If people are not affected by illegal construction, do not come to court says Delhi High Court अवैध निर्माण से प्रभावित नहीं तो अदालत न आएं, दिल्ली हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, Ncr Hindi News - Hindustan
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अवैध निर्माण से प्रभावित नहीं तो अदालत न आएं, दिल्ली हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

दिल्ली हाईकोर्ट ने बिना वजह याचिकाएं दायर करने पर चिंता जाहिर की है। हाईकोर्ट ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता किसी अवैध या गैरकानूनी निर्माण से सीधे तौर पर प्रभावित नहीं है तो वह इस तरह की याचिका दायर करने का अधिकार नहीं रखता।

Fri, 2 Jan 2026 05:59 AMPraveen Sharma हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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अवैध निर्माण से प्रभावित नहीं तो अदालत न आएं, दिल्ली हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

दिल्ली हाईकोर्ट ने बिना वजह याचिकाएं दायर करने पर चिंता जाहिर की है। हाईकोर्ट ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता किसी अवैध या गैरकानूनी निर्माण से सीधे तौर पर प्रभावित नहीं है तो वह इस तरह की याचिका दायर करने का अधिकार नहीं रखता।

जस्टिस मिनी पुष्करणा की बेंच ने कहा कि लोगों में दूसरों की जिंदगी में बेमतलब मुश्किलें खड़ी करने की फितरत बढ़ रही है। इसी का नतीजा है कि फिजूल के मुकदमे अदालत पहुंच रहे हैं। हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी एक व्यक्ति की गैरकानूनी तरीके से निर्माण को ढहाने की याचिका को खारिज करते हुए की। बेंच ने अपने फैसले में कहा कि याचिकाकर्ता न तो संबंधित संपत्ति में रहता है और न ही वह इस संपत्ति के पड़ोस में निवास करता है। फिर उसे इस निर्माण कार्य में हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है। बगैर प्रभावित व्यक्ति को अदालत का समय बर्बाद करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। बेंच ने इस मामले में याचिकाकर्ता पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।

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एमसीडी व पुलिस ने की जांच : इस मामले में याचिकाकर्ता ने पूर्वी दिल्ली के अंगद नगर में एक 120 गज के प्लॉट पर गैरकानूनी तरीके से निर्माण को ढहाने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। कोर्ट ने इस मामले में एमसीडी को संबंधित संपत्ति पर अवैध निर्माण की तफ्तीश करने को कहा। एमसीडी के साथ पुलिस ने भी याचिकाकर्ता को तलाशा, लेकिन वह बताए हुए पते पर नहीं मिला।

ब्लैकमेलिंग की नहीं दी जा सकती इजाजत

हाईकोर्ट की बेंच ने इन तथ्यों के सामने आने पर कहा कि स्पष्ट हो गया कि इस याचिका को दायर करने का मकसद क्या है। पूर्व में ऐसे तथ्य सामने आते रहे हैं, जिससे पता चलता है कि इस तरह की याचिका दायर कर अवैध वसूली का गैरकानूनी कारोबार शुरू किया जा रहा है। हालांकि बेंच ने कहा कि यदि कोई अवैध निर्माण हो रहा है तो एमसीडी अपने विवेक से उस पर कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है।

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हवा-रोशनी प्रभावित होने पर ही आएं

इस मामले में फैसला सुनाते हुए बेंच ने कहा कि यदि पड़ोस में किसी तरह का निर्माण कार्य हो रहा है और इससे पीड़ित पड़ोसी की रोशनी अथवा हवा प्रभावित हो रही है तभी वह इसकी शिकायत करे। इन आधारों पर अदालत भी आ सकता है, लेकिन बेमकसद अदालत का समय बर्बाद न करें। इन कार्यों के लिए सरकारी एजेंसियां अपना काम कर रही हैं।

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