Raghav Chadha raised public issues in Parliament राघव चड्ढा क्यों पार्टी के निशाने पर आ गए, कहीं संसद में उठाए गए ये 7 मुद्दे तो नहीं बने कारण, Ncr Hindi News - Hindustan
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राघव चड्ढा क्यों पार्टी के निशाने पर आ गए, कहीं संसद में उठाए गए ये 7 मुद्दे तो नहीं बने कारण

कभी आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल का करीबी विश्वासपात्र रहे राघव चड्ढा अब खुद को घिरा हुआ पा रहे हैं। पार्टी के दिल्ली तथा पंजाब मामलों में एक अहम हस्ती माने जाने वाले चड्ढा सवाल कर रहे हैं कि क्या मैंने कोई अपराध किया है? चड्ढा ने कहा कि उन्हें चुप करा दिया गया है।

Sat, 4 April 2026 12:40 PMSubodh Kumar Mishra लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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राघव चड्ढा क्यों पार्टी के निशाने पर आ गए, कहीं संसद में उठाए गए ये 7 मुद्दे तो नहीं बने कारण

कभी आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल का करीबी विश्वासपात्र रहे राघव चड्ढा अब खुद को घिरा हुआ पा रहे हैं। पार्टी के दिल्ली तथा पंजाब मामलों में एक अहम हस्ती माने जाने वाले चड्ढा सवाल कर रहे हैं कि क्या मैंने कोई अपराध किया है? राज्यसभा के उपनेता पद से हटाए जाने के तुरंत बाद चड्ढा ने कहा कि उन्हें चुप करा दिया गया है, क्योंकि वे लगातार ऐसे मुद्दे उठाते रहे हैं जो सीधे तौर पर लोगों के रोजमर्रा के जीवन को प्रभावित करते हैं।

हालांकि, आप नेतृत्व ने इसका कड़ा विरोध किया है और उन पर आरोप लगाया है कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डर के कारण संसद में तीखे राजनीतिक मुद्दे नहीं उठा रहे थे। पार्टी के दिल्ली इकाई के प्रमुख सौरभ भारद्वाज ने चड्ढा की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार का उतनी मजबूती से सामना नहीं किया, जितना उन्हें करना चाहिए था।

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आइए, लोगों से जुड़े उन मुद्दों पर एक नजर डालते हैं जिन्हें राघव चड्ढा ने हाल ही में संसद में उठाया है।

पितृत्व अवकाश और देखभाल की जिम्मेदारी

हाल ही में संसद में चड्ढा ने जिन मुद्दों को उठाया, उनमें से एक था पितृत्व अवकाश को कानूनी मान्यता देने की जरूरत। उन्होंने कहा कि मैंने संसद में यह मांग की कि भारत में पितृत्व अवकाश एक कानूनी अधिकार होना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि देखभाल की जिम्मेदारी सिर्फ महिलाओं पर ही नहीं पड़नी चाहिए। एक पिता को अपने नवजात बच्चे की देखभाल करने और अपनी नौकरी बचाने के बीच किसी एक को चुनने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए। और एक मां को बच्चे को जन्म देने और उसके बाद ठीक होने की प्रक्रिया से अपने पति के सहारे के बिना नहीं गुजरना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देखभाल एक साझा जिम्मेदारी है और कानूनों में इस सच्चाई की झलक जरूर मिलनी चाहिए।

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मेट्रो शहरों में ट्रैफिक संकट

चड्ढा ने बड़े शहरों में बिगड़ते ट्रैफिक जाम पर भी चिंता जताई। बेंगलुरु, मुंबई, दिल्ली और चेन्नई जैसे शहरों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ट्रैफिक ने हमारे मेट्रो शहरों को एक विशाल पार्किंग लॉट में बदल दिया है, जिसमें लोग फंसे हुए हैं। उन्होंने कहा कि देश के इन हिस्सों में सफर करने वाले लोग हर साल 100 से 168 घंटे ट्रैफिक में फंसे रहते हैं। हर बीता हुआ घंटा ऐसा है जिसे भारत कभी वापस नहीं पा सकता। साथ ही उन्होंने बेहतर सार्वजनिक परिवहन, ज्यादा स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम और एक वैज्ञानिक पार्किंग नीति के साथ राष्ट्रीय शहरी भीड़-भाड़ कम करने वाले मिशन की जरूरत पर जोर दिया।

28 दिन का मासिक रिचार्ज

चड्ढा के उठाए गए मुद्दों का एक बड़ा हिस्सा टेलीकॉम से जुड़ी नियमों पर केंद्रित था। खासकर प्रीपेड यूजर्स के मामले में। उन्होंने कहा कि टेलीकॉम कंपनियां डेली डेटा लिमिट वाले रिचार्ज प्लान देती हैं। कोई भी बिना इस्तेमाल किया हुआ डेटा आधी रात को खत्म हो जाता है, भले ही उसके लिए पूरा पेमेंट किया गया हो। आपसे 2GB डेटा का बिल लिया जाता है। दिन खत्म होते ही बचा हुआ 0.5GB डेटा गायब हो जाता है। कोई रिफंड नहीं। कोई रोलओवर नहीं। बस खत्म। यह कोई गलती नहीं है। यह एक पॉलिसी है। उन्होंने सवाल उठाया कि पेमेंट किए गए डेटा को क्यों जब्त किया जाना चाहिए। मांग की कि बिना इस्तेमाल किए हुए डेटा को आगे बढ़ाया जाए।

