कहां गायब हुआ रवि काना, UP के 12 जिलों में पुलिस तलाश रही ठिकाना
बांदा जेल से निकलकर गायब हुए स्क्रैप माफिया रवि काना की तलाश में पुलिस की पांच टीमें यूपी के 12 जिलों में दबिश दे रही हैं। माफिया के पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कहीं छिपे होने या नेपाल के रास्ते विदेश भागने की आशंका जताई जा रही।

बांदा जेल से निकलकर गायब हुए स्क्रैप माफिया रवि काना की तलाश में पुलिस की पांच टीमें यूपी के 12 जिलों में दबिश दे रही हैं। माफिया के पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कहीं छिपे होने या नेपाल के रास्ते विदेश भागने की आशंका जताई जा रही। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, गौतमबुद्ध नगर की अदालत से बी-वारंट जारी होने के बावजूद स्क्रैप माफिया रवि काना को गुरुवार को बांदा जेल से रिहा कर दिया गया था। इस पर अदालत ने शुक्रवार को गहरी नाराजगी जताते हुए जिला कारागार बांदा के जेल अधीक्षक से स्पष्टीकरण तलब किया था।
मामला नोएडा के सेक्टर-63 थाने में इसी वर्ष आरोपी रविन्द्र सिंह उर्फ रवि नागर उर्फ रवि काना के खिलाफ उगाही के मामले में दर्ज केस से जुड़ा है। जेल से बाहर आने के बाद रवि काना कहां गया, इसकी किसी को भनक तक नहीं है। न्यायालय ने उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया हुआ है। रवि काना के करीबियों और गिरोह के पुराने सदस्यों पर भी पुलिस की नजर है। पुलिस अधिकारी उसे जल्द गिरफ्तार कर लेने का दावा कर रहे।
पुलिस कमिश्नरेट गौतमबुद्ध नगर रवि काना की पिछले दो वर्षों में 92.65 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति जब्त और कुर्क कर चुकी है। पुलिस के अनुसार रवि काना एक संगठित अपराधी गिरोह का सरगना है, जिसका गैंग नंबर डी-190 है। इस गैंग में कुल 18 सदस्य हैं। रवि काना और उसके गैंग के खिलाफ गौतमबुद्ध नगर समेत एनसीआर के कई जिलों में गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह अवैध तरीके से स्क्रैप और सरिया के कारोबार से जुड़ा था। गैंग के सदस्य स्क्रैप और सरिया कारोबारियों को डराने-धमकाने, चोरी और लूट जैसी वारदातों को अंजाम देते थे। इन अपराधों के जरिए अवैध रूप से भारी मात्रा में संपत्ति अर्जित की गई, जिसे रवि काना, उसके परिवार के सदस्यों और सहयोगियों के नाम पर बेनामी रूप से दर्ज कराया गया।
गैंग लीडर के नाम पर कई कंपनी
रवि काना और उसके परिजनों के नाम पर मैसर्स प्राइम प्रेसिंग टूल्स प्राइवेट लिमिटेड, न्यू कृष्णा स्टील, एस्कोन एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड, हनुमत मैटल प्राइवेट लिमिटेड, अकीरा स्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड और जेएसआर रोड लाइन्स जैसी कंपनियां दर्ज हैं। कुर्क की गई संपत्तियों में दर्जनों व्यावसायिक वाहन, बैंक खातों में जमा रकम, औद्योगिक भूखंड और जमीन शामिल हैं। बुलंदशहर के सिकंदराबाद में स्थित करीब 18 हजार वर्गमीटर जमीन, ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर स्थित इंडस्ट्रियल एरिया के प्लॉट, कई ट्रक और अन्य वाहन पुलिस ने जब्त किए। रवि काना के खिलाफ अलग-अलग थानों में हत्या, लूट, धोखाधड़ी, गैंगस्टर एक्ट, रंगदारी और अन्य गंभीर धाराओं में कुल 29 मुकदमे दर्ज हैं, जबकि उसके गैंग के 18 सदस्यों पर 131 मुकदमे पंजीकृत हैं।
आदेश के बिना आरोपी को मुक्त करना गलत
कानून के जानकारों का कहना है कि बीएनएसएस के तहत कोर्ट के द्वारा दिया गया कोई भी वारंट तब तक प्रभावी रहता है, जब तक न्यायालय उसे निरस्त या निष्पादित न करे। जेल प्रशासन को वारंट को निष्प्रभावी मानने का कोई अधिकार नहीं है। आरोपी की प्रस्तुति के पश्चात न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बिना उसको मुक्त करना अवैध है। उत्तर प्रदेश जेल नियमावली के मुताबिक किसी भी बंदी की रिहाई केवल न्यायालय के लिखित आदेश पर ही संभव है। आदेश में विलंब या मौन, रिहाई का आधार नहीं हो सकता।
पौने दो साल पहले विदेश से भारत लाया गया
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार रवि काना ने एक मामले में अग्रिम जमानत लेते समय न्यायालय की शर्तों का उल्लंघन किया। पासपोर्ट जमा न कराते हुए वह एक जनवरी 2024 को विदेश फरार हो गया। इसके बाद उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया और 24 अप्रैल 2024 को भारत लाकर उसे दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। पुलिस ने साफ कहा है कि माफिया और संगठित अपराधियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी।
जेलर पर पहले भी कार्रवाई हो चुकी
बांदा जिला कारागार के निलंबित जेलर विक्रम सिंह यादव का विवादों से पुराना नाता रहा है। इससे पहले भी उन पर निलंबन की कार्रवाई हो चुकी है। दिसंबर 2024 में मुरादाबाद में जनपद संभल में हुए बवाल के आरोपियों से 15 से ज्यादा सपा नेताओं को मिलवाने पर कार्रवाई की गई थी। मुरादाबाद में जेलर रहते हुए उन्होंने जिला जेल में बंद संभल बवाल के आरोपियों से सपा जनप्रतिनिधियों की मुलाकात करवाई थी। इस पर जेल प्रशासन ने जेलर विक्रम सिंह यादव को सस्पेंड कर दिया था।




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