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10 मिनट में डिलिवरी नहीं, इंसानी गरिमा जरूरी: गिग वर्कर्स के समर्थन में राघव चड्ढा

आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने गिग कर्मचारियों के हक में एकबार फिर आवाज बुलंद करते कहा है कि 10 मिनट में डिलिवरी का जश्न मनाने की जगह इंसानी गरिमा जरूरी है। उन्होंने गिग कर्मचारियों के मुद्दे को लेकर एक्स पर एक लंबी पोस्ट लिखी है।

Sat, 3 Jan 2026 09:25 PMKrishna Bihari Singh लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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10 मिनट में डिलिवरी नहीं, इंसानी गरिमा जरूरी: गिग वर्कर्स के समर्थन में राघव चड्ढा

आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने गिग कर्मचारियों के हक में एकबार फिर आवाज बुलंद की है। उनका कहना है कि 10 मिनट में डिलिवरी का जश्न मनाने की जगह इंसानी गरिमा और सुरक्षा जरूरी है। उन्होंने गिग कर्मचारियों के मुद्दे को लेकर एक्स पर एक लंबी पोस्ट लिखी है। दरअसल, बेहतर काम की परिस्थितियों और मेहनताने में सुधार की मांग को लेकर गिग कर्मचारियों एक समूह ने बीते दिनों हड़ताल की थी। वहीं ई-कॉमर्स और ऑनलाइन ऑर्डर फूड की डिलिवरी करने वाले प्लेटफॉर्मों का कहना था कि हड़ताल से उनके कामकाज पर कोई खास असर नहीं पड़ा लेकिन हड़ताल और सियासी हस्तियों की बयानबाजी ने मुद्दे को गरमा दिया। AAP के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा गिग कर्मचारियों के हक में आवाज बुलंद करते नजर आए थे। उन्होंने ऑनलाइन फूड डिलिवरी कंपनियों पर हमला बोला था। वहीं राघव चड्ढा पर भी पलटवार हुआ था जो चर्चा का विषय बन गया था। आइए जानें राघव चड्ढा ने अब एक्स पर अपनी लंबी पोस्ट में क्या बातें कही हैं।

मजदूरों की मांग की अनदेखी खतरनाक

राघव चड्ढा ने लिखा है- देश के विभिन्न हिस्सों में डिलीवरी पार्टनर्स यानी गिग कर्मचारियों ने बुनियादी सम्मान, उचित वेतन, नियमों और सामाजिक सुरक्षा दिए जाने की मांग को लेकर हड़ताल की। वहीं ई-कॉमर्स और ऑनलाइन ऑर्डर फूड डिलिवरी करने वाले प्लेटफॉर्मों यानी ऑनलाइन फूड डिलिवरी कंपनियों ने उनको उपद्रवी और बदमाश बता दिया। इतना ही नहीं उनकी ओर से मजदूरों की मांग को कानून व्यवस्था का मामला बता देना न केवल अपमानजनक है वरन खतरनाक भी है। उचित वेतन की मांग करने वाले मजदूर अपराधी नहीं हैं।

तो ये हेलमेट पहने कर्मचारी नहीं, बंधक हैं

राघव चड्ढा ने ऑनलाइन ऑर्डर फूड डिलिवरी कंपनियों पर हमला बोलते हुए कहा कि यदि आपके सिस्टम को सबसे बड़े दिन भी सुचारू रूप से चलाने के लिए पुलिस की जरूरत पड़ रही है तो यह सिस्टम की सफलता नहीं है। यह इस बात का प्रमाण है कि सिस्टम ठीक से काम नहीं कर रहा है। यदि आपको अपने मजदूरों को सड़क पर रखने के लिए पुलिस की जरूरत पड़ रही है तो जाहिर है कि ये लोग हेलमेट पहने आपके कर्मचारी नहीं हैं। ये लोग (गिग वर्कर) हेलमेट पहने बंधक हैं। मुझे खुशी है कि संसद में मेरी से मुद्दा उठाए जाने के कारण देश भर में एक बहस शुरू हो गई है।

मजदूरों का आखिरी कतरा निचोड़कर नहीं हासिल की जा सकती सफलता

राघव चड्ढा ने कहा कि मैं साफ कर देना चाहता हूं कि मैं बिजनेस के साथ स्टार्टअप्स का भी हिमायती हूं। मैंने हमेशा ही इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप का समर्थन किया है। आज देश को कारोबारियों की जरूरत है। खास तौर पर रिस्क लेने वालों की जरूरत है और मैं ऐसे लोगों और इंडस्ट्री के साथ हूं लेकिन शोषण का कभी समर्थन नहीं करूंगा। सफलता मजदूरों का आखिरी कतरा निचोड़कर हासिल नहीं की जा सकती है। अब उचित वेतन की मांग करने को को भी 'राजनीति' बताया जा रहा है।

