फरीदाबाद में तोड़फोड़ की कार्रवाई के बाद दहशत का माहौल, लोगों ने बताया बीच का रास्ता
निवासियों ने मांग की कि सरकार जमीन का मूल्य निर्धारित करे और नियमानुसार भुगतान लेकर लोगों को मालिकाना अधिकार देदे। उनका कहना है कि इससे हजारों लोगों के आशियाने बच सकेंगे और लंबे समय से बसे परिवारों को राहत मिलेगी।

हरियाणा के फरीदाबाद में NIT-3 की नेहरू कॉलोनी में जारी नगर निगम की अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई के बाद लोगों में भय का माहौल है। इस दौरान कई परिवारों ने अपने घरों से सामान निकालना शुरू कर दिया है। लोगों को आशंका है कि आगे होने वाली तोड़फोड़ में उनके मकान और घरेलू सामान को नुकसान पहुंच सकता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि नगर निगम ने बिना पर्याप्त सूचना के रात करीब दो बजे कार्रवाई शुरू कर दी। उनका आरोप है कि यदि पहले से स्पष्ट जानकारी दी जाती तो वो लोग अपने सामान और परिवार की सुरक्षा के लिए बेहतर तैयारी कर सकते थे। उधर इस कार्रवाई का विरोध करते हुए लोगों ने बीच का रास्ता बताया और कहा कि सरकार को उन्हें बेदखल करने के बजाय नियमितीकरण का रास्ता निकालना चाहिए।
शनिवार सुबह धार्मिक स्थलों, मकानों और दुकानों को हटाने की कार्रवाई के बाद नेहरू कॉलोनी के कई हिस्सों में चिंता और अनिश्चितता का माहौल दिखाई दिया। गलियों में लोग अपने घरों से फर्नीचर, घरेलू उपकरण और अन्य जरूरी सामान बाहर निकालते नजर आए। कुछ परिवार सामान को रिश्तेदारों के यहां और किराये के कमरों में पहुंचाने की तैयारी करते दिखे।
लोगों ने बताया बीच का रास्ता
स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के समय अधिकांश परिवार घरों में सो रहे थे। ऐसे में यदि किसी मकान की दीवार अचानक गिर जाती तो बड़ा हादसा हो सकता था। कॉलोनी के निवासियों ने नगर निगम की कार्रवाई पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि वे पिछले 60 सालों से अधिक समय से यहां रह रहे हैं और अब उनकी तीसरी पीढ़ी भी इसी क्षेत्र में निवास कर रही है। कई परिवारों ने अपने जीवनभर की कमाई से यहां मकान बनाए हैं। उनका कहना है कि सरकार को उन्हें बेदखल करने के बजाय नियमितीकरण का रास्ता निकालना चाहिए।
निवासियों ने मांग की कि सरकार जमीन का मूल्य निर्धारित करे और नियमानुसार भुगतान लेकर लोगों को मालिकाना अधिकार दे। उनका कहना है कि इससे हजारों लोगों के आशियाने बच सकेंगे और लंबे समय से बसे परिवारों को राहत मिलेगी।
अधिकारी बोले- लोग नहीं पेश कर सके मालिकाना हक के पेपर्स
उधर नगर निगम के SDO सुरेंद्र हुड्डा ने बताया कि यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में की जा रही है। उन्होंने कहा कि संबंधित लोगों को पहले नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन कोई भी व्यक्ति जमीन पर अपना मालिकाना हक साबित करने वाले दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि संबंधित भूमि सरकारी है और अदालत के निर्देशों के अनुसार अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। दूसरी ओर, कॉलोनी के लोगों की चिंता बनी हुई है और वे अपने घरों के भविष्य को लेकर असमंजस में हैं।




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