'मेरा बेटा मदद मांग चिल्ला रहा था, लोग वीडियो बना रहे थे'; इंजीनियर युवराज के पिता का छलका दर्द
नोएडा के सेक्टर 150 के पास नाले में कार गिरने से 27 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के एक दिन बाद पीड़ित परिवार ने गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का आरोप लगाया है। युवराज के पिता का दावा है कि अगर समय पर मदद मिल जाती तो उनके बेटे की जान बच सकती थी।

नोएडा के सेक्टर 150 के पास नाले में कार गिरने से 27 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के एक दिन बाद पीड़ित परिवार ने गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का आरोप लगाया है। युवराज के पिता का दावा है कि अगर समय पर मदद मिल जाती तो उनके बेटे की जान बच सकती थी, क्योंकि वह दो घंटे तक मदद के लिए चिल्लाता रहा। यह घटना 16-17 जनवरी की रात को नॉलेज पार्क पुलिस स्टेशन के इलाके में हुई।
पीड़ित के पिता राजकुमार मेहता ने कहा कि उनका बेटा लगभग दो घंटे तक पानी में जिंदगी और मौत से लड़ता रहा। "मेरा बेटा खुद को बचाने के लिए संघर्ष कर रहा था। मेरा बेटा मदद के लिए चिल्ला रहा था, लोगों से मदद मांग रहा था, लेकिन ज्यादातर भीड़ बस तमाशबीन बनकर देख रही थी। कुछ लोग वीडियो बना रहे थे। मेरा बेटा अपनी जान बचाने के लिए 2 घंटे तक जूझता रहा। वहां मौजूद अधिकारी और कर्मचारी उसे बचा नहीं पाए। उनके पास कोई गोताखोर नहीं थे। इस पूरे मामले में प्रशासन की तरफ से लापरवाही हुई है।"
उन्होंने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई और बेहतर सुरक्षा व्यवस्था के लिए कदम उठाने की मांग की है।
नोएडा प्राधिकरण के एडिशनल चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर सतीश पाल ने कहा कि जिम्मेदारी तय करने के लिए जांच चल रही है। जांच से पता चलेगा कि वह जमीन किसकी थी, किसे अलॉट की गई थी और उसके रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी थी। वह सड़क ऐसे इलाके में है, जो अभी पूरी तरह से विकसित सेक्टर नहीं है। उन्होंने जांच के बाद कार्रवाई का आश्वासन दिया।
नोएडा पुलिस के मुताबिक यह हादसा तब हुआ जब कार सेक्टर 150 चौराहे पर एक नाले की बाउंड्री तोड़कर पानी से भरे गड्ढे में जा गिरी। मृतक की पहचान सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज के तौर पर हुई। युवराज नोएडा सेक्टर-150 के निवासी थे। एसडीआरएफ/एनडीआरएफ की टीमों के सर्च ऑपरेशन के बाद युवराज का शव बरामद कर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है।
ज्वाइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस राजीव नारायण मिश्रा ने इस घटना को बेहद दुखद बताया और कहा कि पुलिस पीड़ित के परिवार के साथ है। उन्होंने कहा कि फायर ब्रिगेड की सीढ़ियों, क्रेन, सर्च लाइट और एक अस्थायी नाव की मदद से तुरंत बचाव कार्य शुरू किया गया था, लेकिन उस समय विजिबिलिटी लगभग शून्य थी।




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