पुलिस की गलती से गायब हुआ माफिया रवि काना, जेल से छूट विदेश भागने की आशंका; अदालत सख्त
बांदा जेल से रिहा होते ही स्क्रैप माफिया रवि काना गायब हो गया। उसके विदेश भागने की आशंका जताई जा रही। दूसरी ओर, नोएडा में दर्ज वसूली के मामले में बी-वारंट के बावजूद स्क्रैप माफिया को बांदा जेल से रिहा किए जाने पर अदालत ने शुक्रवार को सख्त नाराजगी जताई।

बांदा जेल से रिहा होते ही स्क्रैप माफिया रवि काना गायब हो गया। उसके विदेश भागने की आशंका जताई जा रही। दूसरी ओर, नोएडा में दर्ज वसूली के मामले में बी-वारंट के बावजूद स्क्रैप माफिया को बांदा जेल से रिहा किए जाने पर अदालत ने शुक्रवार को सख्त नाराजगी जताई। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट गौतमबुद्ध नगर की अदालत ने गंभीर लापरवाही मानते हुए बांदा के जेल अधीक्षक से छह फरवरी तक शपथपत्र देकर जवाब दाखिल करने को कहा है। अदालत ने कहा कि क्यों ना आपके खिलाफ अभियुक्त को हिरासत से भगाने का मुकदमा चलाया जाए।
स्क्रैप माफिया रविन्द्र सिंह उर्फ रवि नागर उर्फ रवि काना के खिलाफ उगाही के मामले में तीन धाराओं में इसी वर्ष जनवरी में सेक्टर-63 थाने में मामला दर्ज किया गया था। वह पहले से ही अन्य मुकदमे में जिला कारागार बांदा में बंद था। इसी दौरान नोएडा पुलिस ने अदालत में पेश कराने के लिए बी-वारंट जारी कराया।
गंभीर प्रशासनिक चूक
अदालत ने आदेश में साफ कहा है कि जेल प्रशासन को यह जानकारी थी कि आरोपी नोएडा के केस में बी-वारंट पर तलब किया गया है। इसके बावजूद उसे किन परिस्थितियों और किस आधार पर रिहा किया गया, यह समझ से परे है। अदालत का कहना है कि जब आरोपी की रिमांड की कार्यवाही चल रही थी और न्यायालय से कोई स्पष्ट रिहाई आदेश नहीं आया, तब जेल से छोड़ा जाना गंभीर प्रशासनिक चूक मानी जा सकती है।
‘रिहाई के बाद आदेश आया’
बांदा जेल अधीक्षक अनिल कुमार गौतम ने कहा कि बी-वारंट के तहत 29 जनवरी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से रवि काना को कोर्ट के सामने पेश कराया। कस्टडी को लेकर कोई आदेश नहीं आया तो उसे रिहा कर दिया गया। रिहाई के बाद आदेश मिला।
बी वारंट का मतलब
बी-वारंट का मतलब होता है कि आरोपी को हर हाल में अदालत के सामने पेश किया जाए। बी-वारंट की स्थिति में आरोपी को अदालत से स्पष्ट आदेश मिलने के बाद ही रिहाई मिल सकती है।
6:39 पर रिहा हुआ, पौने आठ बजे वारंट आया : जेल अधीक्षक
बांदा जेल अधीक्षक अनिल कुमार गौतम ने इस संबंध में कहा कि रवि काना वर्ष 2024 में गौतमबुद्ध नगर से प्रशासनिक आधार पर स्थानांतरित होकर मंडल कारागार बांदा आया था। इस पर पाक्सो, गैंगस्टर समेत 20 मामले थे। इसके सारे मामलों की रिहाई आ चुकी थी। सिर्फ एक मामला बचा था। इसकी रिहाई अंतिम रूप से 28 जनवरी को सुबह 7.15 बजे प्राप्त हो गई थी। दूसरे जिले का मामला होने के चलते माननीय न्यायालय को मैंने रेडियोग्राम कन्फर्मेशन के लिए भेज दिया। इसी दौरान उसका एक बी-वारंट आ गया। बी-वारंट के तहत 29 जनवरी को हमने वीसी (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग) के माध्यम से उसे न्यायालय के सामने पेश कराया। न्यायालय ने कस्टडी में लेने या नहीं लेने को लेकर कोई निर्देश नहीं दिए। हम लोगों ने शाम 6:30 बजे तक इंतजार किया। जब कोई आदेश नहीं आया तो 6:39 पर रवि काना की रिहाई कर दी गई। फिर रात पौने आठ बजे उसका कस्टडी वारंट आदेश मेल पर प्राप्त हुआ कि दोबारा दो फरवरी को पेश करना है। वह एक बार जेल से निकल गया तो कैसे वापस लाते। अगर हम उसे रोकते तो वह हमारे खिलाफ हाईकोर्ट चला जाता कि आपने मुझे किस आधार पर रोका। न्यायालय ने इस मामले को लेकर मुझसे जवाब मांगा है। जवाब बनाकर भेजा जा रहा है।




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