आप नेता ने एक और मुद्दे को भी उठाया, जिसे उन्होंने 28 दिनों वाला मासिक रिचार्ज घोटाला कहा। उन्होंने कहा कि टेलीकॉम कंपनियां अपने प्लान को मासिक कहती हैं, लेकिन वे सिर्फ 28 दिनों तक ही चलते हैं। उन्होंने बताया कि इस तरह यूजर्स असल में साल में 13 रिचार्ज के पैसे देते हैं। उन्होंने कंपनियों से आग्रह किया कि वे अपने प्लान को 30-31 दिनों के साइकल के हिसाब से बनाएं।

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मासिक धर्म से जुड़ी सेहत और गरिमा

सामाजिक मुद्दों पर बात करते हुए चड्ढा ने मासिक धर्म से जुड़ी सेहत के इंफ्रास्ट्रक्चर में मौजूद कमियों को उजागर किया। उन्होंने कहा कि जब कोई लड़की स्कूल नहीं जा पाती क्योंकि वहां पैड, पानी, कूड़ेदान और प्राइवेसी की कोई सुविधा नहीं होती तो यह उसकी निजी समस्या नहीं होती। यह हमारे सिस्टम की नाकामी है। मासिक धर्म से जुड़ी सेहत कोई एहसान नहीं है। यह सेहत, शिक्षा, समानता और गरिमा का मामला है। महिलाओं को सहानुभूति की जरूरत नहीं है। महिलाओं को अधिकारों की जरूरत है।

एयरपोर्ट पर मिलने वाला खाना

आप नेताओं ने चड्ढा से केंद्र सरकार के खिलाफ उनकी चुप्पी पर सवाल उठाते हुए 'समोसा' शब्द का इस्तेमाल किया। आप नेता एयरपोर्ट पर मिलने वाले महंगे खाने को लेकर राघव चड्ढा द्वारा पहले उठाए गए सवालों का जिक्र कर रहे थे। चड्ढा ने बजट सत्र में सरकार की 'उड़ान यात्री कैफे' पहल का स्वागत करते हुए कहा कि हवाई यात्रियों ने लंबे समय से हवाई अड्डों पर खाने की ज्यादा कीमतों की शिकायत की है।

उन्होंने कहा कि हवाई अड्डों पर किफायती खाना कोई विलासिता नहीं होनी चाहिए। यह यात्रियों के लिए एक बुनियादी सुविधा है। कुछ दिनों बाद नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने 'उड़ान यात्री कैफे' के विस्तार की घोषणा की। 30 मार्च को चड्ढा ने एक वीडियो शेयर किया जिसमें वह मुंबई एयरपोर्ट पर 'उड़ान यात्री कैफे' में गए और सिर्फ 10 रुपए में चाय पी। उन्होंने कहा कि मैं दिल्ली जा रहा था और फ़्लाइट से पहले चाय पीना चाहता था। वहां रहते हुए मैंने कई यात्रियों से बात की। वे सभी खुश थे। सभी एक ही बात कह रहे थे कि जेब पर भारी नहीं, अच्छी सर्विस और पैसे की पूरी कीमत।

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वापस बुलाने का अधिकार और राजनीतिक जवाबदेही

एक बड़े राजनीतिक सुधार के प्रस्ताव के तौर पर चड्ढा ने जनप्रतिनिधियों को वापस बुलाने के अधिकार की वकालत की। उन्होंने कहा कि अगर वोटर किसी नेता को चुन सकते हैं तो उन्हें उस नेता को हटाने का भी अधिकार होना चाहिए। यह तर्क देते हुए कि जवाबदेही के लिए पांच साल का इंतजार बहुत लंबा है। उन्होंने बताया कि कई लोकतंत्रों में पहले से ही 'रिकॉल' के तरीके मौजूद हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इनके गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए सुरक्षा उपायों की जरूरत होगी।

गिग वर्कर और जमीनी हकीकत

चड्ढा ने कई मौकों पर गिग इकॉनमी में काम करने वालों के बारे में भी बात की और सही मजदूरी, काम के लिए सही समय और बुनियादी सुरक्षा उपायों पर जोर दिया। उन्होंने तो एक डिलीवरी वर्कर के साथ पूरा एक दिन बिताया ताकि उनकी मुश्किलों को समझा जा सके। उन्होंने बेहतर वेतन और सुविधाओं की मांगों का समर्थन किया और 10 मिनट में डिलीवरी के दबाव को खत्म करने की अपील की।

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