नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट कैसे बदल देगा दिल्ली-NCR की तस्वीर? सुविधाओं से लेकर कनेक्टिविटी तक, जानें सब कुछ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार (28 मार्च) को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन करने जा रहे हैं। उद्घाटन से पहले एयरपोर्ट के आस-पास सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार (28 मार्च) को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन करने जा रहे हैं। उद्घाटन से पहले एयरपोर्ट के आस-पास सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। उद्घाटन से पहले सबकी नजरें क्रिस्टोफ श्नेलमान पर हैं जिन्होंने इस एयरपोर्ट प्रोजेक्ट को कागज के नक्शे से हकीकत में बदलने में अहम भूमिका निभाई।
क्रिस्टोफ श्नेलमान स्विटजरलैंड के बेहद ही अनुभवी एविएशन एक्सपर्ट हैं जिनके पास इस सेक्टर में कई वर्षों का अनुभव है। यही वजह थी कि साल 2020 में उन्हें भारत के सबसे महत्वाकांक्षी एयर प्रोजेक्ट नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का सीईओ नियुक्त किया गया था। सीईओ नियुक्त होने से पहले वे वे 'फ्लुघफेन ज्यूरिख एजी' (Flughafen Zurich AG) से जुड़े थे, यह वही कंपनी है जिसे जेवर एयरपोर्ट को बनाने वाली और ऑपरेट करने का ठेका मिला है। आपको बता दें कि इस एयरपोर्ट को 'यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड' (YIAPL) ने बनाया है और वही इसे चलाएगी। यह कंपनी पूरी तरह से 'ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल' की ही सहायक कंपनी है। जो उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम कर रही है।
केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का भी काम देख चुके
क्रिस्टोफ श्नेलमान भारतीय बाजार की भी अच्छी समझ रखते हैं। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से पहले वे बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का भी काम देख चुके हैं। इसके जरिए उन्होंने भारत के एक बड़े एयरपोर्ट का कामकाज नजदीक से देखा। उनका करियर एयरपोर्ट का संचालन, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और बड़े पैमाने पर परियोजनाओं को पूरा करने में बीता है।
चुनौती का सामना करते हुए एयरपोर्ट का कामकाज जारी रखा
यही वजह रही कि उन्हें भारत के महत्वाकांक्षी एयर प्रोजेक्ट में अहम जिम्मेदारी सौंपी गई। बतौरी सीईओ उन्हें भी कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा जिसमें जमीन अधिग्रहण से लेकर कोविड-19 महामारी के दौरान आई रुकावटें शामिल हैं। मगर उन्होंने हर चुनौती का सामना करते हुए एयरपोर्ट के कामकाज को जारी रखा और आज यह लॉन्च के लिए तैयार खड़ा है। क्रिस्टोफ श्नेलमान ने केंद्र सरकार, राज्य सरकार के साथ ही प्राइवेट कंपनियों के साथ भी बेहतरीन तालमेल बनाए रखा ताकि तय डेडलाइन में एयरपोर्ट का काम पूरा हो जाए। अब जबकि एयरपोर्ट का काम पूरा हो चुका है तो क्रिस्टोफ की जिम्मेदारी बदलकर अब इसके संचालन की हो गई है।
क्यों खास है नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट?
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने के बाद दिल्ली एनसीआर के लोगों को इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (पालम) पर के अलावा एक अन्य विकल्प मिलेगा। इससे इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर दबाव कम होगा। यात्रियों को नोएडा- ग्रेटर नोएडा से पालम आने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
एयरपोर्ट को बनाने में कितना खर्च आया?
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पहले चरण को बनाने में लगभग 11,200 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है, जिसे सरकार और प्राइवेट कंपनी ने मिलकर (पीपीपी मॉडल) तैयार किया है।'
नोएडा एयरपोर्ट से कौन-कौन सी एयरलाइनें उड़ान भरेंगी?