तब तो जमींदारी और बंधुआ मजदूरी भी उचित

AAP सांसद ने आगे कहा कि अजीब बात है कि जैसे ही कोई चीज मुनाफे या कीमतों पर असर डालती है वह 'पॉलिटिकल एजेंडा' बन जाती है। कुछ लोग दलील देते हैं कि सिस्टम गड़बड़ है। सवाल कि यदि सिस्टम गलत है तो इसमें इतने लोग काम क्यों कर रहे हैं? ऐसी दलील से तो जमींदारी और बंधुआ मजदूरी भी उचित ही थी जो सदियों तक चली। बंधुआ मजदूरी को सही ठहराया जाता था क्योंकि लोग सुलभ थे। इतिहास में हर शोषण वाले सिस्टम ने यही दलील दी। जब एक दिन की कमाई से किराया, बिजली या बच्चे की स्कूल फीस तय होती है तो हड़ताल के दिन काम पर जाना मजबूरी है। इसे पसंद नहीं कह सकते हैं।

सपने मत दिखाओ

राघव चड्ढा ने आगे कहा कि देश में रोजगार का बेहतर विकल्प नहीं होने पर ही लोग फंस जाते हैं। कृपया मौजूदा अन्याय और शोषण को सही ठहराने के लिए लोगों को भविष्य के सपने मत दिखाओ। यह वादा करना कि मजदूरों के बच्चे एक दिन बेहतर करेंगे मौजूदा शोषण का जवाब नहीं है। रिकॉर्ड ऑर्डर मिलना व्यापार का पैमाना हो सकता है। यह नैतिकता का पैमाना नहीं हो सकता है।

इंसानी गरिमा जरूरी

आम आदमी पार्टी के सांसद का कहना है कि 10 मिनट में डिलिवरी का जश्न मनाने की जगह इंसानी गरिमा जरूरी है। उन्होंने आगे लिखा- जब 10 मिनट की डिलीवरी का जश्न मनाया जाता है तो हमें पूछना चाहिए कि इसकी कीमत कौन चुका रहा है। यह सड़क सुरक्षा के लिए भी खतरा है क्योंकि तेज गति के दबाव में गिग वर्कर अपनी जान को जोखिम में डालने के साथ ही पैदल चलने वाले की जान भी जोखिम डालते हैं। तकनीक लॉजिस्टिक्स को बेहतर बना सकती है लेकिन यह पारदर्शिता, सुरक्षा और सही प्रोसेस की जगह नहीं ले सकती है।

मजदूरों को बदमाश ना कहें

एक ऐसा सिस्टम जहां वेतन का फॉर्मूला किसी को पता न हो, जहां बारिश या ट्रैफिक के लिए मजदूर को सजा दी जाए। इतना ही नहीं जहां बिना किसी सुनवाई के रोजी-रोटी छीन ली जाए। यह फ्लेक्सिबिलिटी नहीं है। यह बिना जवाबदेही के कंट्रोल है। यदि किसी ने कानून तोड़ा है तो उस पर कार्रवाई करें लेकिन कुछ घटनाओं के कारण मजदूरों को बदमाश ना कहें। सही सैलरी और सम्मान की जायज मांग को कुचला नहीं जाना चाहिए। सवाल पूछने वालों की बेइज्जती करके सवालों को चुप कराना लीडरशिप नहीं है। आलोचना का जवाब सुधार और जवाबदेही है।

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मेरी नहीं गिग कर्मियों की लाइफस्टाइल पर दें ध्यान

राघव चड्डा का कहना है कि वह इतनी लंबी पोस्ट नहीं लिखना चाहते थे लेकिन गिर वर्करों की मांग के विरोध में सुनियोजित शोर मचाया गया। उन्होंने कहा- यह दुखद है कि पीआर एजेंसियों और इन्फ्लुएंसर्स तक को पैसे दिए गए। हैशटैग भी खरीदे गए लेकिन ऑर्डर पहुंचाने वाले (गिग वर्कर) अब भी उचित भुगतान का इंतजार कर रहे हैं। उनके पास जब दलीलें खत्म हो गई तब मेरे परिवार और मेरी लाइफस्टाइल पर हमले किए गए। मेरी गुजारिश है कि मेरी लाइफस्टाइल पर बहस करके समय बर्बाद ना करें। गिग कर्मचारियों की लाइफस्टाइल को बेहतर बनाने पर ध्यान दें। मैं अपनी पोजीशन का इस्तेमाल इन मांगों को उठाने के लिए करूंगा। हमारा फर्ज है कि जिन्हें कम दिया गया है उनके लिए आवाज उठाई जाए।

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