Over 9000 deaths due to respiratory diseases in Delhi overall mortality rate goes up दिल्ली में एक साल में सांस की बीमारियों से 9211 लोगों की मौत; क्या कह रहे सरकारी आंकड़े, Ncr Hindi News - Hindustan
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दिल्ली में एक साल में सांस की बीमारियों से 9211 लोगों की मौत; क्या कह रहे सरकारी आंकड़े

दिल्ली में सांस से जुड़ी बीमारियों से मरने वालों की संख्या में बढ़ोतरी देखने को मिली है। दिल्ली सरकार के आंकड़ों के अनुसार 2024 में राष्ट्रीय राजधानी में सांस संबंधी बीमारियों से 9211 मौतें दर्ज की गईं, जो 2023 में 8801 थीं। इन बीमारियों में अस्थमा, निमोनिया, फेफड़ों का कैंसर और तपेदिक शामिल हैं।

Thu, 15 Jan 2026 06:30 PMSubodh Kumar Mishra पीटीआई, नई दिल्ली
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दिल्ली में एक साल में सांस की बीमारियों से 9211 लोगों की मौत; क्या कह रहे सरकारी आंकड़े

दिल्ली में सांस से जुड़ी बीमारियों से मरने वालों की संख्या में बढ़ोतरी देखने को मिली है। दिल्ली सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार 2024 में राष्ट्रीय राजधानी में सांस संबंधी बीमारियों से 9211 मौतें दर्ज की गईं, जो 2023 में 8801 थीं। सांस संबंधी बीमारियों में अस्थमा, निमोनिया, फेफड़ों का कैंसर और तपेदिक शामिल हैं।

दिल्ली सरकार द्वारा जारी नवीनतम आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी में 2024 में श्वसन संबंधी बीमारियों से 9211 मौतें दर्ज की गईं, जो 2023 में 8,801 थीं। यह पिछले कुछ वर्षों से जारी वृद्धि का संकेत है। सांस संबंधी बीमारियों के सामान्य प्रकारों में अस्थमा, निमोनिया, फेफड़ों का कैंसर और तपेदिक शामिल हैं, जिनसे अक्सर सांस लेने में दिक्कत होती है।

समग्र मृत्यु दर में भी वृद्धि

2024 में मौत का सबसे बड़ा कारण सर्कुलेटरी बीमारियां थीं। इसके बाद कम्यूनिकेबल डिजिजेज थे। राष्ट्रीय राजधानी में समग्र मृत्यु दर में भी वृद्धि देखी गई। दिल्ली में 2024 में कुल मौतों की संख्या बढ़कर 139480 हो गई, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 132391 थी। इनमें से 85391 पुरुष, 54051 महिलाएं और 38 अन्य लिंगों के थे। इनमें से 90883 मौतों को मेडिकल रूप से प्रमाणित किया गया था।

शिशु मृत्यु दर में मामूली सुधार

राष्ट्रीय राजधानी में शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) में मामूली सुधार हुआ है। यह प्रति 1000 जीवित जन्मों पर 22.4 दर्ज की गई, जबकि 2023 में यह 23.61 थी। आईएमआर एक वर्ष से कम आयु के शिशुओं की मृत्यु का माप है। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 21262 मौतें सर्कुलेटरी डिजिज के कारण हुईं। इनमें धमनी अवरोध, स्ट्रोक और हार्ट अटैक शामिल हैं। 2023 में यह संख्या 15714 थी।

राजधानी में मौत का दूसरा सबसे आम कारण कम्यूनिकेबल डिजिजेज थी। ये रोग आमतौर पर बैक्टीरिया, वायरस और फंगस के कारण फैलते हैं। अक्सर दूषित भोजन और पानी के माध्यम से फैलते हैं। पिछले वर्ष दर्ज की गई 20781 मौतों की तुलना में 2024 में 16060 मौतें हुईं।

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जन्म दर में गिरावट

आंकड़ों में यह भी बताया गया है कि 2024 में शहर में कुल 306459 नवजात शिशुओं का जन्म हुआ, जो पिछले वर्ष की तुलना में 8628 कम है। 2024 में जन्म दर 14 दर्ज की गई, जो 2023 के 14.66 से कम है। जबकि मृत्यु दर 2023 के 6.16 से बढ़कर 2024 में 6.37 हो गई है। जन्म और मृत्यु दर की गणना किसी स्थान के प्रति 1000 व्यक्तियों पर की जाती है। अगले 10 वर्षों में 2036 तक दिल्ली की जनसंख्या बढ़कर 2.65 करोड़ होने का अनुमान है। आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी में पांच वर्ष से कम आयु के 99.1 प्रतिशत लोगों के पास जन्म प्रमाण पत्र है।

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