नोएडा के स्क्रैप माफिया रवि काना रिहाई मामला, बांदा जेल के जेलर विक्रम सिंह यादव सस्पेंड
उत्तर प्रदेश की बांदा जेल से रिहा होते ही नोएडा का स्क्रैप माफिया रवि काना गायब हो गया। वहीं नोएडा में दर्ज वसूली के मामले में बी-वारंट के बावजूद स्क्रैप माफिया को बांदा जेल से रिहा किए जाने पर अदालत ने शुक्रवार को सख्त नाराजगी जताई थी।

उत्तर प्रदेश की बांदा जेल से रिहा होते ही नोएडा का स्क्रैप माफिया रवि काना गायब हो गया। वहीं नोएडा में दर्ज वसूली के मामले में बी-वारंट के बावजूद स्क्रैप माफिया को बांदा जेल से रिहा किए जाने पर अदालत ने शुक्रवार को सख्त नाराजगी जताई थी। इसके बाद उत्तर प्रदेश कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं मुख्यालय ने बांदा जेल में तैनात जेलर विक्रम सिंह यादव को सस्पेंड कर दिया है। यह कार्रवाई 30 जनवरी 2026 को जारी आदेश के तहत की गई है।
आदेश के मुताबिक, विचाराधीन बंदी रविंद्र सिंह उर्फ रवि नागर उर्फ रवि काना, जो थाना सेक्टर-63 नोएडा के एक गंभीर आपराधिक मामले में वॉन्टेड था, उसे जिला कारागार बांदा से रिहा कर दिया गया। इस मामले में जेलर विक्रम सिंह यादव की भूमिका संदिग्ध पाई गई।
जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा
प्रारंभिक जांच में यह माना गया कि उन्होंने अपने कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही बरती है, जो उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक आचरण नियमावली के विपरीत है। इसी आधार पर शासन ने उन्हें तत्काल प्रभाव से सस्पेंड करते हुए विभागीय कार्रवाई प्रस्तावित की है। सस्पेंड रहने की अवधि में विक्रम सिंह यादव को जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा, लेकिन वे किसी अन्य सेवा, व्यवसाय या निजी कार्य में संलग्न नहीं हो सकेंगे।
क्या है मामला
गौरतलब है कि स्क्रैप माफिया रविन्द्र सिंह उर्फ रवि नागर उर्फ रवि काना के खिलाफ उगाही के मामले में तीन धाराओं में इसी वर्ष जनवरी में सेक्टर-63 थाने में मामला दर्ज किया गया था। वह पहले से ही अन्य मुकदमे में जिला कारागार बांदा में बंद था। इसी दौरान नोएडा पुलिस ने अदालत में पेश कराने के लिए बी-वारंट जारी कराया।
‘रिहाई के बाद आदेश आया’
बांदा जेल अधीक्षक अनिल कुमार गौतम ने कहा कि बी-वारंट के तहत 29 जनवरी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से रवि काना को कोर्ट के सामने पेश कराया। कस्टडी को लेकर कोई आदेश नहीं आया तो उसे रिहा कर दिया गया। रिहाई के बाद आदेश मिला।
बी वारंट का मतलब
बी-वारंट का मतलब होता है कि आरोपी को हर हाल में अदालत के सामने पेश किया जाए। बी-वारंट की स्थिति में आरोपी को अदालत से स्पष्ट आदेश मिलने के बाद ही रिहाई मिल सकती है।




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