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बचाव दल की लापरवाही से गई युवराज की जान? SIT ने सौंपी नोएडा इंजीनियर मौत की जांच रिपोर्ट

नोएडा के सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में एसआईटी ने 600 से अधिक पन्नों की अपनी जांच रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। सूत्रों के अनुसार, एसआईटी ने जांच रिपोर्ट में मौके पर गए बचाव दल की लापरवाही मानी है।  

Thu, 29 Jan 2026 06:36 AMPraveen Sharma हिन्दुस्तान, नोएडा
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बचाव दल की लापरवाही से गई युवराज की जान? SIT ने सौंपी नोएडा इंजीनियर मौत की जांच रिपोर्ट

नोएडा के सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में एसआईटी ने अपनी जांच रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। सूत्रों के अनुसार, एसआईटी ने जांच रिपोर्ट में मौके पर गए बचाव दल की लापरवाही मानी है। एसआईटी की यह जांच रिपोर्ट 600 से अधिक पन्नों की है।

सेक्टर-150 में 16 जनवरी की रात पानी से भरे गहरे गड्ढे में गिरकर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत हो गई थी। मामले की जांच के लिए 18 जनवरी को एसआईटी गठित की गई थी। एसआईटी की जांच रिपोर्ट को लेकर कोई भी आधिकारिक तौर पर बोलने को तैयार नहीं है। मगर सूत्र बताते हैं कि एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में एसडीआरएफ, अग्निशमन, पुलिस और नोएडा प्राधिकरण के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों को जिम्मेदार माना है।

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रिपोर्ट में जिक्र है कि युवराज ने अपने मोबाइल से कॉल कर पिता को हादसे की जानकारी दी। पिता ने पुलिस को फोन किया। इसके बाद पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और दमकल की टीम को बुलाया गया। आरोप है कि युवराज दो घंटे तक कार के ऊपर लेटकर बचाने की गुहार लगाता रहा, लेकिन मदद के लिए कोई आगे नहीं आया।

जिम्मेदार अधिकारियों के नामों का उल्लेख

एसआईटी द्वारा जलभराव से जुड़ी प्लानिंग, स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम, कंट्रोल रूम की निगरानी, रेस्क्यू रिस्पांस टाइम और मौके पर तैनात अधिकारियों की भूमिका की जांच की गई। जांच रिपोर्ट में लापरवाह अधिकारियों और कर्मचारियों के नामों का उल्लेख है। जांच में अहम सवाल यह रहा, युवराज को बाहर निकालने में दो घंटे क्यों लगे। एसआईटी ने संबंधित भूखंड से मिट्टी का खनन करने के लिए प्रशासन से अनुमति को लेकर भी जानकारी ली।

एसआईटी की रिपोर्ट पर कार्रवाई से पहले प्राधिकरण में तबादले

सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में एसआईटी की रिपोर्ट पर शासन इसी सप्ताह कार्रवाई कर सकता है। वहीं, एसआईटी की रिपोर्ट से पहले जिले के तीनों प्राधिकरण में तबादलों का दौर भी शुरू हो गया है। मंगलवार रात के बाद बुधवार को भी तबादले की सूची जारी की गई। उन अधिकारियों के तबादले किए गए, जिनको पिछले साल पदोन्नत किया गया था। आने वाले दिनों में एसआईटी की रिपोर्ट पर और तबादले हो सकते हैं।

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शासन की तरफ से बुधवार को जारी सूची में नोएडा प्राधिकरण के वर्क सर्किल-9 के वरिष्ठ प्रबंधक सतेंद्र गिरि का तबादला यूपीसीडा में किया गया। इसके अलावा प्राधिकरण के जल-सीवर विभाग के महाप्रबंधक आरपी सिंह को पदोन्नति के बाद नोएडा में ही नए सिरे से तैनाती के आदेश जारी किए गए। इससे पहले मंगलवार रात भी शासन स्तर से तबादलों की सूची जारी की गई थी। वर्क सर्किल-7 के प्रबंधक रूप वशिष्ठ का तबादला यमुना विकास प्राधिकरण में किया गया था। प्राधिकरण के जनस्वास्थ्य विभाग में कार्यरत परियोजना अभियंता आर.के शर्मा का तबादला यूपीसीडा में किया गया था। आर.के शर्मा इसी साल 30 अप्रैल को सेवानिवृत्त भी होने वाले हैं। वर्क सर्किल-4 के प्रभारी रोहित सिंह का तबादला यूपीसीडा में किया गया था। ग्रेटर नोएडा में कार्यरत वरिष्ठ प्रबंधक चेतराम का तबादला यूपीसीडा में किया गया। यमुना प्राधिकरण में कार्यरत प्रबंधक यशपाल सिंह का तबादला नोएडा में किया गया।

तबादले से लेकर निलंबन तक की कार्रवाई संभव

आधिकारिक सूत्रों की मानें तो इसी सप्ताह एसआईटी की रिपोर्ट पर शासन स्तर से कार्रवाई हो सकती है। इस कार्रवाई के तहत नोएडा प्राधिकरण में कार्यरत अधिकारियों के तबादले से लेकर निलंबन तक की कार्रवाई हो सकती है। ऐसे में यहां तैनात अधिकारियों के चेहरे पर चिंता की लकीरें बढ़ गई हैं।

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नोटिस के बाद भी इंतजाम नहीं किए

सेक्टर-150 में जिस बिल्डर के भूखंड के गड्ढे में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत हुई, वहां सुरक्षा इंतजाम कराने के लिए नोएडा के अलग-अलग विभागों की ओर से बिल्डर को पांच बार नोटिस भेजे गए। ये नोटिस वर्ष 2022 से वर्ष 2025 के बीच अलग-अलग महीने में भेजे गए। इसके बावजूद बिल्डर ने कोई काम नहीं कराया।

नोएडा ने एसआईटी को दिए जवाब में इसकी जानकारी दी है। इसके अलावा पुलिस ने प्राधिकरण की इस रिपोर्ट को न्यायालय के समक्ष भी रखा है। ऐसे में प्राधिकरण ने इस मौत के गड्ढे के लिए बिल्डर को जिम्मेदार माना है। सूत्रों की मानें तो प्राधिकरण के नियोजन विभाग की तरफ से दो बार बिल्डर को पत्र जारी किया गया था। इसमें यहां हो रखे गड्ढे के पास सुरक्षा इंतजाम करने को कहा गया था। साइट पर काम न कर विज्ञापन से संबंधित बोर्ड लगाने पर बिल्डर पर जुर्माना भी लगाया गया था।

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