Noida engineer Yuvraj Mehta death case SIT probe complete, report to be submitted to UP govt today नोएडा इंजीनियर युवराज मेहता मौत मामला : SIT की जांच पूरी, आज शासन को सौंपी जाएगी रिपोर्ट, Ncr Hindi News - Hindustan
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नोएडा इंजीनियर युवराज मेहता मौत मामला : SIT की जांच पूरी, आज शासन को सौंपी जाएगी रिपोर्ट

नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में शासन के निर्देश पर गठित एसआईटी ने अपनी जांच पूरी कर ली है। एसआईटी अपनी जांच रिपोर्ट मंगलवार को शासन को सौंप देगी। इस जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन स्तर से कुछ और अधिकारियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।

Tue, 27 Jan 2026 06:39 AMPraveen Sharma हिन्दुस्तान, नोएडा
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नोएडा इंजीनियर युवराज मेहता मौत मामला : SIT की जांच पूरी, आज शासन को सौंपी जाएगी रिपोर्ट

नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में शासन के निर्देश पर गठित एसआईटी ने अपनी जांच पूरी कर ली है। एसआईटी अपनी जांच रिपोर्ट मंगलवार को शासन को सौंप देगी। इस जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन स्तर से कुछ और अधिकारियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।

एसआईटी ने 600 से अधिक पन्नों की रिपोर्ट तैयार की है और 150 से अधिक लोगों के बयान लिए गए हैं। सेक्टर-150 में हुई सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत के मामले में शासन के निर्देश पर गठित हुए एसआईटी ने अपनी जांच पूरी कर रिपोर्ट तैयार कर ली है। इस रिपोर्ट को तैयार करने से पहले एसआईटी ने नोएडा प्राधिकरण, प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों से पूछताछ कर उनके बयान लिए गए हैं।

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सूत्रों ने बताया कि तीनों विभागों ने एसआईटी को दी रिपोर्ट में अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए बचाव किया है। तीनों विभागों की 600 से अधिक पन्नों की रिपोर्ट बताई जा रही है। सूत्रों ने बताया कि अधिकारी न तो बयान में और न ही लिखित में कुछ सवालों के सटीक जबाव दे सके।

प्राधिकरण के नियोजन विभाग, ट्रैफिक सेल व सिविल विभाग के संबंधित क्षेत्र के अधिकारी सवालों का सटीक जबाव नहीं दे सके। इनमें मुख्य रूप से हादसे वाले भूखंड के बिल्डर पर कार्रवाई नहीं करने, भूखंड की चारदीवारी नही करने और दो घंटे तक रेस्क्यू नहीं कर पाने का सवाल शामिल है। अधिकांश मामले में अफसरों ने शासनादेश, न्यायालय के आदेश, बिल्डर को दिए गए पत्र, जानकारी मिलने पर तुरंत पहुंचने, निकालने के प्रयास करने समेत कई चीजों का हवाला देते हुए अपना बचाव किया है। सभी के बयान और रिकॉर्ड लेने के बाद एसआईटी ने अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार की है। संभवत: यह रिपोर्ट मंगलवार को शासन को सौंपी जाएगी।

आज सौपेंगे शासन को रिपोर्ट : एडीजी

मेरठ जोन के एडीएजी भानु भास्कर ने कहा कि यह रिपोर्ट तैयार हो चुकी है और मंगलवार को वह शासन को अपनी रिपोर्ट सौंप देंगे। जिसके बाद इस मामले में शासन स्तर पर ही फैसला होगा। उन्होंने रिपोर्ट के गोपनीय होने के कारण इस पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उल्लेखनीय है कि यह एसआईटी एडीजी की अध्यक्षता में ही बनाई गई थी।

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कार का डेटा जुटाने में लगे उसके दोस्त

युवराज की मौत के दौरान अंतिम समय में क्या हालात थे और यह हादसा कैसे हुआ, इस तरह के सवालों का जवाब जानने के लिए युवराज के दोस्त जुटे हैं। कार में लगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का डेटा जुटाने के लिए कार कंपनी से भी संपर्क किया है। कार फिलहाल सूरजपुर स्थित पुलिस लाइन में कड़े सुरक्षा घेरे में खड़ी है। पुलिस की फोरेंसिक टीम के साथ अन्य टेक्निकल विशेषज्ञ कार में लगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की गहन जांच कर रहे हैं। वहीं उसके दोस्त कार में लगे वॉइस रिकॉर्डर और कैमरों से कुछ जानकारी मिलने की उम्मीद जता रहे हैं।

कोर्ट ने पूछा था, किसकी है लापरवाही

नोएडा पुलिस ने इस प्रकरण में बिल्डर अभय सिंह को सूरजपुर स्थित कोर्ट में 21 जनवरी को पेश किया था। इस दौरान कोर्ट ने इस मामले में पुलिस को फटकार लगाई और तल्ख टिप्पणी करते हुए पुलिस को ये निर्देश दिया कि जांच में ये भी साफ होना चाहिए कि लापरवाही किसकी है, नाला अगर टूटा है तो उसका जिम्मेदार कौन है? इतना ही नहीं बैरिकेडिंग अगर नहीं लगी है तो इसका जिम्मेदार कौन है? ये सब जांच का हिस्सा होना चाहिए, क्योंकि जब इसको लेकर शिकायत की जा रही थी तो उचित समय पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? यह सब जांच का हिस्सा होना चाहिए। जब शिकायत की जा रही थी तो उचित समय पर कार्रवाई कैसे नहीं की गई।

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प्राधिकरण के लिए ये सवाल बने चुनौती

● भूखंड पर निर्माण नहीं करने वाले बिल्डर को सिर्फ नोटिस देकर क्यों इतिश्री की गई। आवंटन निरस्त जैसी कार्रवाई कर भूखंड को कब्जे में क्यों नहीं लिया गया।

● करीब पांच साल से गहरे गड्ढे में भरे पानी को बिल्डर के माध्यम से क्यों नहीं निकलवाया गया और न ही सुरक्षा के लिए चारदीवारी कराई गई।

● 90 डिग्री आकार वाले घटनास्थल के पास बैरिकेडिंग क्यों नहीं कराई गई। चेतावनी बोर्ड या रिफ्लेक्टर भी नहीं लगाए गए। रंबल स्ट्रिप जैसे अन्य सुरक्षा इंतजाम भी नहीं थे।

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