इंडिगो ने नवंबर 2023 में उड़ानें शुरू करने के लिए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के साथ समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके बाद जनवरी 2024 में अकासा एयर ने भी अपनी सेवाएं देने पर राजी हुई। वहीं एयर इंडिया एक्सप्रेस ने भी उड़ानें शुरू की पुष्टि कर दी है। अन्य घरेलू और अंतरराष्ट्रीय एयरलाइनों के साथ-साथ एयर कार्गो ऑपरेटरों के साथ भी बातचीत जारी है। आपको बता दें कि उड़ान अप्रैल से शुरू होने की संभावना है। देश के 60 से 65 प्रमुख शहरों के लिए नोएडा एयरपोर्ट से विमानों की उड़ान होगी।
कौन-से लाइसेंस मिल चुके?
गौतमबुद्ध नगर के जेवर में स्थित नोएडा एयरपोर्ट को नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से एयरड्रोम लाइसेंस मिल चुका है। एयरोड्रम लाइसेंस किसी भी एयरपोर्ट से फ्लाइट ऑपरेशन शुरू होने से पहले फाइनल रेगुलेटरी क्लियरेंस है। इसके अलावा, नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो ने भी घरेलू यात्रियों और घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कार्गो (सामान लाने-ले जाने) के लिए सुरक्षा मंजूरी दे दी है।
कितना बड़ा है नोएडा एयरपोर्ट?
एयरपोर्ट का रनवे 3900 मीटर लंबा है। रनवे पर बड़े जहाज भी लैंडिंग कर सकते हैं। रनवे पर मॉर्डन नेविगेशन सिस्टम जैसे इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम और बेहतरीन लाइटिंग व्यवस्था है जिससे दिन-रात हर तरह के मौसम में इसपर सुरक्षित लैंडिग की जा सकती है।
कार्गो और एमआरओ की भी सुविधा
एयरपोर्ट में मल्टी मोडल कार्गो के साथ लॉजिस्टिक्स जोन की सुविधा है। इन्हें सालाना 2.5 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा कार्गो संभालने के लिए डिजाइन किया गया है और इसकी क्षमता को लगभग 18 लाख मीट्रिक टन तक बढ़ाया जा सकता है। यहां 40 एकड़ में एमआरओ (हवाई जहाजों के रिपेयर की सुविधा) भी है। वहीं एयरपोर्ट की बनावट में भारतीय विरासत की झलक दिखती है, जिसमें घाटों और हवेलियों जैसे डिजाइन शामिल किए गए हैं।
कैसे पहुंच सकते हैं एयरपोर्ट?
एयरपोर्ट कई एक्सप्रेसवे से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है और जल्द ही यहां मेट्रो लाइन लाने की भी तैयारी चल रही है। ऐसे में अभी सड़क के जरिए जेवर एयरपोर्ट तक पहुंचना सबसे अच्छा विकल्प है। दिल्ली से जेवर एयरपोर्ट जाने का सबसे आसान रास्ता नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे है, जो आगे चलकर यमुना एक्सप्रेसवे में मिल जाता है। यहां पहुंचने में 60 से 90 मिनट या फिर इससे ज्यादा (टैफिक पर निर्भर) लग सकता है।
नोएडा से जेवर एयरपोर्ट तक का रास्ता
नोएडा से जाने वाले यात्री नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो आगे चलकर सीधे यमुना एक्सप्रेसवे से जुड़ जाता है। इस सफर में करीब 45 से 60 मिनट का समय लग सकता है।
ग्रेटर नोएडा वाले कैसे पहुंच सकते हैं?
वहीं अगर आप ग्रेटर नोएडा से जा रहे हैं, तो यह रास्ता और भी छोटा होगा। यमुना एक्सप्रेसवे के जरिए आप महज 30 से 45 मिनट में एयरपोर्ट पहुंच सकते हैं, जिससे जेवर एयरपोर्ट पहुचना यहां से सबसे आसान है।
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