खुशखबरी! अगले महीने खुलने जा रहा स्काईवॉक, नोएडा सेक्टर-51 से 52 मेट्रो को आपस में जोड़ेगा
इस स्काईवॉक का काम जून 2023 में शुरू किया गया था। अबतक कई डेडलाइन गुजर चुकी हैं लेकिन ये शुरू नहीं हो सका है। अगर अगले महीने स्काईवॉक जनता के लिए खोल दिया जाता है तो फिर मेट्रो से दिल्ली और नोएडा से ग्रेनो की ओर जाने वालों को इस इंटरचेंज पर स्टेशन से नीचे उतरने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

नोएडा के सेक्टर 51 मेट्रो स्टेशन (एक्वा लाइन) को सेक्टर 51 मेट्रो स्टेशन (ब्लू लाइन) से जोड़ने वाला 420 मीटर लंबा स्काईवॉक लगभग तैयार हो चुका है और एक महीने के भीतर आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा। नोएडा अथॉरिटी ने गुरुवार को ये जानकारी दी। 40 करोड़ रुपये की लागत से बना ये स्काईवॉक पुराने टिन शेड वाले पैदल रास्ते की जगह लेगा जो कि 300 मीटर लंबा था।
नया स्काईवॉक एयर कंडीशन से लैस होगा जिससे इसपर चलने वालों को गर्मी का एहसास नहीं होगा। नोएडा अथॉरिटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) कृष्णा कृनेष ने मीडिया को बताया, ‘इस स्काईवॉक में 0.5 मीटर प्रति सेकंड की गति से चलने वाला एक ट्रैवललेटर लगाया जाएगा ताकि इसका इस्तेमाल करने वालों को ब्लू लाइन और एक्वा लाइन के बीच आवाजाही में आसानी हो।’

बीम को हटाने की तैयारी
हिंदुस्तान टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक नोएडा अथॉरिटी के सिविल डिपार्टमेंट ने कहा है कि वे सेक्टर 51 मेट्रो स्टेशन में मौजूद उस बीम को हटा देंगे, जो स्काईवॉक के गलियारे की एंट्री में बाधा डाल रहा है। अधिकारियों ने दावा किया कि मेट्रो स्टेशन के दो कॉलम के बीच मौजूद बीम को हटाने से स्काईवॉक की मजबूती पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सीईओ ने बताया है कि 'हम बीम से जुड़ी इस समस्या को दूर करने के लिए सुधारात्मक कदम उठाएंगे और एक महीने के भीतर स्काईवॉक को खोल दिया जाएगा।'
उत्तर प्रदेश आर्किटेक्ट्स एसोसिएशन ने बताया बड़ी चूक
अथॉरिटी के इस फैसले को उत्तर प्रदेश आर्किटेक्ट्स एसोसिएशन (नोएडा) के अध्यक्ष और वरिष्ठ नगर नियोजक अतुल कुमार गुप्ता ने इसे एक 'बड़ी चूक' बताया है। उन्होंने कहा है कि डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने और टेक्नीकल वेरिफिकेशन के दौरान इसपर ध्यान क्यों नहीं दिया गया। वे अब बीम को कैसे हटा सकते हैं? हालांकि एनएमआरसी अधिकारियों ने कहा कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि पहले स्काईवॉक को एक सिंगल पिलर पर बनाने की योजना थी, लेकिन बाद में इसे दो पिलर पर बनाने का फैसला लिया गया। जब काम शुरू हुआ तो जमीन के नीचे बिजली की केबल मिलीं। ऐसे में आईआईटी दिल्ली ने इसका टेक्नीकल वेरिफिकेशन किया और फिर प्रोजेक्ट को दो पिलर पर दोबारा डिजाइन किया गया है। वहीं नोएडा अथॉरिटी के उप महाप्रबंधक विजय रावल ने कहा कि यह ऐसी गलती नहीं है जिसे सुधारा न जा सके।
बीत चुकी कई डेडलाइन
आपको बता दें कि इस स्काईवॉक का काम जून 2023 में शुरू किया गया था। अबतक कई डेडलाइन गुजर चुकी हैं लेकिन ये शुरू नहीं हो सका है। अगर अगले महीने स्काईवॉक जनता के लिए खोल दिया जाता है तो फिर मेट्रो से दिल्ली और नोएडा से ग्रेनो की ओर जाने वालों को इस इंटरचेंज पर स्टेशन से नीचे उतरने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
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