टैक्स बचाना है तो शादी कर लो! संसद में राघव चड्ढा ने दिया जॉइंट ITR वाला फॉर्मूला
दरअसल उन्होंने टैक्स बचाना है तो शादी कर लो जैसी बात के पीछे जॉइंट ITR वाला फॉर्मूला दिया है। उन्होंने बताया- इस सिस्टम में अगर पति-पत्नी दोनों कमाते हैं तो उन्हें अलग-अलग टैक्स देने और रिबेट लेने की जरूरत नहीं होगी। जानिए कैसे?

‘टैक्स बचाना है तो शादी कर लो…' आप सांसद राघव चड्डा ने संसद में ऐसा क्या फॉर्मूला दे दिया कि उन्होंने हंसते-हंसते’ ऐसी बात कह डाली। दरअसल उन्होंने "जॉइंट ITR" वाला फॉर्मूला सदन में रखा, जिसके तहत उन्होंने बताया- इस सिस्टम में अगर पति-पत्नी दोनों कमाते हैं तो उन्हें अलग-अलग टैक्स देने और रिबेट लेने की जरूरत नहीं होगी। बल्किइसके जरिए दोनों लोगों की सेविंग और रिबेट को मिलाया जाएगा, तो ऐसे परिवार को टैक्स से बड़ी राहत मिल सकती है। उन्होंने अपनी बात को 3 उदाहरणों के जरिए समझाया।
पति-पत्नी के खर्चे-निवेश एक, लेकिन ITR अलग
राघव चड्डा ने बताया- मौजूदा समय में भारत अलग-अलग (व्यक्तिगत) टैक्स वसूला जाता है। इसके चलते शादीशुदा पति-पत्नी भी अलग-अलग टैक्स भरते हैं और इनकम टैक्स रिटर्न को फाइल करते हैं। उनकी इनकम को मिलाया नहीं जाता है। जबकि दोनों के लंबे समय में होने वाले निवेश एक ही हैं। घर में होने वाले उनके खर्चे एक ही हैं। बच्चों की परवरिश से लेकर कई तरह के खर्चे एक ही हैं।
दुनिया के कई देश पति-पत्नी को मानते इकॉनोमिक यूनिट
चड्डा ने सदन को बताया- दुनिया के कई देशों में पति-पत्नी को एक इकॉनोमिक यूनिट की तरह माना गया है और इनकम टैक्स को एक साथ फाइल करने का प्रावधान रखा गया है। भारत में पति-पत्नी खर्चे तो एक साथ वहन करते हैं, लेकिन जब इनकम टैक्स भरने की बात आती है, तो उन्हें अपरिचित करार दे दिया जाता है। सांसद ने अपनी बात को 3 उदाहरण के जरिए समझाया।
समान इनकम वाले परिवार अलग-अलग टैक्स भरते
मान लीजिए 2 परिवार एक ही शहर में रहते हैं और एक ही कंपनी में नौकरी करते हैं। एक परिवार 20 लाख कमाता है, दूसरा परिवार भी 20 लाख रुपये कमाता है। दोनों की कमाई समान है, लेकिन इनकम टैक्स रिटर्न अलग-अलग फाइल करते हैं। आगे समझिए कैसे।
पहला उदाहरण- एक परिवार राहुल और रिचा का है। दोनों साल के 10-10 लाख कमाते हैं। इनकम हुई 20 लाख रुपये। अब दोनों की व्यक्तिगत आमदनी 12-12 लाख से कम है, इसलिए रिबेट के कारण दोनों को कोई इनकम टैक्स नहीं देना पड़ता।
दूसरा उदाहरण- दूसरा परिवार नमन और निशा का है। नमन साल का 20 लाख कमाते हैं। निशा ने अपनी नौकरी बच्चों का ध्यान रखने और सास-ससुर की देखभाल के लिए छोड़ दी है। अब इनकी भी फैमिली इनकम 20 लाख है, लेकिन मामला व्यक्तिगत होने के कारण इनको 192400 रुपये टैक्स भरना पड़ता है।
ITR की ज्वाइंट फाइलिंग से लोगों को होगा लाभ
दोनों उदाहरण रखने के बाद राघव चड्डा ने कहा- अगर इनकम टैक्स की जॉइंट फाइलिंग होगी, तो इन शादीशुदा लोगों को ज्यादा लाभ मिल सकेगा। इसके लिए उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया- एक शादीशुदा कपल है। पति-पत्नी दोनों कमाते हैं। अपने खर्चे भी शेयर करते हैं। पति साल का 18 लाख कमाता और पत्नी 6 लाख। इस तरह कुल इनकम 24 लाख होती है। अब जब इनकम टैक्स भरने की बात आती है, तो पति इनकम टैक्स के हिसाब से करीब 150000 रुपये टैक्स भरता है और पत्नी शून्य। मतलब परिवार को कुल 1 लाख 50 हजार रुपये टैक्स देने होते हैं।
इनकम के साथ रिबेट भी जुड़ने से होगा फायदा
राघव चड्डा ने हाइपोथिटिकल सिचुएशन को समझाते हुए कहा- अगर इनकी इनकम और रिबेट को मिला दिया जाए, तो इनकी कुल आमदनी 24 लाख रुपये और रिबेट भी 24 लाख रुपये होगा, तो दोनों को घटाने पर इनकम टैक्स शून्य हो जाएगा। इसलिए मैं प्रस्ताव रखता हूं कि भारत में इनकम टैक्स फाइल करने का ज्वाइंट सिस्टम लाया जाए।




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