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नोएडा इंजीनियर मौत मामला: SIT की जांच शुरू, दो दिन में मांगे सवालों के जवाब

नोएडा में इंजीनियर की मौत के बाद SIT ने प्राधिकरण दफ्तर और घटनास्थल का जायजा लिया, जिसमें सुरक्षा खामियों और बचाव कार्य में देरी की जांच करते हुए संबंधित विभागों से दो दिन में जवाब तलब किया है।

Wed, 21 Jan 2026 07:08 AMAnubhav Shakya लाइव हिन्दुस्तान, विक्रम शर्मा। नोएडा
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नोएडा इंजीनियर मौत मामला: SIT की जांच शुरू, दो दिन में मांगे सवालों के जवाब

मुख्यमंत्री के निर्देश पर गठित एसआईटी ने इंजीनियर की मौत मामले की जांच मंगलवार को शुरू कर दी। एसआईटी ने करीब चार घंटे तक प्राधिकरण के दफ्तर में हर पहलू पर जांच की। नोएडा प्राधिकरण, जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन को इस घटनाक्रम से जुड़े सवालों की सूची सौंपते हुए दो दिन के अंदर जवाब मांगे।

एसआईटी बुधवार को दोबारा प्राधिकरण दफ्तर आ सकती है। मेरठ जोन के अपर पुलिस महानिदेशक भानु भास्कर की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय एसआईटी गठित की गई है। इसमें सदस्य के तौर पर मंडलायुक्त मेरठ भानू चंद्र गोस्वामी और लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता शामिल हैं। एसआईटी दोपहर करीब सवा बारह बजे नोएडा प्राधिकरण के दफ्तर पहुंची। एसआईटी ने प्राधिकरण के बोर्ड रूम में पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह, जिलाधिकारी मेधा रूपम और नोएडा के एसीईओ कृष्णा करुणेश से घटनाक्रम के बारे में जानकारी ली। इंजीनियर के पिता से बात की। ढाई घंटे तक प्राधिकरण दफ्तर में रुकने के बाद एसआईटी ने सेक्टर-150 जाकर हालात देखे। आधा घंटे तक घटनास्थल पर रुकने के दौरान एसआईटी ने जांच की। इसके बाद वापस नोएडा प्राधिकरण के दफ्तर पहुंची और अधिकारियों के बयान लेने से लेकर स्पोर्ट्स सिटी परियोजना से जुड़ी फाइलों की जांच शुरू कर दी।

कई बिंदुओं पर जांच

एसआईटी शाम को फिर प्राधिकरण के दफ्तर पहुंची। अधिकारियों की ओर से बताया गया कि जिस जगह यह हादसा हुआ, उसके पास ही रिफ्लेक्टिव वाला बोर्ड लगा है। करीब 20-25 मीटर पहले ब्रेकर भी था। एसआईटी ने नियोजन विभाग के अधिकारियों से मानचित्र की मंजूरी देने की प्रक्रिया जानी। किसी अन्य बिंदु पर अधिकारियों से पूछताछ नहीं की। प्राधिकरण के अधिकारियों को स्पोर्ट्स सिटी, सिविल, ट्रैफिक सेल से जुड़े करीब 10 सवालों की लिस्ट सौंपकर दो दिन में जवाब देने को कहा। इसी तरह कुछ सवालों की लिस्ट जिला और पुलिस प्रशासन के अधिकारियों को सौंपते हुए जवाब मांगे। एसआईटी की जांच का प्रमुख केंद्र इंजीनियर को बचाने में हुई देरी को लेकर है।

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हर पहलू पर जांच कर रिपोर्ट देंगे : भानु भास्कर

अपर पुलिस महानिदेशक भानु भास्कर ने कहा कि सभी पहलुओं पर जांच करते हुए पांच दिन के अंदर रिपोर्ट शासन को देनी है। किसकी गलती से यह हादसा हुआ, क्या कर सकते थे जिससे हादसा न होता, इसका पता लगाएंगे। प्राधिकरण, पुलिस, अग्निमशन विभाग समेत जो भी विभाग इस घटनाक्रम से लिंक होगा, उसकी भूमिका की जांच की जाएगी।

पिता ने कहा, प्रयास होता तो मेरा बेटा बच जाता

एसआईटी ने इंजीनियर के पिता को प्राधिकरण के दफ्तर बुलाया। आधे घंटे तक उनसे हर पहलू पर बात की। पिता ने कहा कि हर सिस्टम सही ढंग से काम करता तो उनका बेटा बच सकता था। दूसरी ओर, पिता ने यूपी सरकार की ओर से की गई कार्रवाई पर संतोष व्यक्त किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने की इच्छा भी व्यक्त की है।

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टूटी नाले की दीवार क्यों नहीं बनवाई

एसआईटी ने अफसरों से सवाल किया कि जिस जगह हादसा हुआ, वहां पर कुछ दिन पहले एक ट्रक की टक्कर से नाले की दीवार टूट गई थी। उसको अब तक क्यों नहीं बनवाया गया। इस बारे में अफसरों ने कहा कि इससे संबंधित कोई शिकायत कोतवाली में नहीं थी। प्राधिकरण को इसके बारे में नहीं पता था।

सड़क से 100 मीटर अंदर मिली कार

सेक्टर-150 की टाटा यूरेका सोसाइटी में रहने वाले इंजीनियर युवराज मेहता की कार शुक्रवार की रात एक बिल्डर के खाली पड़े भूखंड में भरे पानी में जा गिरी थी। इंजीनियर का शव निकाल लिया गया था, लेकिन कार मंगलवार को निकल पाई। यह सड़क से करीब 100 मीटर अंदर मिली।

एनडीआरएफ की टीम सुबह करीब 11:30 बजे कार को निकालने के लिए घटनास्थल पर पहुंची। टीम नाव के सहारे पानी में उतरी। इसके बाद सोनार यंत्र को पानी में डालकर सर्च अभियान चलाया गया। दो गोताखोर भी पानी में उतरे। काफी मशक्कत के बाद कार का पता चला और उसे बाहर निकाला गया। इस दौरान दिनभर घटना स्थल पर लोगों की भीड़ जुटी रही। भीड़ को संभालने के लिए पुलिस को घटनास्थल पर रस्सी बांधनी पड़ी। कार गिरने के बाद इंजीनियर ने मदद की गुहार लगाई थी, लेकिन सरकारी सिस्टम इंजीनियर को बचा नहीं सका और पिता व बचाव दल के सामने पानी में डूबकर उनकी मौत हो गई। घटनास्थल पर मौजूद लोगों का कहना है कि जिस तरह कार निकालने का प्रयास हुआ, उसी तरह इंजीनियर को बचाने की कोशिश होती तो आज युवराज जिंदा होते।

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फोरेंसिक जांच संभव

कार को पानी से बाहर निकालने के बाद उसकी फोरेंसिक जांच कराने की मांग शुरू हो गई है। कार की फोरेंसिक जांच से पता चल सकेगा कि हादसा कैसे हुआ। लोग कार में तकनीकी खामी, रफ्तार तेज होने जैसी बातें भी कह रहे। ऐसे में कार की फोरेंसिक जांच करवाने की चर्चा हो रही है।

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