाले पर कहीं कहीं ढक्क्न लगा दिए थे, लेकिन ज्यादात्तर हिस्सा खुला ही छोड़ा हुआ है।
घटना के बाद लोगों को सूचना दी
पुलिस अधिकारी ने बताया कि मंगलवार सुबह सूरज को बिरजू नहीं मिला तो उसने उसकी तलाश शुरू की। पहले तो वह अपहरण की बात बताता रहा। बाद जब वह बिरजू को ढूंढने गया तो सीवर के पास उसकी चप्पल देखकर उसे याद आया कि बिरजू रात को सीवर में गिर गया था। इसके बाद उसने निर्माणाधीन साइट पर काम कर रहे लोगों को सूचना दी। सूरज के दोस्तों ने बताया कि पुलिस को दोपहर 2.30 बजे की सूचना दी गई थी। लेकिन शाम सात बजे के बाद सीवर से पानी निकालने की बड़ी वाली मशीन मंगवाई गई। मशीन ने आकर पानी निकाला, उसके बाद बिरजू को बाहर निकाला जा सका। सूचना देने के बाद भी प्रशासन ने गंभीरता नहीं दिखाई। रोहिणी में जहां हादसा हुआ है वह डीडीए की जमीन बताई जा रही है। इस जमीन को कई परियोजनाओं के लिए रखा गया था, लेकिन सालों से कोई भी निर्माण कार्य यहां नहीं किया गया है।
तीन अहम सवाल
- जमीन खाली थी तो वहां चारदीवारी क्यों नहीं की गई ?
- डीडीए ने मौके पर स्ट्रीट लाइट की व्यावस्था क्यों नही की?
- सीवर पर शिकायतों के बाद भी ढक्कन क्यों नहीं लगा गए थे ?
शिकायतों के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
स्थानीय आरडब्लूए के अध्यक्ष महेश कुमार ने बताया कि सीवर का ढक्कन काफी समय से टूटा या खुला पड़ा था। न तो वहां बैरिकेड लगाए गए थे और न ही कोई चेतावनी बोर्ड है। उन्होंने कहा कि हमने कई बार शिकायत की, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला।




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